आईटीआई: छात्रों के दबदबे वाले ट्रेड भी बने बेटियों की पहली पसंद, रोजगार की दिशा में भी मिल रही तवज्जो
मोटर मैकेनिक, ट्रैक्टर मैकेनिक, फीटर, टर्नर, वेल्डर ट्रेड में छात्राओं की संख्या बढ़ी। प्रशिक्षण हासिल कर रोजगार की दिशा में भी मिल रही तवज्जो।
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केंद्र सरकार की ओर से युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई कौशल विकास योजना (स्किल डेवलपमेंट) का असर तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नजर आने लगा है। यही, वजह है कि जिन ट्रेड में शारीरिक रूप से मजबूत माने जाने वाले छात्रों का दबदबा था, उनमें अब बेटियों की सहभागिता भी बढ़ी है। बेटियां भी अब मोटर मैकेनिक, ट्रैक्टर मैकेनिक, फीटर, टर्नर, वेल्डर, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रानिक्स ट्रेड में प्रशिक्षण हासिल करने आगे आ रही हैं।
आईटीआई चरगांवा में पिछले पांच वर्षों में प्रवेशित छात्राओं की संख्या पर गौर कर करें तो हर गुजरते साल के साथ छात्राओं का रुझान इन ट्रेड में बढ़ा है। प्रशिक्षण हासिल कर छात्राएं नौकरी भी कर रही हैं। प्राचार्य सत्यकांत ने बताया कि कुछ अलग करने का जुनून और रोजगार के अच्छे विकल्पों की वजह से इधर छात्राओं का झुकाव इन ट्रेड में बढ़ा है। उन्हें प्रशिक्षण देने में भी कोई परेशानी नहीं होती है वो पूरी मेहनत से काम को सीख रहीं हैं। वर्तमान में संस्थान में संचालित सभी ट्रेड में प्रवेशित विद्यार्थियों की संख्या 1500 है इनमें, 450 से अधिक छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
आईटीआई चरगांवा के टर्नर द्वितीय वर्ष का प्रशिक्षण हासिल करने वाली गीता यादव और जानकी यादव ने बताया कि रोजगार का अच्छा विकल्प इस ट्रेड में हैं। आकांक्षा, रेखा और गीता ने कहा कि रेलवे में नौकरी का सपना है। इसलिए टर्नर ट्रेड को चुना। सलोनी और गरिमा ने कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति से हर चुनौती का सामना किया जा सकता है। कुछ नया करने के जुनून से ट्रेड में प्रवेश लिया है। इसमें ही अपना भविष्य बनाना है।
20 फीसदी मिलता प्रवेश में आरक्षण
राजकीय औद्योगिक संस्थानों में संचालित विभिन्न ट्रेड में प्रवेश के लिए छात्राओं को 20 फीसदी आरक्षण दिया जाता है। शुरुआत में इलेक्ट्रिशियन, वेल्डर, मशीनिष्ट, मैकेनिक सरीखे ट्रेड में ढूंढे छात्राएं नहीं मिलती थीं। मगर पिछले पांच सालों में लड़कियों की संख्या बढ़ी है। अब प्रवेश के लिए जबरदस्त मारामारी होती है।
बुलंद इरादों से प्रशिक्षण हासिल कर रहीं बेटियां
टर्नर ट्रेड का प्रशिक्षण देने वाले शिक्षक राजकरण सिंह ने बताया कि ये प्रशिक्षण मशीनों पर दिया जाता है। शारीरिक श्रम इसमें ज्यादा लगता है। मगर, छात्राएं छात्रों से कंधे से कंधा मिलाकर प्रशिक्षण हासिल कर रहीं हैं। रेलवे, सिंचाई विभाग, डीआरडीओ से लेकर भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर में भी इस ट्रेड के विद्यार्थियों की डिमांड रहती है।