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Gorakhpur News: शिक्षकों को मानदेय का इंतजार, अब नौकरी छोड़ने को मजबूर
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- मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत मदरसों में हुई थी आधुनिक शिक्षकों की तैनाती
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। वर्ष 2017 से मानदेय नहीं दिए जाने के कारण मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक नौकरी छोड़ने को मजबूर हैं। केंद्र पुरोनिधानित मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत प्रदेश के मदरसों मेें विज्ञान, गणित, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान पढ़ाने वाले शिक्षकों को मानदेय का बड़ा हिस्सा नहीं मिल रहा है।
फिलहाल प्रदेश सरकार अपना अंशदान दे रही है, लेकिन केंद्र के अंशदान न मिलने से आर्थिक दिक्कतों से जूझ रहे शिक्षक अब नौकरी छोड़ने को मजबूर हैं। कई बार धरना-प्रदर्शन के बावजूद इनकी बात किसी ने नहीं सुनी।
ताजा मामला मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार का है। जहां के मोहम्मद आजम ने करीब 28 साल बतौर मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक के तौर पर काम किया और पिछले महीने मजबूर होकर त्यागपत्र दे दिया। इन्हें वर्ष 2017 से केंद्र सरकार द्वारा दिया जाने वाला मानदेय नहीं मिला।
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मोहम्मद आजम ने बताया कि जिले में करीब 163 मदरसे आधुनिकीकरण योजना से जुड़े हैं। इनमें 489 शिक्षक आधुनिक विषयों की शिक्षा दे रहे है। प्रत्येक मदरसे में तीन शिक्षकों को केंद्र सरकार की तरफ से मानदेय मिलता है।
प्रशिक्षित शिक्षकों को केंद्रांश के तौर पर 12 हजार व राज्यांश के तौर पर तीन हजार रुपये मिलते हैं। शिक्षक नवेद आलम, सैयद महताब अनवर, आसिफ महमूद आदि ने बताया कि वर्ष 2017 से केंद्रांश के तौर पर मिलने वाली 12 हजार की धनराशि नहीं मिल रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। वर्ष 2017 से मानदेय नहीं दिए जाने के कारण मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक नौकरी छोड़ने को मजबूर हैं। केंद्र पुरोनिधानित मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत प्रदेश के मदरसों मेें विज्ञान, गणित, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान पढ़ाने वाले शिक्षकों को मानदेय का बड़ा हिस्सा नहीं मिल रहा है।
फिलहाल प्रदेश सरकार अपना अंशदान दे रही है, लेकिन केंद्र के अंशदान न मिलने से आर्थिक दिक्कतों से जूझ रहे शिक्षक अब नौकरी छोड़ने को मजबूर हैं। कई बार धरना-प्रदर्शन के बावजूद इनकी बात किसी ने नहीं सुनी।
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ताजा मामला मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार का है। जहां के मोहम्मद आजम ने करीब 28 साल बतौर मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक के तौर पर काम किया और पिछले महीने मजबूर होकर त्यागपत्र दे दिया। इन्हें वर्ष 2017 से केंद्र सरकार द्वारा दिया जाने वाला मानदेय नहीं मिला।
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मोहम्मद आजम ने बताया कि जिले में करीब 163 मदरसे आधुनिकीकरण योजना से जुड़े हैं। इनमें 489 शिक्षक आधुनिक विषयों की शिक्षा दे रहे है। प्रत्येक मदरसे में तीन शिक्षकों को केंद्र सरकार की तरफ से मानदेय मिलता है।
प्रशिक्षित शिक्षकों को केंद्रांश के तौर पर 12 हजार व राज्यांश के तौर पर तीन हजार रुपये मिलते हैं। शिक्षक नवेद आलम, सैयद महताब अनवर, आसिफ महमूद आदि ने बताया कि वर्ष 2017 से केंद्रांश के तौर पर मिलने वाली 12 हजार की धनराशि नहीं मिल रही है।