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Exclusive: यहां बच्चे ही नहीं मम्मी-पापा की भी चल रही है 'परीक्षा', स्कूल आकर करना पड़ रहा है ये काम

Wed, 16 Dec 2020 01:08 PM IST
vivek shukla विवेक सिंह, गोरखपुर।
विवेक सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 16 Dec 2020 01:08 PM IST
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student parents question paper transfer to home and school for examination due to covid condition in Kendriya Vidyalaya
गोरखपुर केंद्रीय विद्यालय। - फोटो : अमर उजाला।
कोरोना संकटकाल में केंद्रीय विद्यालय नंबर-एक एयरफोर्स ने ऐसे विद्यार्थियों के लिए एक पहल की है जो कोरोना संक्रमण के डर से स्कूल आकर प्री बोर्ड की परीक्षा नहीं देना चाहते हैं। दसवीं और बारहवीं के ऐसे विद्यार्थियों को प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका घर ले जाने की अनुमति दी गई है। ऐसे में कि परिक्षार्थियों के मां बाप के धैर्य की परीक्षा हो रही है। विद्यार्थी के माता-पिता या कोई अभिभावक परीक्षा आरंभ होने से आधा घंटे पहले स्कूल पहुंचता है और परीक्षा सामग्री लेकर घर जाता है। तीन घंटे बाद स्कूल में लाकर जमा करा देता है।
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कोरोना संकटकाल के बीच दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों की प्री बोर्ड परीक्षाओं का आगाज सोमवार से हो गया है। पहले दिन बारहवीं की कक्षा की परीक्षा के लिए करीब 11 अभिभावक, प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका स्कूल में हस्ताक्षर कराकर घर ले गए और तीन घंटे बाद दोबारा स्कूल आकर जमा करा दिए। यदि कोई तीन घंटे बाद उत्तर पुस्तिका को नहीं जमा कराएगा तो उस छात्र या छात्रा को अनुपस्थित मान लिया जाएगा।
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12 बच्चों को क्लास में बैठाया

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गोरखपुर केंद्रीय विद्यालय - फोटो : अमर उजाला।
बता दें कि कोरोना संकट के बीच अक्तूबर से केंद्रीय विद्यालय में अभिभावकों की रजामंदी से नौवीं से बारहवीं के विद्यार्थियों को 50 फीसदी उपस्थित के साथ स्कूल बुलाया जा रहा है। मगर विद्यालय आकर कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या फिलहाल कम है। कोरोना संक्रमण के डर से कई अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। वह ऑनलान पढ़ाई को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में जब सीबीएसई बोर्ड ने दसवीं और बारहवीं की प्री बोर्ड परीक्षा का कार्यक्रम जारी किया तो स्कूल प्रबंधन चिंतित हो गया। उसके सामने समस्या यह थी कि जो बच्चे स्कूल नहीं आना चाहते हैं उनकी परीक्षा कैसे ली जाए। ऐसे में यह रास्ता निकाला गया है।  

केंद्रीय विद्यालय की ओर से कोविड प्रोटोकॉल के शत प्रतिशत पालन के लिए हर बच्चे की थर्मल स्कैनिंग की गई। साथ ही मास्क और सैनिटाइजर अनिवार्य किया गया था। हर कमरे के बाहर सैनिटाइजर स्टैंड लगाया गया था, ताकि विद्यार्थी समय समय पर खुद को सैनिटाइज कर सकें। सोशल डिस्टेंसिंग के लिहाज से एक कमरे में 12 बच्चों को ही बैठाया गया।

एक दिसंबर से चल रहा प्रैक्टिकल

स्कूल प्रबंधन की ओर से बारहवीं के विद्यार्थियों को अभिभावकों की सहमति से 20-20 के ग्रुप में एक दिसंबर से स्कूल बुलाकर प्रैक्टिकल की तैयारी कराई जा रही है। रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी स्कूल आकर लैब में प्रैक्टिकल कर रहे हैं। पूर्व में विद्यार्थियों को लैब के माध्यम से ऑनलाइन प्रैक्टिकल कराया गया है।

केंद्रीय विद्यालय नंबर-एक के प्रधानाचार्य एसके श्रीवास्तव ने बताया कि कोविड-19 के दौर में बच्चों की सुरक्षा अभिभावकों के साथ स्कूल प्रबंधन की पहली प्राथमिकता है। प्री-बोर्ड परीक्षाओं का कार्यक्रम जारी होने के बाद से कुछ अभिभावकों की ओर से इसे आगे बढ़ाए जाने की मांग की जा रही थी। उनका कहना है बच्चों का स्कूल आना सुरक्षित नहीं है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन अभिभावकों के माध्यम से प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाएं घर भिजवा रहा है।
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