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Exclusive: यूपी में कभी भाजपा का 'संकटमोचन' था यह शख्स, अब हालत ऐसी कि भूल गए पार्टी नेता

Wed, 06 Jan 2021 10:57 AM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 06 Jan 2021 10:57 AM IST
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special story of BJP Leader Piyush Kant Shukla struggle life due to illness
पीयूष कांत - फोटो : अमर उजाला
कभी भाजपा के खेवनहारों में शामिल रहे काजीपुर खुर्द (तब छोटे काजीपुर) से पूर्व पार्षद पीयूष कांत शुक्ला (68) को आज मदद की दरकार है। वह तीन वर्षों से बिस्तर पर पड़े हैं। फालिज के चलते उनके शरीर का आधा हिस्सा काम नहीं करता है। दो बेटियों की शादी करने के लिए उन्हें खेत तक बेचना पड़ा है। पीयूष कांत इन मुसीबतों से हारे नहीं हैं। उन्हें मलाल इस बात का है कि जिस पार्टी को संजीवनी दी, उसी के नेताओं ने विपत्ति के वक्त उनका कुशलक्षेम तक नहीं पूछा।
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नगर निगम की पहली कार्यकारिणी में वर्ष 1989 में वार्ड नंबर 18 (तब छोटे काजीपुर) से पीयूष कांत शुक्ला भाजपा से पार्षद चुने गए थे। दूसरी बार उनकी पत्नी इंदिरा शुक्ला पार्षद चुनी गईं। सोमवार को वह 68 वर्ष के हो गए। पीयूष कांत के जन्मदिन पर उनके घर पहुंचे, अमर उजाला संवाददाता ने परिचय देकर कुशलक्षेम पूछी तो उनकी आंखें भर आईं। रुंधे गले से बोले-आज मेरा जन्मदिन है। जहां बैठा हूं, यहीं पूर्व मुख्यमंत्री व तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष कल्याण सिंह और वर्तमान में देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (उस समय युवा मोर्चा अध्यक्ष) बैठकर भोजन किए थे। खूब जमघट लगा था, लेकिन आज कोई झांकने नहीं आता। मैं खुद उठकर बैठ तक नहीं सकता। अब जीवन दूसरे के सहारे है। वर्ष 2017 में जब तबीयत बिगड़ी तब पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवप्रताप शुक्ल और तत्कालीन महापौर डॉ. सत्या पांडेय आईं थीं, लेकिन उसके बाद कोई नहीं आया और न ही किसी ने कोई मदद की।
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मुश्किल से चल रहा घर का खर्च
पूर्व पार्षद की पत्नी एवं खुद पार्षद रहीं इंदिरा शुक्ला कहती हैं कि हमने राजनीति सेवा के लिए की। दो बेटियां हैं। उन्होंने पढ़ाई के बाद प्राइवेट नौकरी की तो घर का खर्च चल पाया। अब उनकी शादी हो गई है। बेटा प्राइवेट नौकरी कर रहा है। क्या बताएं, किसी तरह घर का खर्च चल रहा है। तरंग क्रासिंग पर पति की पेंट की दुकान थी। तबीयत खराब हुई तो दुकान का किराया नहीं दे पाए। मकान मालिक ने ताला लगा दिया। हमें दुकान छोड़नी पड़ी।
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समाचार पत्र वितरक निशुल्क देते हैं अखबार

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पत्नी इंदिरा शुक्ला के साथ पूर्व पार्षद पीयूष कांत शुक्ला। - फोटो : अमर उजाला।
पूर्व पार्षद पीयूष कांत बताते हैं कि एक वर्ष पहले समाचार पत्र वितरक मनोज से बोला कि अखबार बंद कर दो। अब हम कीमत नहीं दे पाएंगे, लेकिन वह नहीं माना। मनोज ने कहा कि जब होगा तब दीजिएगा। मनोज के कर्जदार हम दिल से हैं।
 
वर्ष 2009 से आई विपत्ति

पीयूष कांत बताते हैं कि वर्ष 2009 से मेरे परिवार पर विपत्ति आई। पिता की मृत्यु हुई, वे सेवानिवृत्त इंजीनियर थे। अगले वर्ष ही 2010 में मां का निधन हो गया। छोटे भाई की पत्नी को कैंसर हो गया। इसके बाद खुद बीमार हुए और अपाहिज हो गए।

फिर नहीं जीती भाजपा
जिस वार्ड से पीयूष कांत और उनकी पत्नी इंदिरा शुक्ला जीती थीं, वहां से भाजपा लंबे समय से चुनाव हार रही है। पूर्व पार्षद का कहना है कि परिसीमन के बाद जातीय व सामाजिक समीकरण बदल गया है। इसका फायदा दूसरे राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को मिलता है।

राम जन्मभूमि आंदोलन में 22 दिन थे जेल में

फालिज के चलते पीयूष कांत ठीक से बोल नहीं पाते हैं। उन्होंने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के समय शिवप्रताप शुक्ल (पूर्व केंद्रीय मंत्री), ओम प्रकाश पासवान (पूर्व विधायक), विनोद पांडेय (पूर्व एमएलसी), धुव्र नारायण (पूर्व महानगर अध्यक्ष) आदि नेताओं के साथ आजमगढ़ जेल में वह 22 दिन तक बंद रहे।
 
सरकारी सुविधाएं नहीं मिल रहीं
पीयूष कांत के मुताबिक किसान सम्मान निधि के लिए पंजीकरण कराया, लेकिन अभी तक धनराशि नहीं मिली है। वृद्धावस्था व विकलांग पेंशन जैसी सरकारी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं।  

(आप 9026646444 पर फोन कर पीयूष कांत की सीधे मदद कर सकते हैं)
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