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गोरखपुरः उपचुनाव में कामयाब नहीं हो पाई सपा की रणनीति, रंग लाई भाजपा की नीति
Wed, 11 Nov 2020 03:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा
विनोद कुमार तिवारी, देवरिया
विनोद कुमार तिवारी, देवरिया
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 11 Nov 2020 03:08 AM IST
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भाजपा
- फोटो : amar ujala
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उपचुनाव में समाजवादी पार्टी की रणनीति कामयाब नहीं हो पाई। सपा को पिछले चुनावों की तुलना में मत भले ही अधिक मिले, लेकिन भाजपा ने अलग से रणनीति बनाकर सपा, बसपा और बागी प्रत्याशी को चित कर दिया। उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार डॉ. सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी को 68,732 और सपा के ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को 48,643 मत मिले, जबकि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के जन्मेजय सिंह को 88,030, कांग्रेस-सपा गठबंधन के जेपी जायसवाल को 41,794 और बसपा के अभय नाथ त्रिपाठी को 29,218 मत मिले थे।
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देवरिया सदर विधानसभा के वर्ष 1996 में हुए चुनाव के परिणाम पर गौर करें तो सुभाषचंद्र श्रीवास्तव (जनता दल) ने 62 हजार से अधिक मत पाकर चुनाव जीता था। उस दौरान भाजपा के रवींद्र प्रताप मल्ल को 44 हजार से अधिक मत मिले थे। वर्ष 2002 के चुनाव में नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी के दीनानाथ कुशवाहा जीते। उन्हें 35,159 मत प्राप्त हुए थे। उस समय सपा के रामनगीना यादव को 33,255 मत मिले थे। वर्ष 2007 के चुनाव में सपा के दीनानाथ चुनाव 25,568 मत पाकर जीते थे। दूसरे स्थान रहे बसपा के कमलेश शुक्ला को 22,776 मतों से संतोष करना पड़ा था। परिसीमन के बाद 2012 के चुनाव में भाजपा के जन्मेजय सिंह को 56,299 मत मिले और वह जीत गए थे। दूसरे स्थान पर बसपा के प्रमोद सिंह रहे, जिन्हें 33,004 मत मिले थे।
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वर्ष 2017 में सपा से बगावत कर विजय प्रताप यादव चुनाव लड़े थे। अगर उनके मतों को जेपी जायसवाल में जोड़ दिया जाए तो भी उपचुनाव में सपा उम्मीदवार के रूप में ब्रह्माशंकर त्रिपाठी ने अधिक मत प्राप्त किए हैं। भितरघात की वजह से सपा अपनी रणनीति में फेल हो गई। पूरे चुनाव के दौरान सपा उम्मीदवार अकेले पड़ गए थे। पार्टी मुखिया अखिलेश यादव सहित कोई भी बड़ा सपा नेता प्रचार करने नहीं आया। ब्रह्माशंकर त्रिपाठी ने जीत की अच्छी योजना जरूर बनाई थी, लेकिन वह कामयाब नहीं हो सकी।
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20 हजार से अधिक मतों से जीतना आसान नहीं था
जिस उपचुनाव में सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी हो, जिनके निधन के बाद उपचुनाव हो रहा था, उनका पुत्र बगावत कर मैदान में उतरा हो, वहां भाजपा के लिए 20 हजार से अधिक मतों से चुनाव जीतना आसान नहीं था, लेकिन डॉ. सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी की लोकप्रियता ने उन्हें कामयाबी दिला दी। सांसद रमापति राम त्रिपाठी, कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी, प्रभारी मंत्री श्रीराम चौहान, राज्यमंत्री जयप्रकाश निषाद, क्षेत्रीय अध्यक्ष डॉ. धर्मेद्र सिंह, प्रदेश मंत्री त्रयबंक सहित कई नेताओं ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। गोरखपुर के सांसद रवि किशन एवं भाजपा की प्रदेश महिला अध्यक्ष दर्शना सिंह ने भी लोगों में अलख जगाने का काम किया। ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष राजेश मिश्र और हियुवा के नीरज शाही ने ग्राम प्रधानों में समन्वय बनाने में अहम भूमिका निभाई।