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सात समुंदर पार से पिता के अंतिम संस्कार में नहीं आ सका बेटा, तीन दिन तक दरवाजे पर पड़ा रहा शव

Fri, 12 Feb 2021 07:28 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया।
अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया। Published by: vivek shukla Updated Fri, 12 Feb 2021 07:28 PM IST
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Son could not fulfill duty of cremating father in deoria
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : pixabay

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां सात समुंदर पार डेनमार्क में नौकरी कर रहे इकलौते बेटे के इंतजार में पिता का पार्थिव शरीर दरवाजे पर तीन दिन तक पड़ा रहा। शुक्रवार को जब उसके आने की उम्मीद धूमिल हो गई, तो मृतक के छोटे भाई ने बेटे का फर्ज अदा किया।

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नौ फरवरी को मृत्यु की तिथि से तीन दिन बाद पूर्व सभासद राधेश्याम पांडेय को उनके छोटे भाई ने बरूथनी नदी के तट पर शुक्रवार को मुखाग्नि दी। मृतक के इकलौते बेटे के पिता के अंतिम संस्कार में आने की तमाम कोशिशों के बाद नहीं पहुंच पाने का सबको मलाल है। पूर्व सभासद का हृदय गति रुकने से बीते मंगलवार की रात निधन हो गया था। उनका बेटा विशाल पांडेय यूरोप के डेनमार्क में नौकरी कर रहा है।
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पिता के निधन की सूचना मिलते ही वह सात संमुदर पार डेनमार्क से अंतिम संस्कार में शामिल होने को चल दिया। डेनमार्क से भारत पहुंचने में हवाई जहाज की तीन जगहों पर को लैंडिग होती है। डेनमार्क से पहली को-लैंडिंग में विमान में सवार यात्रियों की लंदन एयरपोर्ट पर जांच हुई।
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कोरोना ने रोका रास्ता

यहां कोविड प्रोटोकॉल के तहत विशाल की आगे की यात्रा रोक दी गई। उसने एयरपोर्ट के अधिकारियों से आगे की उड़ान जारी रखने के लिए काफी प्रयास किया। लेकिन अधिकारियों ने उसकी एक न सुनी। उसे वापस लौटती प्लेन से डेनमार्क वापस कर दिया गया।

दुनिया के दूसरे छोर से विशाल का पिता के शरीर को मुखाग्नि देने का फर्ज निभाने का सपना अधूरा रह गया। कोविड के कारण उसे पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने से वंचित होना पड़ा। श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार का सोशल मीडिया के माध्यम से सजीव प्रशारण देख विशाल फफक कर रो पड़ा।

उसने उसके चाचा टुनटुन पांडेय ने कहा कि पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए वह बेताब था। उसके सफलता के पीछे उसके पिता का बहुत बड़ा योगदान है।
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