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Gorakhpur News: 130 साल पुरानी दुर्गापूजा की परंपरा, लाहिड़ी मंडप में आज भी कायम है आस्था

Fri, 09 Oct 2026 03:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Fri, 09 Oct 2026 03:09 AM IST
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The 130-year-old Durga Puja tradition continues; faith remains steadfast at the Lahiri Mandap.
वर्ष 1895-96 में सिविल अस्पताल से हुई थी सार्वजनिक पूजा की शुरुआत, शहर के रईसों और बंगाली समाज ने बढ़ाया कारवां
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गोरखपुर। गोरक्षनगरी में दुर्गापूजा की परंपरा करीब सवा सौ साल पुरानी है। उपलब्ध दस्तावेज, पत्रिकाओं और जनश्रुतियों के अनुसार शहर में सार्वजनिक दुर्गापूजा की शुरुआत वर्ष 1895-96 में सिविल अस्पताल परिसर से हुई थी। तत्कालीन सिविल सर्जन स्व. डॉ. योगेश्वर राय को इसकी शुरुआत का श्रेय दिया जाता है। इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर पूजा का सिलसिला आगे बढ़ा और आज दुर्गाबाड़ी का लाहिड़ी मंडप इस परंपरा की पहचान बन चुका है।
दुर्गाबाड़ी बंगाली समिति के संरक्षक डॉ. राम रतन बनर्जी और सचिव अभिषेक चटर्जी के अनुसार वर्ष 1897 के बाद शहर में प्लेग फैलने के कारण 1903 तक पूजा नहीं हो सकी। 1904-05 में तत्कालीन जुबिली स्कूल के प्रधानाचार्य स्व. रायसाहब अघोरनाथ चट्टोपाध्याय ने स्कूल परिसर में सार्वजनिक आयोजन कराया। वर्ष 1907 में डॉ. कांतिचंद्र सेन ने अलीनगर के घसमंडी में पूजा शुरू कराई। इसमें शहरवासियों के साथ रईस गिरधर दास, रईस पुरुषोत्तम दास, भगवती प्रसाद और उचवा के जाहिद अली शब्जपोश ने भी सहयोग किया।
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विद्यासागर लाइब्रेरी से बनी बंगाली समिति
वर्ष 1928 में ज्ञानचंद्र सेन ने विद्यासागर लाइब्रेरी, आर्यनाटक समाज और सुहृद समिति को एकजुट कर बंगाली समिति का गठन किया। उसी वर्ष उनके निधन के बाद समिति ने 1932-33 में नखास चौक के पास रईस अंबाचरण अस्थाना के हाते में पूजा कराई। 1934 से 1942 तक चरनलाल चौराहे की कंबल फैक्टरी में आयोजन हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान प्रशासन के आदेश पर फैक्टरी परिसर खाली करना पड़ा तो पूजा स्थल फिर बदलना पड़ा।
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47 दिन में बना लाहिड़ी मंडप
इसके बाद दीवान बाजार में पूजा शुरू हुई, लेकिन वर्ष 1952 में यहां से भी आयोजन स्थल छोड़ना पड़ा। इसी दौरान भगवती प्रसाद ने वर्तमान पूजास्थल के लिए जमीन दान की। डॉ. केदारनाथ लाहिड़ी की पहल पर व्यवसायी स्व. पंचानन कुंडू ने महज 47 दिन में पूजा मंडप तैयार कराया। यही मंडप आज लाहिड़ी मंडप के नाम से प्रसिद्ध है। वर्ष 1952 से यहां बंगाली समिति की ओर से दुर्गामूर्ति स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। इस वर्ष भी दुर्गाबाड़ी में आयोजन की भव्य तैयारी है।
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