स्वाइन फ्लू के संदिग्ध को बिना जांच मेडिकल कॉलेज से लौटाया, खांसी-जुकाम होने के बाद किया गया था रेफर
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स्वाइन फ्लू से मौत का शिकार हुए श्रवण जायसवाल की तीमारदारी में लगे विजय शाही को खांसी-जुकाम होने पर संदिग्ध घोषित कर सीएचसी से बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज में चार घंटे तक इधर-उधर टहलाने के बाद बिना जांच कराए ही उन्हें लौटा दिया गया। देर शाम उन्होंने बेतियाहाता स्थित एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर में जांच कराई। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
स्वाइन फ्लू से पीड़ित बड़हलगंज निवासी श्रवण कुमार की बीते शनिवार की रात लखनऊ स्थित निजी अस्पताल में मौत हो गई थी। श्रवण जायसवाल करीब दस दिन पहले जब बीमार हुए थे तो कल्याणपुर निवासी उनके दोस्त विजय शाही इलाज दिलाने में उनका सहयोग कर रहे थे। यहां तक कि लखनऊ में भी उनके साथ थे और शनिवार को अंतिम संस्कार में भी वह आगे-आगे थे। रविवार को उन्हें सर्दी जुकाम की शिकायत हुई तो परिजनों ने स्वाइन फ्लू के संक्रमण की आशंका जताई।
सोमवार को वह सीएचसी बड़हलगंज पहुंचे। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. बीके राय ने जांच के बाद उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया और सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी को भी इसकी सूचना दे दी। विजय शाही का आरोप है कि मेडिकल कालेज में उन्हें मेडिसिन की ओपीडी में नहीं देखा गया। एसआईसी प्रो. जीसी श्रीवास्तव से मिले तो उन्होंने 14 नंबर इमरजेंसी भेज दिया। इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों ने जांच करने से इनकार कर दिया।
अधिकारियों ने क्या कहा
पूछने पर बताया गया कि जब तक उन्हें भर्ती नहीं किया जाएगा कोई जांच नहीं की जाएगी। इसके बाद वह फिर एसआईसी से मिले, उन्हें फिर मेडिसिन वार्ड की इमरजेंसी भेजा गया और वहां से वही जवाब मिला। करीब चार घंटा इधर-उधर भटकने के बाद बिना जांच कराए ही वह मेडिकल कॉलेज से बाहर निकल आए। विजय कुमार शाही ने बताया कि उन्होंने बेतियाहाता स्थित एक निजी अस्पताल में जांच कराई।
गोरखपुर सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने कहा कि श्रवण कुमार के परिजनों और बीमारी के दौरान उनके साथ रहने वाले लोगों को टेमीफ्लू दवा खिलाई जा रही है। विजय शाही भी उनमें से एक हैं। सर्दी जुकाम की शिकायत होने पर उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज भेजा गया था। स्वाइन फ्लू के लक्षण नहीं मिलने पर उन्हें कोई समस्या होने पर तुरंत मेडिकल कॉलेज आने की सलाह देकर भेज दिया गया। सीएचसी की टीम उनकी निगरानी करेगी।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रधान चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. जीसी श्रीवास्तव ने कहा कि विजय शाही ओपीडी बंद होने के एक घंटे के बाद मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। मैं खुद उन्हें अपने साथ लेकर विशेषज्ञ चिकित्सक के पास गया और उनकी जांच कराई थी। स्वाइन फ्लू के लक्षण कई स्टेज में सामने आते हैं, जांच में उनमें स्वाइन फ्लू के खास लक्षण नहीं दिखे, इसीलिए उन्हें एडमिट नहीं किया गया। तबीयत खराब होने पर तुरंत मेडिकल कॉलेज आने की सलाह देकर उन्हें घर भेज दिया गया।
मेडिकल कॉलेज में छह बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार
जिले में स्वाइन फ्लू के दस्तक देते ही बीआरडी मेडिकल कॉलेज में संक्रमित मरीजोें को अलग रखने के लिए आईसोलेशन वार्ड बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गिरीश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि वार्ड नंबर छह के पड़ोस में स्थित कमरे को आईसोलेशन वार्ड के रूप में विकसित किया गया है। आइसोलेशन वार्ड में छह बेड सहित अन्य जरूरी उपकरण लगा दिए गए हैं मंगलवार से यह मरीजों को भर्ती करने के लिए तैयार रहेगा।