Gorakhpur: गीले कूड़े से बायो सीएनजी की संभावना देखने पहुंची टीम, पीपीपी मॉडल में होगा प्लांट का निर्माण
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने कहा कि इंदौर से आई टीम महानगर में पांच सितंबर तक रुक कर गीला कचरा मिलने की समीक्षा करेगी। घर-घर जाकर भी गीला से सूखा कचरा अलग-अलग करने की स्थिति भी देखेगी। यह टीम यदि व्यवस्था से संतुष्ट होगी तो दूसरी टीम आकर प्लांट की स्थापना पर काम शुरू करेगी।
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गोरखपुर में गीले कूड़े से बायो सीएनजी बनाने की संभावना देखते मध्यप्रदेश के इंदौर में प्लांट लगाने वाली महाराष्ट्र की कंपनी इंडो एनवायरो इंटीग्रेटेड सॉल्यूशन लिमिटेड की टीम गोरखपुर पहुंची। टीम ने नगर आयुक्त अविनाश सिंह से मुलाकात कर गीले कचरे से बायो सीएनजी व खाद बनाने संबंधी पूरी जानकारी देने के बाद नगर निगम के अधिकारियों के साथ सुथनी में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए आवंटित जमीन का निरीक्षण किया। कंपनी ने जमीन को प्लांट लगाने के लिए अनुकूल पाया है।
बुधवार को गोरखपुर पहुंचने के बाद टीम के सदस्यों को नगर आयुक्त ने अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्र, मुख्य अभियंता संजय चौहान और सहायक नगर आयुक्त डॉ. मणिभूषण तिवारी के साथ सहजनवां के सुथनी में चिह्नित जमीन देखने के लिए भेजा। बायो सीएनजी प्लांट 15 एकड़ से कम जमीन पर लग जाएगा। बाकी बची जमीन पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट भी लगाया जा सकेगा।
टीम के सदस्य नेताजी सुभाष चंद्र बोस नगर में बने मैटेरियल रिकवरी फेसेलिटी सेंटर पहुंचे। यहां गीला कचरा इकट्ठा कर रखा गया था। सदस्यों ने गीला कूड़ा का नमूना लिया। सहायक नगर आयुक्त डॉ. मणि भूषण तिवारी ने बताया कि गीला कचरा में कोई भी ठोस पदार्थ नहीं होना चाहिए।
नगर आयुक्त ने बताया कि इंदौर की टीम ने ट्रांसफर स्टेशन के लिए भी जमीन देखी। लालडिग्गी समेत कई जमीन दिखाई गई है। ट्रांसफर स्टेशन पर गीले कचरे को कैप्सूलनुमा टैंकरों में भरा जाएगा और यहां से इसे प्लांट पर भेज दिया जाएगा। कचरा से बायो सीएनजी बनाने में ट्रांसफर स्टेशन महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं।
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने कहा कि इंदौर से आई टीम महानगर में पांच सितंबर तक रुक कर गीला कचरा मिलने की समीक्षा करेगी। घर-घर जाकर भी गीला से सूखा कचरा अलग-अलग करने की स्थिति भी देखेगी। यह टीम यदि व्यवस्था से संतुष्ट होगी तो दूसरी टीम आकर प्लांट की स्थापना पर काम शुरू करेगी।
नगर निगम को उपलब्ध कराना होगा सिर्फ गीला कूड़ा
कूड़े से सीएनजी बनाने के लिए पूरी तरह से गीले कूड़े की आवश्यकता होती है। अगर गीले कूड़े के साथ थोड़ा सा भी सूखा कूड़ा रह जाएगा तो इस प्लांट के लिए लगी मशीनों के खराब होने की आशंका रहती है। इस वजह से नगर निगम को हर हाल में सिर्फ गीला कूड़ा ही उपलब्ध कराना होगा।
देनी होगी सिर्फ जमीन, कंपनी करेगी निवेश
इस प्लांट को लगाने के लिए नगर निगम को कुछ निवेश नहीं करना होगा, सिर्फ जमीन उपलब्ध करानी होगी। सामान्य तौर पर इस प्लांट को लगाने में करीब 150 करोड़ रुपये का निवेश करना पड़ता है। इसके बाद कंपनी गीले कूड़े से सालाना करोड़ों रुपये कमाती है। इंदौर में प्लांट लगाने वाली कंपनी इस प्लांट से सालाना करीब 25 करोड़ रुपये की कमाई कर रही है। साथ ही इंदौर नगर निगम को रॉयल्टी के रूप में ढाई करोड़ रुपये दे रही है।
इसी सीएनजी से चलती हैं नगर निगम इंदौर की गाड़ियां
प्रोजेक्ट के अनुसार कंपनी द्वारा बनाई जाने वाली इसी सीएनजी से नगर निगम इंदौर की गाड़ियां चलती हैं। कंपनी 50 प्रतिशत सीएनजी नगर निगम को उपलब्ध कराती है। बाकी व्यावसायिक इस्तेमाल के तौर पर इंडस्ट्री और कामर्शियल वेंडरों को देती है। साथ ही जो लिक्विड खाद तैयार की जाती है उसे रासायनिक खाद कंपनियों के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराया जाता है।