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Gorakhpur News: स्वस्थ नहीं बीमार बना देगा गन्ने का रस
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फोटो
- बेमौसम बिक रहा गन्ने का रस संक्रामक बीमारियों का बन सकता है कारण
- रस निकालने में सफाई का नहीं रखते ख्याल, स्वास्थ्य विभाग भी बता चुका है खतरनाक
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। गर्मी बढ़ने के साथ ही गन्ने का रस पीने वालों की संख्या भी बढ़ गई है। शहर के हर चौराहे-बाजार में गन्ने का रस बेचने वाला ठेला दिखाई दे जाएगा। रेलवे स्टेशन के सामने तो पांच-छह ठेले वाले सुबह से देर शाम तक दुकान सजाए रखते हैं, लेकिन बेमौसम बिक रहा यह गन्ने का रस सेहत बनाने की बजाय बिगाड़ रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन दिनों गन्ने का रस, सड़क के किनारे बिकने वाली शिकंजी आदि से परहेज करें। वरना इनकी वजह से डायरिया का संक्रमण हो सकता है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि गन्ने का रस उसके सीजन में ही स्वास्थ्य के लिए ठीक होता है, वह भी बिना कुछ उसमें अतिरिक्त मिलाए हुए पिया जाए। बाजार में ठेले पर जो गन्ने का रस बेचते हैं, उनके पास पड़ा गन्ना पुराना होता है, जिसे वे पानी से भिगोकर रसदार बनाए रखते हैं।
कोल्ड स्टोर से लाया गन्ना धूप में पकता है, और पानी डालकर नम किया जाता है, जिससे उसका रस खराब हो चुका होता है। उसकी पेराई के दौरान नींबू व अन्य सामग्री मिलाई जाती है। वहां हमेशा मिक्खयां रहती हैं, जिसकी वजह से पीने पर डायरिया का खतरा रहता है।
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खुले में बिकने वाले इस तरह के रस, फलों का जूस आदि अगर साफ सुथरी जगह से नहीं लिया गया है, तो उससे पेट में संक्रमण फैलता है। इसका असर लिवर पर भी पड़ता है।
-डॉ. आशुतोष द्विवेदी, सीएमओ
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- बेमौसम बिक रहा गन्ने का रस संक्रामक बीमारियों का बन सकता है कारण
- रस निकालने में सफाई का नहीं रखते ख्याल, स्वास्थ्य विभाग भी बता चुका है खतरनाक
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। गर्मी बढ़ने के साथ ही गन्ने का रस पीने वालों की संख्या भी बढ़ गई है। शहर के हर चौराहे-बाजार में गन्ने का रस बेचने वाला ठेला दिखाई दे जाएगा। रेलवे स्टेशन के सामने तो पांच-छह ठेले वाले सुबह से देर शाम तक दुकान सजाए रखते हैं, लेकिन बेमौसम बिक रहा यह गन्ने का रस सेहत बनाने की बजाय बिगाड़ रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन दिनों गन्ने का रस, सड़क के किनारे बिकने वाली शिकंजी आदि से परहेज करें। वरना इनकी वजह से डायरिया का संक्रमण हो सकता है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि गन्ने का रस उसके सीजन में ही स्वास्थ्य के लिए ठीक होता है, वह भी बिना कुछ उसमें अतिरिक्त मिलाए हुए पिया जाए। बाजार में ठेले पर जो गन्ने का रस बेचते हैं, उनके पास पड़ा गन्ना पुराना होता है, जिसे वे पानी से भिगोकर रसदार बनाए रखते हैं।
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कोल्ड स्टोर से लाया गन्ना धूप में पकता है, और पानी डालकर नम किया जाता है, जिससे उसका रस खराब हो चुका होता है। उसकी पेराई के दौरान नींबू व अन्य सामग्री मिलाई जाती है। वहां हमेशा मिक्खयां रहती हैं, जिसकी वजह से पीने पर डायरिया का खतरा रहता है।
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खुले में बिकने वाले इस तरह के रस, फलों का जूस आदि अगर साफ सुथरी जगह से नहीं लिया गया है, तो उससे पेट में संक्रमण फैलता है। इसका असर लिवर पर भी पड़ता है।
-डॉ. आशुतोष द्विवेदी, सीएमओ