Gorakhpur News: साइलेंट किलर शुगर, पूरे शरीर पर डाल रहा असर, जानिए डॉक्टर क्या दे रहे हैं सलाह
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जन डॉ. सुमित ने बताया कि मधुमेह का असर शरीर के अलग-अलग अंगों पर हो रहा है। ज्यादा मधुमेह बढ़ने पर मेटाबोलिक में गड़बड़ी होना शुरू हो जाता है, जो उल्टी, पेट दर्द और सिर दर्द का बड़ा कारण होता है। कई बार हाई लेवल शुगर की वजह से मरीजों के मस्तिष्क पर असर पड़ता है और ब्रेन स्ट्रोक का भी खतरा बढ़ जाता है।
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मधुमेह (शुगर) शरीर पर साइलेंट किलर के तौर पर असर डाल रहा है। आंखों से लेकर हृदय, मस्तिष्क पर इसका असर साफ देखने को मिल रहा है। मधुमेह से हर साल 35 से 40 फीसदी लोग डायबिटिक रेटिनोपैथी का शिकार हो रहे हैं। इस बीमारी में आंख की पांच लेयर जल्दी सूख रही है। जिसे कोराॅइड कहते हैं। इसकी वजह से हर साल चार से पांच प्रतिशत मरीजों की आंखों की रोशनी जा रही है। कुछ ऐसा हाल शरीर के अन्य हिस्सों का भी है।
अनियंत्रित खानपान और बदल रही जीवन शैली की वजह से मधुमेह मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसकी वजह से लोगों का शरीर पर दुष्प्रभाव दिखना शुरू हो गया है। मधुमेह का असर सबसे अधिक मरीजों की आंखों पर पड़ रहा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि मधुमेह से पीड़ित मरीजों की आंखों की रोशनी जाने का खतरा सबसे अधिक है। शोध में भी यह जानकारी सामने आ चुकी है। बताया कि 166 मधुमेह के मरीजों पर शोध किया गया, तो पता चला कि रेटिना के पीछे कोराॅइड की पांच लेयर तेजी से सूख रही थी।
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इन पांच लेयर के सूखने से आगे हिस्से के पांच लेयर में रक्त का संचार नहीं हो रहा था। ऐसी स्थिति में उनकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे जा रही थी। इस दौरान जब इलाज शुरू किया तो रोशनी जाना कम हुआ। यह शोध इंडियन जनरल ऑफ ऑप्थोमोलॉजी में इसी साल प्रकाशित हुआ है। इस शोध से यह जानकारी मिली है कि अगर सही समय पर मरीजों की आंखों की जांच हो जाए तो रोशनी जाने का खतरा कम हो जाएगा। ऐसे हर साल में 35 से 40 फीसदी मामले हर साल सामने आ रहे हैं, जिनमें चार से पांच फीसदी मरीजों की आंखों की रोशनी भी जा रही है।
शरीर के अलग-अलग अंगों पर असर
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जन डॉ. सुमित ने बताया कि मधुमेह का असर शरीर के अलग-अलग अंगों पर हो रहा है। ज्यादा मधुमेह बढ़ने पर मेटाबोलिक में गड़बड़ी होना शुरू हो जाता है, जो उल्टी, पेट दर्द और सिर दर्द का बड़ा कारण होता है। कई बार हाई लेवल शुगर की वजह से मरीजों के मस्तिष्क पर असर पड़ता है और ब्रेन स्ट्रोक का भी खतरा बढ़ जाता है। यही स्थिति लो शुगर होने पर भी होती है। कई बार खून में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती और तो नसों का भी नुकसान पहुंचता है, जिसकी वजह से मरीजों के पैर में सुई चुभने और झनझनाहट की समस्या होती है। ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
हृदय की नसों को ज्यादा खराब कर रहा मधुमेह
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. कुनाल सिंह ने बताया कि मधुमेह से आंखों के बाद सबसे अधिक नुकसान ह्रदय को है। मधुमेह की वजह से हृदय की सभी नसें धीरे-धीरे खराब होनी शुरू हो जाती है। अगर स्थिति नियंत्रण में नहीं है तो हार्ट अटैक का खतरा सबसे अधिक है। ओपीडी की बात करें तो हर माह 30 से 35 फीसदी मरीज मधुमेह के आते हैं, जिन्हें ह्रदय रोग की समस्या है। मधुमेह पीड़ितों को हार्ट-अटैक अगर आता है तो बाईपास सर्जरी करनी पड़ती है।