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जब जनता ने एक किन्नर को बना दिया था 'गोरखपुर का मेयर', धुरंधरों की जब्त हो गई थी जमानत

Thu, 11 Jun 2020 07:57 PM IST
vivek shukla टीपी शाही, गोरखपुर।
टीपी शाही, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 11 Jun 2020 07:57 PM IST
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Special story of Kinnar asha devi Gorakhpur mayor
गोरखपुर की पूर्व मेयर किन्नर आशा देवी। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

आशा देवी वर्ष 2001 में गोरखपुर महानगर की महापौर चुनी गई थीं। वह गोरखपुर की तीसरी मेयर थीं। उस समय प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। आशा देवी के मैदान में उतर जाने की वजह से यहां का चुनाव राष्ट्रीय फलक पर आ गया था।

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हर किसी की निगाहें यहां के चुनाव परिणाम पर थीं। इनके मुकाबले भाजपा, कांग्रेस सहित बसपा और सपा के प्रत्याशी भी मैदान में थे। चुनाव परिणाम जब आया तो सभी दलों के प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। सपा से उस समय प्रत्याशी रहीं पूर्व मेयर अंजू चौधरी को 60 हजार से भी अधिक वोटों से शिकस्त खानी पड़ी थी।
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उस दौरान किन्नर नारा लगा रहे थे कि नेताओं ने भाई भतीजावाद के सिवा कुछ नहीं दिया है जबकि उनका समाज दूसरों के लिए दुआएं मांगता है। आशा देवी का चुनाव चिन्ह चूड़ी था। जिस दिन वोटिंग हो रही थी उस दिन की घटना को याद करके एक पत्रकार साथी ने बताया कि अल्पसंख्यक समुदाय की तरफ से बुर्का पहनी महिलाएं मतदान करने जा रही थीं।
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किसी ने कहा- यह वोट सपा के पक्ष में जाएगा, ये सुनकर वोट देने जा रही महिलाओं ने हाथ ऊपर उठाया और पहनी हुई चूड़ियों को खनकाते हुए आगे बढ़ गईं। जब रिजल्ट आया तो आशा देवी 60 प्रतिशत अधिक मत पाकर मेयर बन गईं। अन्य प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई।

रिक्शे से पहुंची थीं नगर निगम

चुनाव जीतने के बाद आशा देवी ने यह कहा था कि वह गरीब और समाज के उपेक्षित वर्ग के लोगों के साथ है। उन्होंने वादा किया कि वह रिक्शे से ही आया जाया करेंगी। इसके लिए उन्हें एक अलग तरीके का रिक्शा बनवाया था। शपथ ग्रहण के बाद वह जब रिक्शा से नगर निगम पहुंची तो हर किसी कि निगाह उन पर टिक गई। लाल बत्ती लगा रिक्शा शहर के सड़कों पर जब दौड़ने लगा तो लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया।

चुनाव प्रचार में आई थीं शबनम मौसी
आशा देवी के चुनाव की भूमिका एक चिकित्सक और एक मीडिया से जुड़े व्यक्ति की भले ही रही हो। उनके प्रचार की कमान उस समय मध्य प्रदेश की विधायक किन्नर शबनम मौसी ने संभाली थी। चुनाव प्रचार के दौरान कई दिनों तक शहर में डेरा डाली शबनम मौसी ने कई सभाओं को संबोधित कर जनता को आशा देवी के पक्ष में करने का काम किया था।

स्थानीय किन्नरों ने भी संभाला था मोर्चा
आशा देवी के नामांकन से लेकर मतदान तक यहां के किन्नरों ने अपनी अहम भूमिका निभाई थी। किन्नरों का समूह उस दौरान यह नारा लगा रहा था ‘नेताओं ने क्या दिया, भाई भतीजा वाद दिया’ उस दौरान काफी चर्चित रहा। नेताओं की प्रति लोगों का गुस्सा उस समय फूट रहा था। उसी का परिणाम था कि आशा देवी मेयर चुन ली गई।  2013 में आशा देवी का आकस्मिक निधन हो गया था।

 

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