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अजब-गजब: इस सामान की बरामदगी के लिए युवक ने रो-रो कर पुलिस से लगाई थी गुहार, अब उसे लेने से कर रहा इनकार
Thu, 22 Jul 2021 03:29 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 22 Jul 2021 03:29 PM IST
सार
दिसंबर 2016 में हुई थी ये घटना। किसी काम से कचहरी गए युवक की चोरी हो गई थी साइकिल। चार साल से कैंट थाने में बरामदगी के बाद कबाड़ हो गई है साइकिल
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गोरखपुर शहर के कैंट इलाके के दाउदपुर निवासी संतोष यूं तो साइकिल गायब होने के बाद बहुत परेशान था और पुलिस से केस दर्ज कर साइकिल के बरामदगी की गुहार लगा रहा था। करीब चार साल पहले हुई इस घटना में संतोष की बेबसी और उसकी आंखों में आंसू देख पुलिस ने केस भी दर्ज कर लिया और साइकिल भी बरामद कर लिया लेकिन अब वह साइकिल वापस लेकर नहीं जाना चाहता है। इसकी वजह जानकर आपको हैरानी होगी।
दरअसल, जब संतोष ने पता किया कि कोर्ट से इस साइकिल को छुड़ाने में कितना खर्चा आएगा तो उसे मालूम हुआ कि 12 से 1300 रुपये का खर्च आ जाएगा अब उसे लगा कि इतने में तो वह दूसरी साइकिल खरीद लेगा तो फिर इस साइकिल के झंझट में क्यों पड़े। इसी वजह से वह साइकिल नहीं ले गया और अब वह कैंट थाने में कबाड़ हो चुकी है।
जानकारी के मुताबिक, दिसंबर 2016 में कैंट इलाके के दाउदपुर का रहने वाला संतोष किसी काम से कचहरी गया था। वापस लौटा तो उसकी साइकिल गायब हो गई थी। मजदूरी का काम करने वाला संतोष बहुत परेशान हुआ और सीधे थाने पहुंच गया।
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उसने साइकिल चोरी होने की जानकारी देते हुए पुलिस से कहा कि केस दर्ज करने के साथ ही साइकिल बरामद करने की कार्रवाई करिए। वैसे तो नियम यही था पर पुलिस ने नियम से हटकर साइकिल दिलवा देने की बात कही लेकिन संतोष बुरा मान गया और उसके गुहार पर पुलिस ने केस भी दर्ज कर लिया।
पुलिस ने थोड़ी सी मेहनत की तो छह दिन बाद ही साइकिल को बरामद कर लिया और आरोपी को जेल भेज दिया। लेकिन जब संतोष को यह पता चला कि इसे कचहरी से छुड़ाना पड़ेगा और इसके लिए खर्च करने के साथ ही साइकिल की रसीद भी उन्हें देनी होगी तो वह परेशान हो गया।
पुलिस से ऐसे ही साइकिल देने को कहा जो नियमत: दे नहीं सकते थे। इस वजह से उसे कचहरी से जाने को सलाह दिया गया। इसके बाद वह कचहरी गया। वहीं खर्च की बात सुनकर वापस लौट गया। पुलिस को आकर बताया कि मुझे साइकिल नहीं चाहिए।
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दरअसल, जब संतोष ने पता किया कि कोर्ट से इस साइकिल को छुड़ाने में कितना खर्चा आएगा तो उसे मालूम हुआ कि 12 से 1300 रुपये का खर्च आ जाएगा अब उसे लगा कि इतने में तो वह दूसरी साइकिल खरीद लेगा तो फिर इस साइकिल के झंझट में क्यों पड़े। इसी वजह से वह साइकिल नहीं ले गया और अब वह कैंट थाने में कबाड़ हो चुकी है।
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जानकारी के मुताबिक, दिसंबर 2016 में कैंट इलाके के दाउदपुर का रहने वाला संतोष किसी काम से कचहरी गया था। वापस लौटा तो उसकी साइकिल गायब हो गई थी। मजदूरी का काम करने वाला संतोष बहुत परेशान हुआ और सीधे थाने पहुंच गया।
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उसने साइकिल चोरी होने की जानकारी देते हुए पुलिस से कहा कि केस दर्ज करने के साथ ही साइकिल बरामद करने की कार्रवाई करिए। वैसे तो नियम यही था पर पुलिस ने नियम से हटकर साइकिल दिलवा देने की बात कही लेकिन संतोष बुरा मान गया और उसके गुहार पर पुलिस ने केस भी दर्ज कर लिया।
पुलिस ने थोड़ी सी मेहनत की तो छह दिन बाद ही साइकिल को बरामद कर लिया और आरोपी को जेल भेज दिया। लेकिन जब संतोष को यह पता चला कि इसे कचहरी से छुड़ाना पड़ेगा और इसके लिए खर्च करने के साथ ही साइकिल की रसीद भी उन्हें देनी होगी तो वह परेशान हो गया।
पुलिस से ऐसे ही साइकिल देने को कहा जो नियमत: दे नहीं सकते थे। इस वजह से उसे कचहरी से जाने को सलाह दिया गया। इसके बाद वह कचहरी गया। वहीं खर्च की बात सुनकर वापस लौट गया। पुलिस को आकर बताया कि मुझे साइकिल नहीं चाहिए।