स्टेमी केयर नेटवर्क: पूर्वांचल में गुल मंजन और तंबाकू खाने वालों को हो रहा हार्ट अटैक, लगाना पड़ रहा पेसमेकर
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने बताया कि प्रदेश में हार्ट अटैक से मौत के मामले पिछले कुछ सालों से तेजी से बढ़े हैं। इन मौतों का रोकने के लिए प्रदेश में स्टेमी केयर नेटवर्क की स्थापना की जाएगी। इस नेटवर्क में देश भर के हृदय रोग विशेषज्ञ शामिल होंगे।
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पूर्वांचल सहित बिहार के लोगों में हार्ट-अटैक का सबसे बड़ा कारण गुल मंजन और तंबाकू का सेवन है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी विभाग के हृदय रोग विशेषज्ञों की जांच में यब बात सामने आई है। इन दोनों के सेवन से मरीजों की नसें इतनी कमजोर हो रही हैं कि मरीजों को पेसमेकर लगाने के साथ एंजियोप्लास्टी करनी पड़ रही है। ऐसे मरीजों के हार्ट अटैक को रोकने के लिए प्रदेश भर में स्टेमी केयर नेटवर्क स्थापित किया जाएगा।
हृदय रोग विभाग की ओपीडी में 40 से 45 फीसदी मरीज गुल मंजन और तंबाकू के सेवन करने वाले आ रहे हैं। इनके हृदय की नसें सामान्य हृदय रोग के मरीजों की तुलना में 50 से 60 फीसदी कमजोर हैं। इस पर विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर की है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. कुणाल सिंह ने बताया कि पूर्वांचल में हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण गुल मंजन और तंबाकू का सेवन है। गुल को लोग मंजन के रूप में इस्तेमाल करते हैं। यह पिसा हुआ एक तरह का खतरनाक तंबाकू है। इसका इस्तेमाल सबसे अधिक बिहार सहित पूर्वांचल के जिलों में होता है।
अज्ञानता और जागरूकता के अभाव में लोग इसका सेवन कर रहे हैं, जो उनके लिए जानलेवा है। इसके सेवन से हृदय की कोरोनरी कोशिकाएं काफी ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। कोशिकाओं में रक्त की आपूर्ति कम हो रही है, जो कोशिकाओं को (डाइलेटेड) फैला और सिकुड़ा रही है। इसके अलावा चार से पांच फीसदी लोगों में हार्ट अटैक का कारण सिगरेट और शराब है।
हृदय के आकार में मिली है असामान्य वृद्धि
डॉ. कुणाल सिंह ने बताया कि 150 से अधिक मरीजों को पेसमेकर लगाया गया जा चुका है। इसमें 25 से 30 फीसदी मरीज ऐसे थे, जो गुल मंजन के सेवन के साथ तंबाकू का भी इस्तेमाल कर रहे थे। इसके अलावा 15 से 20 फीसदी मरीजों को एंजियोप्लास्टी करनी पड़ी है।
जांच में पता चला कि गुल मंजन से इनके हृदय के आकार में असामान्य वृद्धि, मांसपेशियों के दीवारों की मोटाई, बड़े पैमाने पर मांसपेशियों का बढ़ना और सिकुड़ना शामिल था। इसके कारण हृदय के पंप करने की शक्ति कम हो गई। इसे डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी कहते हैं। इसके मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
स्टेमी केयर नेटवर्क से रुकेगा हार्ट अटैक
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने बताया कि प्रदेश में हार्ट अटैक से मौत के मामले पिछले कुछ सालों से तेजी से बढ़े हैं। इन मौतों का रोकने के लिए प्रदेश में स्टेमी केयर नेटवर्क की स्थापना की जाएगी। इस नेटवर्क में देश भर के हृदय रोग विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसके लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन 26 और 27 मई को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में होगा। इसमें दिल्ली एम्स, ऋषिकेश एम्स, एसजीपीजीआई, केजीएमयू के हृदय रोग विशेषज्ञ मौत की वजह और उससे बचाव का प्रशिक्षण देंगे। इसके बाद स्थानीय स्तर पर हृदय रोग विशेषज्ञों के लिए एक कार्यशाला का आयोजन कर सभी से जानकारी साझा की जाएगी।