Vinod Upadhyay: श्रीप्रकाश शुक्ला बनना चाहता था विनोद, गोरखपुर के इस कॉलेज में जुटती थी मंडली
विनोद ने सबसे पहले धर्मशाला में अपनी टीम बनाई। शुरुआती दौर में वह धमक बनाने के लिए मोहल्लों में मारपीट करता था। फिर जब टीम में लड़कों की संख्या बढ़ी तो वह कॉलेजों की तरफ जाने लगा। 1998-99 में उसने सेंट एंड्रयूज कॉलेज में आना-जाना शुरू किया।
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माफिया विनोद उपाध्याय अपराध की दुनिया में यूं ही नहीं कूदा, बल्कि उसे श्रीप्रकाश शुक्ला की तरह ही कुख्यात होने का शौक था। सेंट एंड्रयूज कॉलेज उसका मेन अड्डा था, जहां रोजाना उसकी मंडली जुटती थी। शहर के कई रंगबाज इसमें शामिल होते थे। धीरे-धीरे उसकी गतिविधियां गोरखपुर विश्वविद्यालय की ओर बढ़ने लगीं। इसी बीच ठेके की तरफ उसके कदम मुड़े तो अपराधियों से संगत भी बढ़ती गई।
विनोद ने सबसे पहले धर्मशाला में अपनी टीम बनाई। शुरुआती दौर में वह धमक बनाने के लिए मोहल्लों में मारपीट करता था। फिर जब टीम में लड़कों की संख्या बढ़ी तो वह कॉलेजों की तरफ जाने लगा। 1998-99 में उसने सेंट एंड्रयूज कॉलेज में आना-जाना शुरू किया। जानकारों की मानें तो सेंट एंड्रयूज कॉलेज में विनोद के एक करीबी से छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष रहे संजीव सिंह श्रीनेत के एक साथी की ठन गई। इसके बाद विनोद ने कॉलेज परिसर में बम फोड़कर दहशत बना दी थी।
कॉलेज के बाहर एक चाय की दुकान पर उसका अड्डा था, जहां उसके साथी इंतजार करते थे। विनोद पहले यामहा मोटरसाइकिल से चलता था। इस दौरान वह एक करीबी को जरूर साथ रखता था। विनोद की इस करीबी से दोस्ती भी सेंट एंड्रयूज कॉलेज में हुई थी। बाद में दोनों का नाम कई वारदातों में सामने आया। इसके बाद विनोद ने गोरखपुर विश्वविद्यालय की ओर रुख किया।
गोलघर चौराहे में फायरिंग कर पहली बार सुर्खियों में आया था विनोद
वर्ष 2002 में विनोद उपाध्याय ने छात्रसंघ चुनाव में एक छात्रनेता के नामांकन जुलूस में गोलघर में कई राउंड फायरिंग की थी। उसके साथ उसका पूरा गिरोह भी था। इस घटना से युवाओं में वह चर्चा का विषय बन गया। यहीं से गोलघर के व्यापारियों में उसने दहशत बनाने की कोशिश की।