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इस वजह से टूटी फिराक गोरखपुरी की मूर्ति, अब नए सिरे से मूर्ति लगवाने में जुटा ये खास विभाग

Thu, 28 May 2020 01:10 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 28 May 2020 01:10 PM IST
सार

  • ट्रक के धक्के से टूटी फिराक गोरखपुरी की मूर्ति
  • नए सिरे से मूर्ति लगवाने में जुटा नगर निगम

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Statue of Firaq Gorakhpuri broken by truck rash
ट्रक के टक्कर से फिराक मूर्ति क्षतिग्रस्त हो गया। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

ट्रक के धक्के से फिराक चौराहे पर लगी साहित्यकार फिराक गोरखपुरी की मूर्ति टूट गई। लोगों ने ट्रक चालक को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। वहीं नगर निगम नए सिरे से इस चौराहे पर मूर्ति लगाने की तैयारी में जुट गया है।

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बृहस्पतिवार को सिविल लाइंस प्रथम वार्ड स्थित फिराक चौराहे के पास ट्रक के बैक करने के दौरान यह हादसा हुआ। मूर्ति के चारों ओर सुंदरीकरण के लिए बनाए गए छतरी और रेलिंग भी ध्वस्त हो गई। सिविल लाइंस वार्ड के पार्षद अजय राय ने बताया कि जल्द से जल्द यहां फिराक गोरखपुरी की एक नई मूर्ति लगाने की कोशिश की जाएगी।
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नगर निगम के अधिकारियों को भी इस संबंध में जानकारी दे दी गई है। नगर निगम के चीफ इंजीनियर सुरेश चंद ने बताया कि जानकारी मिलने के बाद नगर निगम के अवर अभियंता को जांच के लिए भेजा गया था। मेयर और नगर आयुक्त को भी मामले से अवगत करा दिया गया है। नई मूर्ति लगाने के साथ ही चौराहे का सुंदरीकरण के संबंध में भी जल्द निर्णय ले लिया जाएगा।

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उर्दू भाषा के प्रसिद्ध रचनाकार थे फिराक गोरखपुरी

फिराक गोरखपुरी उर्दू भाषा के प्रसिद्ध रचनाकार थे। उनका जन्म गोरखपुर में 28 अगस्त 1896 में हुआ था। इनका मूल नाम रघुपति सहाय था। रामकृष्ण की कहानियों से शुरुआत के बाद की शिक्षा अरबी, फारसी और अंग्रेजी में हुई।

उन्हें गुले-नग्मा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार और सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड से सम्मानित किया गया। बाद में 1970 में इन्हें साहित्य अकादमी का सदस्य भी मनोनीत कर लिया गया था। फिराक गोरखपुरी को साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में सन 1968 में भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था।

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