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UP: 18 साल से कम उम्र के छात्र स्कूलों में नहीं ले जा सकेंगे वाहन, अब शिक्षा विभाग हुआ सख्त; दिए ये निर्देश
Sun, 07 Jan 2024 01:30 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 07 Jan 2024 01:30 PM IST
सार
गोरखपुर में अब 18 साल से कम उम्र के छात्र स्कूलों में वाहन नहीं ले जा सकेंगे। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने विद्यालयों को वाहन लाने से बच्चों को रोकने के निर्देश दिए हैं। बच्चों को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों की जानकारी दी जाएगी।
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फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
स्कूल में वाहन लेकर जाने वाले 18 वर्ष से कम उम्र के विद्यार्थियों पर अब शिक्षा विभाग ने भी सख्ती शुरू कर दी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों की सुरक्षा की दृष्टि से विद्यालयों को निर्देश दिया है कि 18 वर्ष से कम उम्र के विद्यार्थी जो बाइक, स्कूटी या कार लेकर विद्यालय आते हैं, उनपर तत्काल रोक लगाई जाए।
मोटर वाहन एक्ट के अंतर्गत नाबालिग के वाहन से अगर किसी तरह की दुर्घटना होती है तो अभिभावकों को तीन साल की जेल हो सकती है। साथ ही उनपर 25 हजार रुपये के जुर्माना का प्रावधान किया गया है। इतने सख्त नियम के बाद भी बड़ी संख्या में अभिभावक अपने नाबालिग बच्चों को बाइक और स्कूटी से स्कूल भेजते हैं।
परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग की सख्ती के बाद विद्यार्थी परेशान हैं कि अब उन्हें स्कूल जाने में मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा, वहीं विद्यार्थियों की सुरक्षा की दृष्टि से ज्यादातर अभिभावक इस सख्ती से खुश हैं।
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उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्ती बहुत जरूरी है। पहले भी स्कूलों में बच्चे पढ़ते थे और वह साइकिल से स्कूल जाते थे। वह वह भी अपने बच्चों को साइकिल से स्कूल भेजेंगे।
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मोटर वाहन एक्ट के अंतर्गत नाबालिग के वाहन से अगर किसी तरह की दुर्घटना होती है तो अभिभावकों को तीन साल की जेल हो सकती है। साथ ही उनपर 25 हजार रुपये के जुर्माना का प्रावधान किया गया है। इतने सख्त नियम के बाद भी बड़ी संख्या में अभिभावक अपने नाबालिग बच्चों को बाइक और स्कूटी से स्कूल भेजते हैं।
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परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग की सख्ती के बाद विद्यार्थी परेशान हैं कि अब उन्हें स्कूल जाने में मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा, वहीं विद्यार्थियों की सुरक्षा की दृष्टि से ज्यादातर अभिभावक इस सख्ती से खुश हैं।
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उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्ती बहुत जरूरी है। पहले भी स्कूलों में बच्चे पढ़ते थे और वह साइकिल से स्कूल जाते थे। वह वह भी अपने बच्चों को साइकिल से स्कूल भेजेंगे।
स्कूलों में होगा रोड सेफ्टी क्लब का गठन
नाबालिगों के बाइक व स्कूटी चलाने पर रोक लगाते हुए उन्हें मार्ग दुर्घटनाओं से बचाने के लिए स्कूलों में रोड सेफ्टी क्लब के गठन किया जाएगा। स्कूलों की हर कक्षा में एक छात्र को रोड सेफ्टी कैप्टन बनाया जाएगा। कैप्टन की ओर से विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा विषय पर हर सप्ताह जानकारी दी जाएगी।
दीदी की स्कूटी से स्कूल जाता था। लेकिन, स्कूल प्रशासन ने स्कूटी लाने से मना कर दिया है। मेरी उम्र 17 वर्ष है स्कूटी अच्छे से चला लेता हूं। अब साइकिल से स्कूल जाऊंगा। -अक्षत, छात्र
दो वर्ष पूर्व 10 पास करने के बाद पापा ने स्कूटी दिलाई थी। पहले ऑटो से स्कूल जाती थी। पापा ने स्कूटी से स्कूल जाने के मना कर दिया है, अब ऑटो से स्कूल जाऊंगी। -शीतल, छात्रा
बेटी 11वीं में पढ़ती है, उसकी जिद पर दो महीने पहले ई-स्कूटी खरीदी हूं। स्कूल खुलने पर बेटी को साइकिल से ही स्कूल भेजूंगी, क्योंकि बच्चों के लिए साइकिल ज्यादा सुरक्षित है। - अनिता, अभिभावक
बेटा 12वीं में पढ़ता है। बेटा कभी-कभी पापा की बाइक लेकर स्कूल चला जाता है। अब नियम सख्त हो गए हैं, अब उसे बाइक से स्कूल नहीं जाने दूंगी। साइकिल से स्कूल भेजूंगी। -अलका, अभिभावक
18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे बाइक नहीं चला सकते हैं। अगर वह सड़क पर बाइक या स्कूटी चलाते मिले तो उनके अभिभावकों के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। -संजय कुमार झा, संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन