तहरीर में बांसगांव के नगर पंचायत अध्यक्ष का नाम न होने पर भी बनाया नामजद, दीवान निलंबित
- तहरीर में नगर पंचायत अध्यक्ष वेद प्रकाश शाही, पूर्व ईओ अविनाश मल्ल का नाम नहीं होने पर भी बनाया था नामजद आरोपित
- शिकायत पर एसएसपी ने सीओ बांसगांव को सौंपी थी जांच, रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई
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तहरीर में नाम का जिक्र नहीं होने के बावजूद नगर पंचायत अध्यक्ष वेद प्रकाश शाही और पूर्व अधिशासी अधिकारी अविनाश मल्ल को नामजद आरोपित बनाने के मामले में बुधवार को बांसगांव थाने के दीवान शेषराम को एसएसपी ने निलंबित कर दिया है।
हालांकि एफआईआर पर मूल जिम्मेदारी निभाने वाले थानेदार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। एसएसपी के मुताबिक, कार्रवाई सीओ बांसगांव के जांच रिपोर्ट के आधार पर हुई है।
जानकारी के मुताबिक, बांसगांव नगर पंचायत की ओर से उप्र लद्यु उद्योग लिमिटेड मुरादाबाद को टाटा 407 गाड़ी सप्लाई का टेंडर दिया गया था। गाड़ी आए बिना ही भुगतान हो गया। इसकी शिकायत सभासदों ने की थी, जिसके बाद डीएम ने एसडीएम बांसगांव को जांच सौंपी थी।
जांच में दोषी पाए जाने पर डीएम की ओर से केस दर्ज कराने का आदेश दिया था। इस मामले में डीएम के आदेश पर अधिशासी अधिकारी कमलेश शाही ने तहरीर दी थी। तहरीर में सिर्फ क्षेत्रीय प्रबंधक लद्यु उद्योग लिमिटेड मुरादाबाद का जिक्र था, मगर नगर पंचायत अध्यक्ष वेद प्रकाश शाही, पूर्व अधिशासी अधिकारी अविनाश मल्ल को भी नामजद आरोपित बना दिया गया।
साजिशन मेरा नाम एफआईआर में शामिल किया गया: वेद प्रकाश
नगर पंचायत अध्यक्ष वेद प्रकाश शाही ने बताया कि इस मामले में केस दर्ज होने के बाद जब उन्होंने जानकारी जुटाई तो पता चला कि डीएम ने सिर्फ फर्म पर केस दर्ज कराने का आदेश दिया था, लेकिन बांसगांव के थानेदार ने उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने तथा उत्पीड़न करने के लिए अवैधानिक रूप से उनके ऊपर भी मुकदमा दर्ज किया।
इसकी शिकायत एसएसपी से की गई थी। उन्होंने बताया कि लद्यु उद्योग निगम लिमिटेड मुरादाबाद एक सरकारी संस्था है। शासनादेश में संस्था को कार्यादेश जारी करने में वरीयता देने की बात कही गई है। उक्त संस्था को हाइड्रोलिक 9 मीटर टाटा 207 की आपूर्ति के लिए 15 अप्रैल 2019, 29 फरवरी 2020 और 16 मार्च 2020 को लिखित रूप से निर्देश दिया गया।
आपूर्ति नहीं होने पर उन्होंने 8 मई 2020 को अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत बांसगांव को पत्र लिखकर निर्देश दिया कि वह फर्म पर मुकदमा दर्ज कराएं। नगर पंचायत अध्यक्ष ने जिला प्रशासन से मांग की कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को समाप्त कराया जाए अन्यथा वह कोर्ट की शरण में जाने को बाध्य होंगे।