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Gorakhpur News: छूट का बोर्ड लगाकर दवाएं बेचने वाली दुकानों की होगी जांच
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विभाग का शक, छूट की आड़ में बेची जा रही अधोमानक दवाएं
कोई भी कंपनी 30 से 40 प्रतिशत छूट नहीं देती
गोरखपुर। दवा की दुकानों पर 30 से 40 प्रतिशत तक छूट का बोर्ड लगाकर दवाएं बेचने को ड्रग विभाग ने गंभीरता से लिया है। विभाग ने ऐसी दुकानदारों की सूची बनाकर दवाओं की जांच करने का फैसला लिया है। ड्रग विभाग का मानना है कि छूट के नाम पर अधोमानक (नकली) दवाओं का कारोबार हो सकता है। क्योंकि बड़ी कंपनियां दवाओं में इतना मुनाफा नहीं देती है कि इतनी छूट दी जाए। ऐसे में कही न कही इसमें बड़ा खेल है।
जानकारी के मुताबिक, बेतियाहाता व कूड़ाघाट सहित कई स्थानों पर फुटकर दवाओं की अधिकांश दुकानों पर 30 से 40 प्रतिशत छूट के बोर्ड लगाए गए हैं। जिला अस्पताल की बात करें तो यहां दलाल घूमकर अपने सेटिंग वाले दवा की दुकानों पर मरीजों को ले जाते हैं। इसके अलावा एम्स के गेट पर कूड़ाघाट की दुकानों के दलाल भी घूमते रहते हैं। ये दलाल अधिक छूट पर दवाएं देने का झांसा देकर मरीजों को ऐसे दुकानों पर ले जाते हैं जहां दवाओं पर भारी-भरकम छूट देने का बोर्ड लगा रहता है।
विभाग ने आशंका जताई है कि इन दुकानों पर दवाओं के नाम पर खेल खेला जा रहा है। ऐसे में अच्छी कंपनियों की दवाएं इतने अधिक मार्जिन पर बेचा जाना संभव नहीं है। अधिकतम फुटकर दुकानदारों को 20 से 22 प्रतिशत ही लाभ मिलता है। ऐसी स्थिति में दुकानदार कही न कही मरीजों को अधोमानक दवाएं बेच रहे हैं।
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छूट के बोर्ड वाली दुकानों पर जांच कर दवाओं के सैंपल लिए जाएंगे। इन दवाओं की जांच कराई जाएगी। दुकानदारों को नोटिस भेजा जाएगा कि छूट का बोर्ड हटा लें। इसके बाद भी अगर नहीं हटाते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एजाज अहमद, सहायक आयुक्त औषधि
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वैध दवाओं के नाम पर 30 से 40 प्रतिशत छूट देना संभव नहीं है। ऐसी दवा की दुकानों की जांच करनी चाहिए जिससे की सही जानकारी हो सके। दवा अधोमानक होती हैं तो मरीजों पर इसका असर नहीं के बराबर है। इससे मरीजों को और भी दिक्कतें हो सकती हैं। दवा विक्रेता समिति विभाग के साथ है।
आलोक चौरसिया, महामंत्री, दवा विक्रेता समिति
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कोई भी कंपनी 30 से 40 प्रतिशत छूट नहीं देती
गोरखपुर। दवा की दुकानों पर 30 से 40 प्रतिशत तक छूट का बोर्ड लगाकर दवाएं बेचने को ड्रग विभाग ने गंभीरता से लिया है। विभाग ने ऐसी दुकानदारों की सूची बनाकर दवाओं की जांच करने का फैसला लिया है। ड्रग विभाग का मानना है कि छूट के नाम पर अधोमानक (नकली) दवाओं का कारोबार हो सकता है। क्योंकि बड़ी कंपनियां दवाओं में इतना मुनाफा नहीं देती है कि इतनी छूट दी जाए। ऐसे में कही न कही इसमें बड़ा खेल है।
जानकारी के मुताबिक, बेतियाहाता व कूड़ाघाट सहित कई स्थानों पर फुटकर दवाओं की अधिकांश दुकानों पर 30 से 40 प्रतिशत छूट के बोर्ड लगाए गए हैं। जिला अस्पताल की बात करें तो यहां दलाल घूमकर अपने सेटिंग वाले दवा की दुकानों पर मरीजों को ले जाते हैं। इसके अलावा एम्स के गेट पर कूड़ाघाट की दुकानों के दलाल भी घूमते रहते हैं। ये दलाल अधिक छूट पर दवाएं देने का झांसा देकर मरीजों को ऐसे दुकानों पर ले जाते हैं जहां दवाओं पर भारी-भरकम छूट देने का बोर्ड लगा रहता है।
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विभाग ने आशंका जताई है कि इन दुकानों पर दवाओं के नाम पर खेल खेला जा रहा है। ऐसे में अच्छी कंपनियों की दवाएं इतने अधिक मार्जिन पर बेचा जाना संभव नहीं है। अधिकतम फुटकर दुकानदारों को 20 से 22 प्रतिशत ही लाभ मिलता है। ऐसी स्थिति में दुकानदार कही न कही मरीजों को अधोमानक दवाएं बेच रहे हैं।
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छूट के बोर्ड वाली दुकानों पर जांच कर दवाओं के सैंपल लिए जाएंगे। इन दवाओं की जांच कराई जाएगी। दुकानदारों को नोटिस भेजा जाएगा कि छूट का बोर्ड हटा लें। इसके बाद भी अगर नहीं हटाते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एजाज अहमद, सहायक आयुक्त औषधि
वैध दवाओं के नाम पर 30 से 40 प्रतिशत छूट देना संभव नहीं है। ऐसी दवा की दुकानों की जांच करनी चाहिए जिससे की सही जानकारी हो सके। दवा अधोमानक होती हैं तो मरीजों पर इसका असर नहीं के बराबर है। इससे मरीजों को और भी दिक्कतें हो सकती हैं। दवा विक्रेता समिति विभाग के साथ है।
आलोक चौरसिया, महामंत्री, दवा विक्रेता समिति