बेटों की करतूत से पिता हुए शर्मसार, ऑनलाइन गेम के चक्कर में खाते से निकाल लिए लाखों रुपये
- साइबर क्राइम थाने में पहुंचे दो मामले, हकीकत सामने आने पर बचाव में आए पिता
- शिकायतकर्ताओं के अनुरोध पर पुलिस ने आरोपी बेटों को छोड़ा, कार्रवाई नहीं की
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ऑनलाइन आईपीएल के जरिए बड़ी कमाई के चक्कर में गोरखपुर शहर के दो संभ्रांत परिवारों के युवकों ने पिता के ही बैंक खातों में सेंध मार दी। एक युवक ने पिता के खाते से 1,54,000 तो दूसरे ने 43,000 रुपये ऑनलाइन उड़ा लिए। खातों से बिना जानकारी के बड़ी रकम ऑनलाइन निकलने से घबराए दोनों खाताधारकों ने साइबर क्राइम थाने की शरण ली तो तहकीकात में यह कड़वा सच सामने आया। खैर, कानूनी कार्रवाई से बेटों का भविष्य बर्बाद होने से बचाने के लिए दोनों ने मन मारकर अपनी शिकायतें वापस ले लीं। चूंकि मामला दर्ज नहीं हुआ, लिहाजा घटना से संबंधित किरदारों का खुलासा नहीं किया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, इस मामले में दीवानी कचहरी के समीप स्थित कॉलेज के एक प्रवक्ता और एक कपड़ा व्यापारी ने साइबर क्राइम थाने में खाते से रुपये निकल जाने की शिकायत की थी। प्रवक्ता के खाते से कई बार में 1.54 लाख रुपये की रकम ऑनलाइन निकाली गई थी। जब मोबाइल पर नकद निकासी के संदेश पर उनका ध्यान गया तो बैंक पहुंचे। उन्हें लगा कि उनके साथ बड़ी धोखाधड़ी हो गई तो उन्होंने पुलिस से शिकायत की। एसएसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच का आदेश दिया। साइबर थाने की टीम ने जांच शुरू कर दी।
चंद घंटों में ही पता चल गया कि उनके एटीएम और ओटीपी का इस्तेमाल करके रुपये निकाले गए हैं। फिर जांच आगे बढ़ा तो पता चला कि यह हरकत किसी और ने नहीं, बल्कि उनके बेटे ने ही की है। कानून की नजर में दोषी होने की वजह से पुलिस ने आरोपी बेटे को तत्काल हिरासत में ले लिया।
पिता आखिर पिता ठहरा, जालसाज के रूप में अपने बेटे का चेहरा सामने आने पर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वे एसएसपी के पास पहुंचे और कार्रवाई न करने के लिए गिड़गिड़ाने लगे। एसएसपी ने वादी के मुकरने के कानूनी पहलू और उनके लड़के के भविष्य को देखते हुए सख्त हिदायत देकर छोड़ दिया।
पिता के मोबाइल पर ओटीपी आने पर कर देते थे डिलीट
उधर, कोतवाली इलाके में रहने वाले व्यापारी ने भी साइबर थाने में 43 हजार रुपये निकाले जाने की शिकायत की। इसकी भी जांच की गई तो पता चला कि बेटे ने 17 बार में 43000 हजार का ट्रांजेक्शन किया है। बेटे की गलती सामने आने पर उन्होंने भी बेटे की हरकत पर माफी देने की गुहार एसएसपी से लगाई, जिसके बाद पुलिस ने उसे भी छोड़ दिया।
दोनों मामलों में एक बात सामान्य है कि बैंक से ऑनलाइन ट्रांसजेक्शन की प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया गया था। ट्रांजेक्शन के वक्त वे पिता का मोबाइल अपने पास रखते थे। ओटीपी और नकद निकासी का जो भी संदेश आया, दोनों ने मैसेज इनबॉक्स से डिलीट कर दिया।
ऑनलाइन गेमिंग एप, पहले जीतो-फिर गंवाओ
दरअसल, इस तरह के ज्यादातर गेमिंग एप और साइट एक तरह से ऑनलाइन सट्टा खिलाते हैं। इसमें टीम, खिलाड़ी आदि पर रकम दांव पर लगानी होती है। मसलन, आपने अमुक टीम की जीत पर पैसा लगाया और वह जीत गई तो आपको फायदे समेत रुपये मिल जाते हैं। वरना लगाए गए रुपये डूब जाते हैं।
इस तरह के ऑनलाइन गेमिंग एप पहले छोटी-छोटी रकम जीतने का मौका देते हैं। इससे जल्द ही ज्यादा से ज्यादा कमाने की लत लग जाती है। जीत-हार का रोमांच अलग से। लत लगने के बाद आप लगाते जाते हैं और हारते जाते हैं। इन दोनों मामलों में कुछ ऐसा ही हुआ।
तीन साल पहले गन हाउस मालिक का बेटा चला गया था जेल
इसी तरह ऑनलाइन सट्टेबाजी के खेल में एक बड़े गन हाउस मालिक का बेटा तीन साल पहले जेल चल गया था। उस समय गन हाउस मालिक के घर पर कुछ युवक चढ़ गए थे, जिसकी सूचना पर गई पुलिस ने जांच की तो पता चला कि गन हाउस मालिक के खाते से सात लाख रुपये निकाले जा चुके हैं और उन्हें पता ही नहीं था।
ढाई लाख रुपये बकाया होने की वजह से युवक घर पर पहुंचे थे। हालांकि इस मामले में पुलिस ने सख्ती से कार्रवाई की थी और पिता के गिड़गिड़ाने पर भी नहीं मानी थी। पुलिस ने इस मामले में गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार लोगों को जेल भेजा था। तब पुलिस का तर्क था कि अपराध में किसी को छोड़ा नहीं जा सकता है।
ध्यान दें, कहीं आपका लाडला भी तो नहीं बिगड़ रहा
आप भी अपने बच्चों पर ध्यान दें कि कहीं वह भी तो किसी ऑनलाइन गेम के चक्कर में तो नहीं पड़ रहा है। वरना, उसकी ऐसी ही कोई हरकत आपको आर्थिक चोट पहुंचाएगी। कानूनन आपका बच्चा साइबर अपराधी भी बन जाएगा।
इन बातों का दें ध्यान
- ऑनलाइन पढ़ाई को मोबाइल दिया है तो उसकी निगरानी करें
- अपने मोबाइल पर ध्यान दें कि बच्चे के पास मोबाइल होने पर वह आपके मोबाइल का इस्तेमाल क्यों कर रहा।
- अपने एटीएम और खातों और उनके पासवर्ड आदि की जानकारी को गोपनीय रखें।
- वह रुपये मांगे तो इसके बारे में जरूर पूछें कि उसे क्या जरूरत है, क्योंकि ऑनलाइन गेम की शुरुआत छोटी रकम से होती है।
- उसे समय-समय पर ऑनलाइन फ्राड और उसके दुष्परिणामों की जानकारी दें।