फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Struggle story of hard working woman Geetrani open shop and gave jobs to others After husband unemployment

जज्बा: बेरोजगारी ने दिखाई आत्मनिर्भरता की राह, पहले परिवार का बनीं सहारा, फिर दूसरों के लिए खोली आजीविका की राह

Sat, 26 Jun 2021 05:06 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 26 Jun 2021 05:06 PM IST
सार

रानापार की गीतारानी के पति की नौकरी छूटने से परिवार पर आया था संकट। चंदा महिला स्वयं सहायता समूह से कर्ज लेकर खोली फर्नीचर की दुकान, दो लोगों को दी नौकरी।

विज्ञापन
Struggle story of hard working woman Geetrani open shop and gave jobs to others After husband unemployment
लोन से गीतारानी ने खोली फर्नीचर की दुकान। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

लॉकडाउन में नौकरी छूटने के कारण भुखमरी की कगार पर पहुंचे गोरखपुर जिले के रानापार गांव की गीतारानी के परिवार को चंदा महिला स्वयं सहायता समूह ने संभाला। समूह से जुड़कर गीतारानी ने फर्नीचर की दुकान खोली। वर्तमान में वह क्षेत्र की प्रतिष्ठित फर्नीचर की दुकान की मालिक हैं और दो लोगों को नौकरी देकर उनके परिवार चलाने में मददगार साबित हो रही हैं।
विज्ञापन

  
विकास खंड ब्रह्मपुर के रानापार गांव निवासी गीतारानी के पति दिनेश यादव महाराष्ट्र में फर्नीचर की दुकान पर काम करते थे। कोरोना की पहली लहर में नौकरी चली गई। इससे परिवार पर भरण पोषण का संकट खड़ा हो गया। गांव के चंदा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं गीतारानी ने साथी सदस्यों को अपनी समस्या बताई।
विज्ञापन


इस दौरान उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के ब्लॉक प्रबंधक से जानकारी मिली कि बाहर से लौटने वाले मजदूरों को समूह के माध्यम से स्वरोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने अधिकारियों से संपर्क कर इस योजना का लाभ लेने की इच्छा जताई। पति दिनेश को फर्नीचर की दुकान खुलवाने के लिए गीतारानी ने समूह से एक लाख रुपये का ऋण लिया। इस धन से उन्होंने बरही गांव की बाजार में चंदा एसएचजी इंटरप्राइजेज नाम से फर्नीचर की दुकान खोली। इस दुकान से वह न सिर्फ स्थानीय लोगों की जरूरत का फर्नीचर बना रही हैं बल्कि अन्य समूहों के लिए बक्सा, अलमारी, मेज, कुर्सी आदि बनाकर आपूर्ति कर रही हैं।

वह समूह से लिए गए कर्ज की किस्तें भी समय पर चुकाने के साथ साप्ताहिक बचत में भी अपना योगदान दे रही हैं ताकि उनकी जैसी दूसरी महिला साथियों को रोजगार करने के लिए धन उपलब्ध हो सके। गीतारानी की सफलता से समूह की सदस्य और गांव की महिलाओं का भी हौसला बढ़ा है।

कल्याण कार्य भी कर रहीं
गीतारानी की आर्थिक हालत सुधरी तो उन्होंने गांव वालों के कल्याण की भी सोची। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने गांव की अन्य गरीब महिलाओं को निशुल्क मास्क और साबुन भी बांटे। वर्तमान में भी वह गांव की अन्य महिलाओं केे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में सलाह और सहयोग दे रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed