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स्टांप प्रकरण : आठ वेंडर दुकान बंद करके फरार..पकड़ में आएं तो खुले राज
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गोरखपुर। फर्जी स्टांप प्रकरण की जांच की जद में आए आठ वेंडर अपनी दुकान बंद कर फरार हो गए हैं। पुलिस की टीम लगातार उनकी तलाश में है, तो वह पुलिस से बचने की हर कोशिश में है। इन सब के बीच में स्टांप प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी के जांच के पहिये थम से गए हैं। क्योंकि, जब तक उसमें से कुछ वेंडर पकड़ में नहीं आएंगे, तब तक गिरोह कैसे काम करता था और इसमें कौन-कौन शामिल है, वह सामने नहीं आ पाएगा। यही वजह है कि दुकान बंद कर चुके आठ वेंडर के नाम पते सहित रिश्तेदारों का ब्योरा पुलिस जुटा रही है, ताकि उन तक पहुंचा जा सके। उधर, जेल भेजे गए मुख्य आरोपी रवि दत्त मिश्रा की जमानत निचली अदालत से खारिज हो चुकी है और अब उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। खबर है कि पुलिस अगर इसमें जल्द साक्ष्य नहीं जुटा पाई तो इसका फायदा आरोपी को मिल सकता है।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस की अब तक की जांच में सामने आए 17 संदिग्धों में से एक-एक की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ साक्ष्य जुटा रही है। पुलिस इस पूरे प्रकरण में मुख्य आरोपी रविदत्त को जेल भेजने के बाद से ही किसी अन्य की गिरफ्तारी नहीं कर सकी है। पुलिस की पूरी कोशिश है कि पहले संदिग्धों के खिलाफ साक्ष्य जुटा लिया जाए, तभी गिरफ्तारी की जाए।
दरअसल, फर्जी स्टांप का मामला सामने के बाद से ही पुलिस इसकी तह तक जाने के लिए गहराई से जांच कर रही है। एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने पहले जांच को एसआईटी और फिर अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर इसे एसआर केस भी घोषित कर दिया। अब एसआईटी एक-एक कदम साक्ष्यों के साथ आगे बढ़ा रही है। एसआईटी को मास्टरमाइंड से पूछताछ और वेंडरों की जांच में जो साक्ष्य अब तक मिले हैं, उसमें 17 लोग संदेह के घेरे में हैं। इसमें वह लोग भी शामिल हैं जो हो सकता है कि गिरोह में नहीं हैं, लेकिन अनजाने में ही सही ये भी कभी न कभी फर्जी स्टांप का इस्तेमाल किए हैं। इसी वजह से पुलिस इनके द्वारा बेचे गए स्टांप का ट्रेजरी से मिलान कराने के लिए पत्राचार भी कर चुकी है। इसके बाद से ही पुलिस के राडार पर आठ वेंडर आए है, जिसकी तलाश अभी जारी है।
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यह हुआ था
10 जनवरी 2024 को हुमायूंपुर दक्षिणी, दुर्गाबाड़ी रोड निवासी राजेश मोहन ने शिकायत की थी। उनका कहना है कि सहायक महानिरीक्षक निबंधन के कार्यालय में 28 फरवरी 2023 को ऑनलाइन आवेदन द्वारा भारतीय कोर्ट फीस 53 हजार का स्टांप रिफंड के लिए आवेदन किया था। अधिवक्ता की मदद से आवेदन करने पर पता चला कि स्टांप ही फर्जी है। महज तीन हजार का स्टांप सही पाया गया, बाकी 50 हजार का फर्जी था। डीएम के आदेश पर नासिक भी पत्र भेजकर इसके फर्जी होने की पुष्टि करा ली गई। इसके बाद ही पुलिस केस दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस के हाथ अहम सुराग भी लगे हैं, कुछ आरोपियों के नाम सामने आए है, जिनसे पूछताछ की जानी है। जल्द ही पुलिस साक्ष्यों के आधार पर पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर लेगी।
कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसपी सिटी
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जानकारी के मुताबिक, पुलिस की अब तक की जांच में सामने आए 17 संदिग्धों में से एक-एक की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ साक्ष्य जुटा रही है। पुलिस इस पूरे प्रकरण में मुख्य आरोपी रविदत्त को जेल भेजने के बाद से ही किसी अन्य की गिरफ्तारी नहीं कर सकी है। पुलिस की पूरी कोशिश है कि पहले संदिग्धों के खिलाफ साक्ष्य जुटा लिया जाए, तभी गिरफ्तारी की जाए।
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दरअसल, फर्जी स्टांप का मामला सामने के बाद से ही पुलिस इसकी तह तक जाने के लिए गहराई से जांच कर रही है। एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने पहले जांच को एसआईटी और फिर अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर इसे एसआर केस भी घोषित कर दिया। अब एसआईटी एक-एक कदम साक्ष्यों के साथ आगे बढ़ा रही है। एसआईटी को मास्टरमाइंड से पूछताछ और वेंडरों की जांच में जो साक्ष्य अब तक मिले हैं, उसमें 17 लोग संदेह के घेरे में हैं। इसमें वह लोग भी शामिल हैं जो हो सकता है कि गिरोह में नहीं हैं, लेकिन अनजाने में ही सही ये भी कभी न कभी फर्जी स्टांप का इस्तेमाल किए हैं। इसी वजह से पुलिस इनके द्वारा बेचे गए स्टांप का ट्रेजरी से मिलान कराने के लिए पत्राचार भी कर चुकी है। इसके बाद से ही पुलिस के राडार पर आठ वेंडर आए है, जिसकी तलाश अभी जारी है।
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यह हुआ था
10 जनवरी 2024 को हुमायूंपुर दक्षिणी, दुर्गाबाड़ी रोड निवासी राजेश मोहन ने शिकायत की थी। उनका कहना है कि सहायक महानिरीक्षक निबंधन के कार्यालय में 28 फरवरी 2023 को ऑनलाइन आवेदन द्वारा भारतीय कोर्ट फीस 53 हजार का स्टांप रिफंड के लिए आवेदन किया था। अधिवक्ता की मदद से आवेदन करने पर पता चला कि स्टांप ही फर्जी है। महज तीन हजार का स्टांप सही पाया गया, बाकी 50 हजार का फर्जी था। डीएम के आदेश पर नासिक भी पत्र भेजकर इसके फर्जी होने की पुष्टि करा ली गई। इसके बाद ही पुलिस केस दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस के हाथ अहम सुराग भी लगे हैं, कुछ आरोपियों के नाम सामने आए है, जिनसे पूछताछ की जानी है। जल्द ही पुलिस साक्ष्यों के आधार पर पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर लेगी।
कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसपी सिटी