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उपलब्धि: 50 वर्षों से बाबा गोरखनाथ की माटी का नाम रोशन कर रहे धाकड़ पहलवान, अब मंजिल पाना होगा आसान
Thu, 05 Aug 2021 04:15 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 05 Aug 2021 04:15 PM IST
सार
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में बिखेरी चमक। यहां खेलो इंडिया का सेंटर खोला जाएगा। जिससे पहलवानों को उच्च स्तरीय ट्रेनिंग के लिए अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
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कुश्ती
- फोटो : ट्विटर @OlympicChannel
विस्तार
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोरखपुर के पहलवानों ने कुश्ती में अपना लोहा मनवाया है। वे करीब 50 वर्षों से बाबा गोरखनाथ की माटी की खुशबू बिखेर रहे हैं। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए यहां खेलो इंडिया का एक सेंटर स्थापित होगा, जिससे पहलवानों की मंजिल अब और आसान हो जाएगी।
टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पहलवानों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पदक की उम्मीदों को बरकरार रखा है। रवि दहिया ने 57 किलोभार वर्ग के फाइनल में प्रवेश करने तो दीपक पुनिया के लिए ब्रांज मेडल के लिए क्वालिफाई करने से देश को ओलंपिक में कुश्ती से पदक की उम्मीदें बढ़ गई है। बजरंग और विनेश ने भी सभी मैच में दमखम दिखाया है।
बाबा गोरक्षनाथ की धरती ने भी देश को एक से बढ़कर एक धुरंधर पहलवान दिए हैं, जो 1970 से ही गोरखपुर का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर रहे हैं। वर्तमान में भी ये सिलसिला जारी है। हाल ही में एक जिला एक खेल के तहत गोरखपुर से कुश्ती को शामिल किया गया है, जिसके अंतर्गत यहां खेलो इंडिया का सेंटर खोला जाएगा। यहां के पहलवानों को उच्च स्तरीय ट्रेनिंग के लिए अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
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कुश्ती के लिए गोरखपुर के स्पोर्ट्स कॉलेज, रीजनल स्टेडियम और रेलवे स्टेडियम में मैट की सुविधा उपलब्ध है। स्पोर्ट्स कॉलेज में 85, रीजनल स्टेडियम में 20 और रेलवे स्टेडियम में 20 कुश्ती के खिलाड़ी प्रशिक्षण लेते हैं। शहरी क्षेत्र में कृष्णानगर व्यायामशाला और ग्रामीण क्षेत्र में चतुर बंदुआरी गांव में मैट है। इसके अलावा शहर के सबसे पुराने अखाड़े पक्कीबाग, शिवाजी व्यायामशाला, खजनी, ककराखोर, डेरवां समेत ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 50 से अधिक जगहों पर मिट्टी के अखाड़े हैं, जिनमें हजारों बच्चे कुश्ती का प्रशिक्षण लेते हैं।
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टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पहलवानों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पदक की उम्मीदों को बरकरार रखा है। रवि दहिया ने 57 किलोभार वर्ग के फाइनल में प्रवेश करने तो दीपक पुनिया के लिए ब्रांज मेडल के लिए क्वालिफाई करने से देश को ओलंपिक में कुश्ती से पदक की उम्मीदें बढ़ गई है। बजरंग और विनेश ने भी सभी मैच में दमखम दिखाया है।
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बाबा गोरक्षनाथ की धरती ने भी देश को एक से बढ़कर एक धुरंधर पहलवान दिए हैं, जो 1970 से ही गोरखपुर का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर रहे हैं। वर्तमान में भी ये सिलसिला जारी है। हाल ही में एक जिला एक खेल के तहत गोरखपुर से कुश्ती को शामिल किया गया है, जिसके अंतर्गत यहां खेलो इंडिया का सेंटर खोला जाएगा। यहां के पहलवानों को उच्च स्तरीय ट्रेनिंग के लिए अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
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कुश्ती के लिए गोरखपुर के स्पोर्ट्स कॉलेज, रीजनल स्टेडियम और रेलवे स्टेडियम में मैट की सुविधा उपलब्ध है। स्पोर्ट्स कॉलेज में 85, रीजनल स्टेडियम में 20 और रेलवे स्टेडियम में 20 कुश्ती के खिलाड़ी प्रशिक्षण लेते हैं। शहरी क्षेत्र में कृष्णानगर व्यायामशाला और ग्रामीण क्षेत्र में चतुर बंदुआरी गांव में मैट है। इसके अलावा शहर के सबसे पुराने अखाड़े पक्कीबाग, शिवाजी व्यायामशाला, खजनी, ककराखोर, डेरवां समेत ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 50 से अधिक जगहों पर मिट्टी के अखाड़े हैं, जिनमें हजारों बच्चे कुश्ती का प्रशिक्षण लेते हैं।
गोरखपुर के अंतरराष्ट्रीय पहलवान
पहलवान अंतरराष्ट्रीय करियर
दिनेश सिंह 1971-72
रामचन्द्र यादव 1974
पन्नेलाल यादव 1977-89
राम मिलन यादव 1980-82
रामाश्रय यादव 1984-90
स्व.तालुकदार यादव 1992-99
जनार्दन यादव 1992-2004
चन्द्र विजय सिंह 1996-2005
स्व. गामा मिश्रा 1995-98
राम निवास यादव 1993-2000
विजय चौरसिया 2013-16
अमरनाथ यादव 2008*
अनूप यादव 2019*
पुष्पा यादव 2018*
भारतीय कुश्ती संघ के संयुक्त सचिव आदित्य सिंह आगु ने बताया कि कुश्ती में यहां से बहुत से अंतरराष्ट्रीय पहलवान निकले हैं। कुश्ती गांव और मिट्टी से जुड़ा खेल है। कुश्ती के खिलाड़ियों ने हमेशा अपनी प्रतिभा की चमक बिखेरी है। एकलौता ऐसा खेल है, जिसे देखने दूर दराज से आज भी ग्रामीण आते हैं।
भारतीय कुश्ती टीम के कोच चंद्रविजय सिंह ने बताया कि गोरखपुर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई पहलवान देश को दिए हैं। माटी से शुरू हुआ ये सफर अब मैट तक पहुंच गया है। खेलो इंडिया सेंटर के लिए गोरखपुर का चयन किया गया है। यहां के कुश्ती के खिलाड़ियों को सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
दिनेश सिंह 1971-72
रामचन्द्र यादव 1974
पन्नेलाल यादव 1977-89
राम मिलन यादव 1980-82
रामाश्रय यादव 1984-90
स्व.तालुकदार यादव 1992-99
जनार्दन यादव 1992-2004
चन्द्र विजय सिंह 1996-2005
स्व. गामा मिश्रा 1995-98
राम निवास यादव 1993-2000
विजय चौरसिया 2013-16
अमरनाथ यादव 2008*
अनूप यादव 2019*
पुष्पा यादव 2018*
भारतीय कुश्ती संघ के संयुक्त सचिव आदित्य सिंह आगु ने बताया कि कुश्ती में यहां से बहुत से अंतरराष्ट्रीय पहलवान निकले हैं। कुश्ती गांव और मिट्टी से जुड़ा खेल है। कुश्ती के खिलाड़ियों ने हमेशा अपनी प्रतिभा की चमक बिखेरी है। एकलौता ऐसा खेल है, जिसे देखने दूर दराज से आज भी ग्रामीण आते हैं।
भारतीय कुश्ती टीम के कोच चंद्रविजय सिंह ने बताया कि गोरखपुर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई पहलवान देश को दिए हैं। माटी से शुरू हुआ ये सफर अब मैट तक पहुंच गया है। खेलो इंडिया सेंटर के लिए गोरखपुर का चयन किया गया है। यहां के कुश्ती के खिलाड़ियों को सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।