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Gorakhpur News: धूम्रपान से आंखों की रेटीना हो सकती है गंभीर बीमारी
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गोरखपुर। अमेरिका सहित अन्य देशों से आए विदेशी नेत्र चिकित्सकों ने रविवार को गुलरिहा स्थित एक रिजॉर्ट में गोरक्षआईकॉन में भारतीय नेत्र रोग विशेषज्ञों को कॉर्निया प्रत्यारोपण के अलावा चाइल्ड ग्लूकोमा, रेटीना संग अन्य विषयों पर जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि धूम्रपान से आंखों की रेटीना को गंभीर बीमारी लग सकती है।
पहले अंतरराष्ट्रीय सत्र में यूएसए के वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. नैंसी होलेंकैप, डॉ. पामेला को, सोनल डॉन्गा और डॉ. संदीप ग्रोवर ने भारतीय चिकित्सकों संग नई विधियों की जानकारियां साझा की और अपने अनुभव बताए। उन्होंने बताया कि आंखों की रेटीना की बीमारी एक तरफ सामान्य सी हो गई है। इनकी बीमारियां या संक्रमण कई प्रकार के होते हैं। इसमें रेटिनल डिटैचमेंट, रेटिनल टियर (रेटिना में दरार), डायबिटिक रेटिनोपैथी, एपिरेटिनल झिल्ली (रेटिना की सतह पर रेशेदार ऊतक की परत), मैक्युलर एडीमा (रेटिना में सूजन) और रेटिनल वेन ऑक्लूजन (नस का अवरुद्ध होना) शामिल है। ये बीमारियां समय से अगर उपचार क्रम में नहीं आई तो गंभीर भी हो सकती हैं। इसके अलावा आंखों के संक्रमण और उसके बचाव के साथ कितने तरह से संक्रमण और उसने बचाव के तरीकों पर अलग अलग चिकित्सकों ने अपनी राय भी रखी।
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दुआ लेयर पर भी हुई विस्तृत चर्चा, उपचार के तरीके बताए गए
गोरक्षआईकाॅन सम्मेलन में डॉ. हरमिंदर सिंह दुआ ने कॉर्निया की छठीं परत (दुआ लेयर) के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि कैसे किसी एक कॉर्निया से भी अब अधिकतम तीन मरीजों की आंखों में रोशनी फिर से वापस लौटाई जा सकती है। कॉर्निया की छठीं परत की खोज की है, जिसका नाम उनके नाम पर दुआ लेयर रखा गया है।
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बचाव
- हानिकारक यूवी किरणों से बचाव के लिए धूप का चश्मा पहनें।
- रेटिना के स्वास्थ्य के लिए विटामिन, ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर स्वस्थ आहार खाएं।
- नियमित रूप से व्यायाम करें।
- धूम्रपान से बचें और रक्तचाप व मधुमेह को नियंत्रित रखें।
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पहले अंतरराष्ट्रीय सत्र में यूएसए के वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. नैंसी होलेंकैप, डॉ. पामेला को, सोनल डॉन्गा और डॉ. संदीप ग्रोवर ने भारतीय चिकित्सकों संग नई विधियों की जानकारियां साझा की और अपने अनुभव बताए। उन्होंने बताया कि आंखों की रेटीना की बीमारी एक तरफ सामान्य सी हो गई है। इनकी बीमारियां या संक्रमण कई प्रकार के होते हैं। इसमें रेटिनल डिटैचमेंट, रेटिनल टियर (रेटिना में दरार), डायबिटिक रेटिनोपैथी, एपिरेटिनल झिल्ली (रेटिना की सतह पर रेशेदार ऊतक की परत), मैक्युलर एडीमा (रेटिना में सूजन) और रेटिनल वेन ऑक्लूजन (नस का अवरुद्ध होना) शामिल है। ये बीमारियां समय से अगर उपचार क्रम में नहीं आई तो गंभीर भी हो सकती हैं। इसके अलावा आंखों के संक्रमण और उसके बचाव के साथ कितने तरह से संक्रमण और उसने बचाव के तरीकों पर अलग अलग चिकित्सकों ने अपनी राय भी रखी।
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दुआ लेयर पर भी हुई विस्तृत चर्चा, उपचार के तरीके बताए गए
गोरक्षआईकाॅन सम्मेलन में डॉ. हरमिंदर सिंह दुआ ने कॉर्निया की छठीं परत (दुआ लेयर) के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि कैसे किसी एक कॉर्निया से भी अब अधिकतम तीन मरीजों की आंखों में रोशनी फिर से वापस लौटाई जा सकती है। कॉर्निया की छठीं परत की खोज की है, जिसका नाम उनके नाम पर दुआ लेयर रखा गया है।
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बचाव
- हानिकारक यूवी किरणों से बचाव के लिए धूप का चश्मा पहनें।
- रेटिना के स्वास्थ्य के लिए विटामिन, ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर स्वस्थ आहार खाएं।
- नियमित रूप से व्यायाम करें।
- धूम्रपान से बचें और रक्तचाप व मधुमेह को नियंत्रित रखें।