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शिक्षक एमएलसी चुनाव: देवेंद्र प्रताप सिंह की बगावत; भाजपा पर निगाहें
Sat, 24 Oct 2026 11:04 PM IST
अनुराग रंजन
अमर उजाला डिजिटल, गोरखपुर
अमर उजाला डिजिटल, गोरखपुर
Published by: अनुराग रंजन
Updated Sat, 24 Oct 2026 11:04 PM IST
सार
देवेंद्र प्रताप सिंह ने तीन नवंबर 2015 को समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। उस समय वह सपा के विधान परिषद सदस्य थे। भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी की मौजूदगी में उन्होंने अपने समर्थकों के साथ पार्टी में प्रवेश किया था।
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भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह की खुली बगावत
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
गोरखपुर की राजनीति में शिक्षक विधान परिषद चुनाव ने भाजपा के भीतर की नाराजगी को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। भाजपा के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) देवेंद्र प्रताप सिंह ने ना केवल पार्टी के चुनावी प्रबंधन पर सवाल उठाए और अपने पत्र के जरिए अन्याय व अपमान के खिलाफ जनादेश की अपील की, बल्कि वे मतदान के दौरान सपा प्रत्याशी के साथ सार्वजनिक रूप से दिखे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कभी समाजवादी पार्टी में रहे देवेंद्र प्रताप सिंह भाजपा में कब आए, इस चुनाव से पहले उन्होंने किस तरह अपनी नाराजगी को राजनीतिक संदेश में बदला। अब सबकी निगाहें इसपर है कि भाजपा देवेंद्र की खुली बगावत को किस तरह लेती है?
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कौन हैं देवेंद्र प्रताप सिंह?
देवेंद्र प्रताप सिंह गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी है। उनका राजनीतिक आधार गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़ा है। वे समाजवादी पार्टी में रहते हुए भी सत्ता और संगठन के खिलाफ आवाज उठाते रहे। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।
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भाजपा से कब जुड़े?
देवेंद्र प्रताप सिंह ने तीन नवंबर 2015 को समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। उस समय वह सपा के विधान परिषद सदस्य थे। भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी की मौजूदगी में उन्होंने अपने समर्थकों के साथ पार्टी में प्रवेश किया था। उनके पाला बदलने के पीछे मुख्य वजह तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार के कामकाज और सरकारी भर्तियों में अनियमितताओं को लेकर उनकी नाराजगी थी।
भर्ती में भ्रष्टाचार का लगाया था आरोप
देवेंद्र प्रताप सिंह ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग समेत विभिन्न सरकारी भर्ती संस्थाओं की चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भर्ती प्रक्रियाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग की थी। उनका आरोप था कि भर्ती में गड़बड़ियों से मेधावी अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने तत्कालीन सरकार पर युवाओं की समस्याओं के प्रति असंवेदनशील होने का भी आरोप लगाया था।
इन्हीं विवादों और सरकार के प्रति उनकी आलोचना के बीच उन्होंने भाजपा का रुख किया। भाजपा में शामिल होते समय उन्होंने अखिलेश यादव सरकार पर भ्रष्टाचार और युवाओं के हितों की अनदेखी के आरोप लगाए थे। इस तरह उनका सपा छोड़ना भी एक राजनीतिक संदेश था, तब उन्होंने सरकारी भर्ती और शासन के मुद्दे पर अपनी ही पार्टी को घेरा था, जबकि अब भाजपा में रहते हुए पार्टी के चुनावी व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं।
इन्हीं विवादों और सरकार के प्रति उनकी आलोचना के बीच उन्होंने भाजपा का रुख किया। भाजपा में शामिल होते समय उन्होंने अखिलेश यादव सरकार पर भ्रष्टाचार और युवाओं के हितों की अनदेखी के आरोप लगाए थे। इस तरह उनका सपा छोड़ना भी एक राजनीतिक संदेश था, तब उन्होंने सरकारी भर्ती और शासन के मुद्दे पर अपनी ही पार्टी को घेरा था, जबकि अब भाजपा में रहते हुए पार्टी के चुनावी व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं।
इस बार नाराजगी की वजह क्या बनी?
मौजूदा विवाद की प्रमुख कड़ी 12 अक्तूबर 2026 को गोरखपुर में आयोजित भाजपा के शिक्षक सम्मेलन को माना जा रहा है। यह कार्यक्रम भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी के समर्थन में आयोजित हुआ था। मंच पर जगह को लेकर देवेंद्र प्रताप सिंह और भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय के बीच विवाद हुआ। इसके बाद उन्होंने अपनी नाराजगी साझा की।
23 अक्तूबर को मतदान के दिन वे सपा प्रत्याशी संजयन त्रिपाठी के साथ उनके पंडाल में बैठे नजर आए। गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर स्थित मतदान केंद्र पर उन्होंने ना सिर्फ सपा समर्थकों का हौसला बढ़ाया, बल्कि चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक पर भी सवाल उठाए।
23 अक्तूबर को मतदान के दिन वे सपा प्रत्याशी संजयन त्रिपाठी के साथ उनके पंडाल में बैठे नजर आए। गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर स्थित मतदान केंद्र पर उन्होंने ना सिर्फ सपा समर्थकों का हौसला बढ़ाया, बल्कि चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक पर भी सवाल उठाए।
शिक्षक एमएलसी चुनाव से ठीक पहले देवेंद्र प्रताप सिंह की बगावती तेवर पर अब भाजपा क्या रुख अपनाती है, इसपर निगाहें हैं। वे लगातार भाजपा और सरकार पर निशाना साध रहे हैं और हमला कर रहे हैं।