जब गोरखपुर के प्रसिद्ध उद्योगपति का हुआ था अपहरण, सांसद योगी के हस्तक्षेप पर नेपाल पुलिस ने ऐसे की थी मदद
गोरखपुर के प्रसिद्ध उद्योगपति जुगुल किशोर जालान का 26 जून 2002 को दिनदहाड़े अपहरण हो गया था। यह बात पुलिस थाने तक पहुंची। फिर क्या हर किसी की नींद उड़ गई। पुलिस वाले किसी तरह से उद्योगपति को बचाने की जुगत में लग गए मगर कहीं कोई सुराग नहीं मिल रहा था।
उस वक्त तत्कालीन सदर सांसद योगी आदित्यनाथ ने मामले को उठाया और जांच के लिए एसटीएफ को भी लगा दिया गया। एसटीएफ ने लोकेशन लेना शुरू किया तो पता चला कि नेपाल से उद्योगपति को धमकी भरा फोन आया था इतना ही नहीं अपहरण के बाद फिरौती की मांग भी नेपाल के ही एक फोन से की गई थी।
एसटीएफ को जैसे ही यह सुराग मिला कि फोन कॉल नेपाल से आए थे उसी वक्त एसटीएफ टीम नेपाल के लिए रवाना हो गई। वहां पहुंचने के साथ ही नेपाल पुलिस से मदद मांगी गई। पहले तो नेपाल पुलिस ने मदद से ही इनकार कर दिया था मगर सदर सांसद के हस्तक्षेप होने की वजह से पुलिस मदद को आगे आई।
जांच किया गया तो पता चला कि कपिलवस्तु के संदीप खत्री और अमन एक पीसीओ की मदद से फोन कर रहे थे मगर उनका कोई खास लेना-देना नहीं था। पुलिस नेपाल में दो दिन तक पूछताछ करने के बाद भी खाली हाथ रही।
इसी बीच पुलिस के हाथ उन लोगों का नाम लग गया जिसने अपहरण किए थे वह उस समय के अपराध के बड़े नाम थे। राधे यादव, जयेश यादव और राकेश। पुलिस की तलाश तीन दिन बाद खत्म हुई और नारायणी नदी के किनारे बिहार बॉर्डर पर अपहरण करने वाले दबोचे गए।
पुलिस ने सकुशल उद्योगपति को छुड़ा लिया और बाद में बदमाश मुठभेड़ में मार गिराए गए थे। यह वह घटना है जिसके बाद पुलिस ने अपने तंत्र को मजबूत करने की योजना बनाई और फिर उस पर काम भी हुआ धीरे-धीरे सर्विलांस इतना मजबूत हो गया कि किसी भी घटना को छुपा पाना बदमाशों के लिए टेढ़ी खीर हो चुकी है।