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UP: आईजीआरएस में रुचि न लेने पर एसपी और सीओ बने डिफाल्टर, नोडल अफसर ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब

Fri, 19 May 2023 02:57 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 19 May 2023 02:57 PM IST
सार

नोडल अफसर एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने बताया कि डिफाल्टों के नाम सामने आने पर सभी से जवाब मांगा गया है। दरअसल, शासन के आदेश पर अब रोजाना आईजीआरएस की समीक्षा होने लगी है, पहले महीने में एक बार समीक्षा होती थी, तो तय समयसीमा के बाद जांच पूरी होने पर भी अफसर डिफाल्टर होने से बच जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है।

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SP and CO became defaulters for not taking interest in IGRS
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock

विस्तार

घर बैठे मुख्यमंत्री से शिकायत करने की ऑनलाइन सुविधा आईजीआरएस में रुचि नहीं लेने पर एसपी और सीओ समेत पांच पुलिसकर्मी डिफाल्टर बन गए हैं। आईजीआरएस के नोडल अफसर एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने सभी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। अफसरों को जारी पत्र में कहा गया है कि जल्द से जल्द जांच पूरी करें। पांच डिफाल्टरों में एक एडिशनल एसपी, दो सीओ, एक थानेदार और पुलिस ऑफिस का लिपिक शामिल हैं।
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नोडल अफसर एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने बताया कि डिफाल्टों के नाम सामने आने पर सभी से जवाब मांगा गया है। दरअसल, शासन के आदेश पर अब रोजाना आईजीआरएस की समीक्षा होने लगी है, पहले महीने में एक बार समीक्षा होती थी, तो तय समयसीमा के बाद जांच पूरी होने पर भी अफसर डिफाल्टर होने से बच जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
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व्यवस्था सुचारू रूप से चले, इसके लिए एसपी रैंक के एक अफसर को नोडल बनाया गया है। वहीं, अनावश्यक शिकायतों को रोकने के लिए नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब एक माह में एक मोबाइल फोन से दस शिकायतें ही दर्ज कराई जा सकती हैं। जबकि, पहले यह संख्या 50 थी। कहा गया कि नई व्यवस्था से वास्तविक शिकायतें ही आएंगी। लेकिन, अब समीक्षा में सामने आया है कि सही शिकायतों का निस्तारण भी नहीं हो सका है।
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आईजीआरएस में यह मिलती है सुविधा
- घर बैठे प्रार्थना पत्र भेज सकते है।
- हर प्रार्थना पत्र पर जांच अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं।
- जांच अधिकारी को की गई कार्रवाई का विवरण देना होता है।
- नियमानुसार 15 दिन में समस्या का समाधान करना होता है।
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