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Gorakhpur News: सिंगापुर में रहते हुए भी अपने गांव के लिए हमेशा तत्पर थे श्रीनिवास राय
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हिंदी सोसायटी के सदस्य रहे श्रीनिवास को अपने गांव कनईचा से था गहरा लगाव
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। सिंगापुर में निवास करने वाले श्रीनिवास राय का अपने जन्मस्थल ग्राम सभा कनईचा के प्रति गहरा लगाव था। भतीजे अनिल राय ने बताया कि वे साल में कम से कम एक बार अपने गांव आते और सभी ग्रामीणों से मिलते। उनका स्वागत पूरे गांव में खास रहता था। पिछली बार मार्च में गांव आने पर उन्होंने नवंबर में लौटने का वादा किया था लेकिन स्वास्थ्य कारणों से आ नहीं सके।
अनिल राय ने बताया कि गांव की बच्चियों को स्कूल दूर होने के कारण पढ़ाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस पर श्रीनिवास राय ने गांव में विद्यालय की नींव रखवाई और अन्य लोगों के सहयोग से इसे पूर्ण कराया, जिससे अब बच्चियों को पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। साथ ही उन्होंने राम-जानकी मंदिर का निर्माण भी करवाया, जिसका स्थापना दिवस 29 जनवरी को मनाया जाता है। संयोगवश, उनकी 13वीं पुण्यतिथि भी 29 जनवरी को ही है। श्रीनिवास राय गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी में मदद करते, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में सहयोग करते और गांव के अन्य लोगों को सामाजिक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रेरित करते थे। भले ही वे सिंगापुर में रहते थे लेकिन उनका दिल और प्रयास हमेशा अपने गांव के लिए समर्पित रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। सिंगापुर में निवास करने वाले श्रीनिवास राय का अपने जन्मस्थल ग्राम सभा कनईचा के प्रति गहरा लगाव था। भतीजे अनिल राय ने बताया कि वे साल में कम से कम एक बार अपने गांव आते और सभी ग्रामीणों से मिलते। उनका स्वागत पूरे गांव में खास रहता था। पिछली बार मार्च में गांव आने पर उन्होंने नवंबर में लौटने का वादा किया था लेकिन स्वास्थ्य कारणों से आ नहीं सके।
अनिल राय ने बताया कि गांव की बच्चियों को स्कूल दूर होने के कारण पढ़ाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस पर श्रीनिवास राय ने गांव में विद्यालय की नींव रखवाई और अन्य लोगों के सहयोग से इसे पूर्ण कराया, जिससे अब बच्चियों को पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। साथ ही उन्होंने राम-जानकी मंदिर का निर्माण भी करवाया, जिसका स्थापना दिवस 29 जनवरी को मनाया जाता है। संयोगवश, उनकी 13वीं पुण्यतिथि भी 29 जनवरी को ही है। श्रीनिवास राय गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी में मदद करते, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में सहयोग करते और गांव के अन्य लोगों को सामाजिक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रेरित करते थे। भले ही वे सिंगापुर में रहते थे लेकिन उनका दिल और प्रयास हमेशा अपने गांव के लिए समर्पित रहे।
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