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Gorakhpur News: खेती कर 'कोईला' ने बदली किस्मत, 13 महिलाओं को भी दिया रोजगार

Thu, 17 Sep 2020 02:32 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 17 Sep 2020 02:32 PM IST
सार

  • कोईला देवी ने अपने साथ ही दूसरों की भी बदल दी किस्मत
  • महज चार डिस्मिल जमीन पर मिश्रित खेती शुरू कर बन गईं नजीर
  • बाद में स्वयं सहायता समूह बनाया, एक-दूसरे की मददगार बनी हैं 13 महिलाएं

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special story of gorakhpur hardworking women koila devi changed fate of many women as well in uttar pradesh
महिलाओं को प्रशिक्षण देती कोईला देवी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

संसाधनों के अभाव में चुनौतियों के आगे जो लोग घुटने टेक देते हैं, 'उत्कृष्ट किसान सम्मान' से सम्मानित कोईला देवी उनकी सोच बदलने का एक जरिया बन सकती हैं। कोईला देवी ने अपनी महज चार डिस्मिल जमीन पर मिश्रित खेती की शुरूआत करके न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि कई अन्य महिलाओं के मन में कुछ कर गुजरने की लौ जगा दी। आज वे एक सफल महिला स्वयं सहायता समूह का भी संचालन कर रही हैं।   

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जंगल कौड़िया के राखूखोर गांव की रहने वाली कोईला देवी ने बहुत तकलीफें झेलीं, पर हिम्मत नहीं हारीं। मजदूरी ही उनकी जीविका का साधन था, लेकिन कोईला देवी का जुनून उन्हें खेती किसानी की ओर खींच ले गया। उपने चार डिस्मिल खेत में उन्होंने सावां, मडुआ, टागुन, सब्जी, हल्दी आदि उगाना शुरू किया। इसके बाद गोरखपुर एन्वायरमेंटल एक्शन ग्रुप से जुड़ीं और जैविक खाद बनाने की तरीका सीखा। जैविक खाद बेचकर वह अपने परिवार का भरण पोषण कर रही हैं। वह छोटी जोत के किसानों को खेती किसानी की बारीकियां भी समझाती हैं।
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दो वर्ष पूर्व उन्होंने स्वयं सहायता समूह बनाया। उसमें शामिल 13 महिलाएं अब आपसी बैंकिंग से एक-दूसरे की मददगार बनी हैं। उनके बैंक खाते में 56 हजार रुपये जमा हैं, जिसका उपयोग बिना ब्याज लेनदेन में करती हैं। इसी समूह से रुपये लेकर कोईला देवी ने बंटाई पर दो बीघा खेत लिया और उसमें धान, मूंगफली और गेहूं व सरसों उपजा रही हैं। 

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गेहूं उत्पादन में बनाया रिकॉर्ड, की गईं सम्मानित

कोईला देवी ने वर्ष 2019-2020 में कर्ण वंदना गेहूं की प्रजाति की बुवाई की। बीज उन्हें कृषि विज्ञान केंद्र बढ़या से प्रदर्शन के लिए मिला। कोईला देवी ने वैज्ञानिक विधि से खेती की और मात्र 266 वर्गमीटर जमीन में 220 किग्रा. गेहूं का उत्पादन किया। इस प्रकार उन्होंने 82.52 कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से पैदावार प्राप्त किया। भूमि तो छोटी थी, लेकिन उत्पादन दर जिले में सभी किसानों से बेहतर था। उनकी इस उपलब्धि के लिए 24 अगस्त, 2019 को इंदौर (मध्य प्रदेश) में आईसीएआर इंदौर और इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ व्हीट एवं बार्ली रिसर्च, करनाल द्वारा ‘उत्कृष्ट किसान सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

खाद से की अतिरिक्त कमाई
कोईला देवी वर्मी कंपोस्ट, मटका खाद भी बनाती हैं। खाद का इस्तेमाल खुद की खेती में करती हैं और शेष को पांच रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचती भी हैं। इससे उनकी अतिरिक्त कमाई हो जाती है।

समूह में प्रति माह 100 रुपये जमा करती हैं सभी महिलाएं
कोईला देवी ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के डीएसटी कोर सपोर्ट परियोजना से जुड़कर मां वैष्णो देवी स्वयं सहायता समूह का गठन किया। इसमें उन्हीं महिलाओं को रखा जिनके पास एक एकड़ से कम भूमि है। समूह में 13 महिलाएं हैं और सभी पहले 50 रुपये प्रति महीने जमा करती थीं, अब बचत की रकम 100 रुपये कर दी गई है। इससे 56 हजार की पूंजी तैैयार की गई है। समूह की महिलाएं अपनी जरूरत के अनुसार कर्ज लेती हैं फिर उसे वापस कर देती हैं।
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