एमएमएमयूटी के तीन टॉपरों की कहानी: हालात से हारे नहीं जूझे...तब बढ़े शिखर की ओर
एमएमएमयूटी के मेधावियों न सिर्फ मुफलिसी में पढ़ाई की बल्कि विपरीत परिस्थितियों से जूझकर अपनी श्रेष्ठता साबित कर टॉपर बने और अच्छे पैकेज पर नौकरी भी करने लगे हैं। प्रस्तुत है कुछ ऐसे ही मालवीयंस के संघर्षों की कहानी जो युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
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मेहनत और शिद्दत से अगर कोई भी काम करें तो कामयाबी कदम चूमेगी। इसे चरितार्थ कर दिखाया है कि मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के मेधावियों ने। इन्हाेंने न सिर्फ मुफलिसी में पढ़ाई की बल्कि विपरीत परिस्थितियों से जूझकर अपनी श्रेष्ठता साबित कर टॉपर बने और अच्छे पैकेज पर नौकरी भी करने लगे हैं। प्रस्तुत है कुछ ऐसे ही मालवीयंस के संघर्षों की कहानी जो युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
गुदड़ी के लाल आशीष ने किया कमाल...मिला गोल्ड मेडल और बने वैज्ञानिक
एमएमएमयूटी में एमटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के टॉपर आशीष दूबे ने गोल्ड मेडल हासिल किया है। किसान के बेटे आशीष के पिता किसान हैं। मुफिलिसी के बीच उन्होंने न सिर्फ पढ़ाई की बल्कि अब वैज्ञानिक भी बन गए हैं। उन्हें परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) कोटा में बतौर वैज्ञानिक पद पर नौकरी मिली है। उनकी इस सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है।
मूलत: देवरिया जिले के रुद्रपुर तहसील के परसौना जोगिया बुजुर्ग गांव निवासी ओमप्रकाश दूबे के पुत्र आशीष बचपन से ही पढ़ाई में होनहार हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव से हुई है। सतासी इंटर कॉलेज रुद्रपुर से 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने डिप्लोमा किया। इसके बाद वह एमएमएमयूटी से बीटेक करने चले आए। पिता गांव में खेती कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थित मजबूत नहीं होने पर आशीष ने स्कॉलरशिप के लिए आवेदन किया।
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इसके बाद बीटेक में उनको यूपी स्कॉलरशिप से प्रतिवर्ष 50 हजार रुपये मिले। इसके बाद फीस की शेष बची रकम को भरने के लिए वह कोचिंग पढ़ाने लगे। बीटेक करने के बाद वह एमएमएमयूटी से इलेक्टि्रकल इंजीनियरिंग से एमटेक करने लगे। इस बीच उन्होंने गेट की परीक्षा पास कर ली। इससे उनको प्रतिमाह 12,400 रुपये स्कॉलरशिप मिलने लगी। इस रकम को वह अपनी फीस भरने के साथ ही पढ़ाई में खर्च करने लगे।
पढ़ाई के दौरान ही अगस्त 2022 में परमाणु ऊर्जा विभाग में साइंटिस्ट के लिए आवेदन किया। तीन माह पहले छह जून को उन्होंने ज्वाइन किया। दीक्षांत में गोल्ड मेडल मिलने की जानकारी होने पर वह अवकाश लेकर विश्वविद्यालय पहुंचे थे। बुधवार को गांव माता-पिता से मिलने के बाद वह नौकरी के लिए रवाना हो गए।
टॉपर देवांश की पढ़ाई में मददगार बनी स्कॉलरशिप
एमएमएमयूटी में बीटेक इलेक्ट्रानिक्स से सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले देवांश गुप्ता की पढ़ाई में स्कॉलरशिप मददगार साबित हुई है। पढ़ाई के दौरान ही कैंपस सेलेक्शन से उनका चयन एलएनटी मुंबई में डिजाइन इंजीनियर के पद पर हो गया है।
गोरखपुर शहर के बेतियाहाता निवासी देवांश गुप्ता मध्यम वर्गीय परिवार से हैं। उनके पिता शैलेंद्र गुप्ता की इन्वर्टर-बैट्री की दुकान है। मां मंजू गुप्ता प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका हैं। देवांश पढ़ाई में काफी होनहार हैं। कक्षा 10वीं की पढ़ाई उन्होंने आरपीएम एकेडमी से करते हुए 95 प्रतिशत अंक, जबकि 12वीं की पढ़ाई आत्मदीप विद्यालय से करते हुए 90.20 प्रतिशत अंक प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने मदनमोहन मालवीय इंजीनियरिंग टेस्ट (मेट) दिया।
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प्रवेश परीक्षा में पास होने पर एमएमएमयूटी में उनकाे प्रवेश मिला। एक वर्ष की फीस करीब 82 हजार रुपये जमा करनी परिवार के लिए आसान नहीं थी। उनके चाचा संदीप गुप्ता एडवोकेट ने मदद की और सारा खर्च उठाया। पहले ही साल से देवांश को प्रतिवर्ष 50 हजार रुपये स्कॉलरशिप मिलने लगी। इससे आसानी से उन्होंने बीटेक की पढ़ाई कर न सिर्फ टॉपर बने बल्कि कैंपस सेलेक्शन से एलएनटी में नौकरी पाकर अब परिवार की मदद कर रहे हैं।
पढ़ाई के दौरान नौकरी कर टॉपर बने ऋषिकेश
गोरखपुर शहर के बशारतपुर निवासी रामदुलारे गुप्ता के पुत्र ऋषिकेश पढ़ाई में काफी होनहार हैं। उनके पिता एक छोटे व्यवसायी हैं। बीटेक की पढ़ाई के दौरान ही उनका टोरेंटो गैस कंपनी में सेलेक्शन हो गया। वह बस्ती में 4.50 लाख रुपये के पैकेज पर तैनात हैं। नौकरी का उन्होंने अपनी पढ़ाई पर असर नहीं पड़ने दिया। बीटेक मैकेनिकल में सर्वाधिक अंक प्राप्त कर टॉपर बने। उनकी इस उपलब्धि पर परिवार में हर्ष का माहौल है।