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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   story of Hazrat Salar Masood Ghazi Mians or Bale Mians Dargah in gorakhpur

मुस्लिमों से ज्यादा हिंदूओं की है इस दरगाह में आस्था, जानें कैसे होती है इबादत

Fri, 12 Jun 2020 04:17 PM IST
vivek shukla अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 12 Jun 2020 04:17 PM IST
सार

  • शहर के बहरामपुर में स्थित है बाले मियां का दरगाह
  • हर साल लगता है मेला, बड़ी संख्या में हिंदू होते हैं मेले में शामिल

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story of Hazrat Salar Masood Ghazi Mians or Bale Mians Dargah in gorakhpur
हजरत सालार मसूद गाजी मियां उर्फ बाले मियां का दरगाह। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के बहरामपुर क्षेत्र में स्थित है हजरत सालार मसूद गाजी मियां उर्फ बाले मियां का दरगाह। इस दरगाह में मुस्लिमों से ज्यादा हिंदूओं की आस्था है। यहां लगने वाले वार्षिक मेले में बड़ी संख्या में हिंदू शामिल होकर गंगा जमुनी तहजीब की मिशाल पेश करते हैं। यहां मेले में मुस्लिमों से ज्यादा हिंदूओं की संख्या होती है।

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अदा होती है लग्न की रस्म
हजरत सैयद सालार मसूद गाजी मियां अलैहिर्रहमां जनसामान्य में बाले मियां के नाम से जाने जाते है। बहरामपुर में हर साल जेठ के महीने में मेला लगता है जहां पर आस-पास के क्षेत्रों के अलावा दूर दराज से भारी संख्या में अकीदतमंद आते हैं।
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एक माह तक चलने वाले इस मेले के मुख्य दिन अकीदतमंदों द्वारा पलंग पीढ़ी, कनूरी आदि चढ़ा कर मन्नतें मांगी जाती है। इस मेले को पूर्वांचल की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल माना जाता है। हर साल लग्न की रस्म पलंग पीढ़ी के रूप में मनाई जाती है।

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ये हैं बाले मियां

ऐतिहासिक प्रमाणों के मुताबिक हजरत सैयद सालार मसूद गाजी मियां अलैहिर्रहमां दीन-ए-इस्लाम को चौथे खलीफा हजरत अली रजियल्लाहु अन्हु की बारहवीं पुश्त से है। गाजी मियां के वालिद का नाम गाजी सैयद साहू सालार था। आप सुल्तान महमूद गजनवीं की फौज में कमांडर थे। सुल्तान ने साहू सालार के फौजी कारनामों को देख कर अपनी बहन सितर-ए-मोअल्ला का निकाह आप से कर दिया।

जिस वक्त सैयद साहू सालार अजमेर में एक किले को घेरे हुए थे, उसी वक्त गाजी मियां 15 फरवरी 1015 ई. को पैदा हुए। चार साल चार माह की उम्र में आपकी बिस्मिल्लाह ख्वानी हुई। नौ साल की उम्र तक फिक्ह व तसव्वुफ की शिक्षा हासिल की। आप बहुत बड़े आलिम थे। आप बहुत बहादुर थे। आपकी शहादत असर व मगरिब के बीच इस्लामी तारीख 14 रजब 423 हिजरी में (बहुत ही कम उम्र में) हुई।

आप हमेशा इंसानों को एक नजर से देखते थे। सभी से भलाई करते। दुनिया से जाने के बाद भी आपका फैज जारी है। आपका मजार शरीफ बहराइच शरीफ में है। अकीदतमंदों ने गोरखपुर में सैकड़ो साल पहले प्रतीकात्मक मजार बनाई। जो वक्फ विभाग में दर्ज है। गाजी मियां के नाम से मोहल्ला गाजी रौजा भी बसा है।

बाले के मैदान में गांधीजी ने दिया था भाषण

भारतीय आजादी के अगुवा महात्मा गांधी 1921 में गोरखपुर आए। शहर के पश्चिमी छोर पर राप्ती नदी के बंधे के किनारे बसे मोहल्ला बहरामपुर बाले के मैदान में गांधीजी ने जोरदार भाषण दिया था। वह समय खिलाफत आंदोलन व असहयोग आंदोलन का चल रहा था।

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