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बस्ती: 14 घंटे ताउते तूफान से लड़े मंजर को यादकर शिवप्रसाद की छलकी आंखें, बोले- 'मौत से बचकर आया हूं'

Mon, 31 May 2021 06:30 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती।
अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती। Published by: vivek shukla Updated Mon, 31 May 2021 06:30 PM IST
सार

गांव वालों से अरब सागर में फंसने का मंजर बयां करते हुए कई बार छलकी आंखें

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Shivprasad Upadhyay came back after fighting against taute storm
शिवप्रसाद उपाध्याय का गांव में हुआ जोरदार स्वागत। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

‘ताउते’ तूफान से अरब सागर में 14 घंटे जिंदगी की लड़ाई लड़कर शिवप्रसाद सोमवार को गांव पहुंचे तो खूब खुशियां मनाई गईं। गांव वालों ने बैंडबाजे के साथ स्वागत किया। बस्ती जिले के बनकटी के खड़ौहा गांव निवासी शिव प्रसाद उपाध्याय भी परिवार और गांवों वालों को सामने देखकर अपने आंसू न रोक सके। कहा, जब तूफान में फंसा था, तब उम्मीद नहीं थी कि अपने गांव और अपनी जन्मभूमि को दोबारा देख पाऊंगा, लेकिन देवदूत बनकर आए नौसेना के जवानों ने उन्हें बचाकर दूसरी जिंदगी दी है।

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शिवप्रसाद ने बताया कि 20 फरवरी को ओएनजीसी कंपनी की ओर से उन्हें अरब सागर में बार्ज पी-305 पर पहुंचाया गया। उस जहाज में टूल मशीन ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे, जब 16 मई को तूफान जहाज से टकराया तो अंदर अफरा-तफरी का माहौल हो गया। हम सभी लोग शोर मचाने लगे। जहाज को अंदर से लॉक और सील कर दिया गया था। सभी लोग जल्दी-जल्दी लाइफ जैकेट पहनने लगे। 17 मई की सुबह पांच बजे जहाज का एक हिस्सा पानी में डूबने लगा और एक हिस्सा ऊपर की तरफ उठने लगा। जहाज में मौजूद सभी लोग ऊपर वाले हिस्से की तरफ भागने लगे, जहाज का आधा हिस्सा पानी में और आधा हिस्सा सीधा ऊपर उठ गया। जहाज के ऊपरी हिस्से को पकड़कर हम सभी लोग लगभग आधे घंटे तक लटके थे, जब हम सब अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पाए तो एक-एक कर सभी पानी में कूदने लगे।
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शिवप्रसाद बताते हैं कि लाइफ जैकेट के सहारे लगभग चौदह घंटे तक समुद्र में जिंदगी और मौत से लड़ते रहे। अपने कई साथियों को डूबता हुआ देख हिम्मत टूटने लगी थी। परिवार तथा भगवान को याद करने लगा। रात में शाम सात से रात आठ बजे के बीच आइएनएस कोच्चि से नौसेना के जवान पहुंचे और हेलीकॉप्टर की मदद से उन्हें रेस्क्यू किया गया। आईएनएस कोच्चि जहाज पर करीब दो घंटे तक बेहोश रहा। फिर 19 मई को इलाज के बाद नौसेना की ओर से मुझे कंपनी के हॉस्टल सुरक्षित पहुंचा दिया गया। शिवप्रसाद कहते हैं कि नौसेना के जवान मेरे लिए देवदूत बनकर आए।
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पिता को देख लिपट गए बच्चे

सोमवार को मुंबई से ट्रेन से शिवप्रसाद बस्ती रेलवे स्टेशन और फिर वहां निजी साधन से घर पहुंचे तो बेटी प्रीतांजलि, बेटा मृत्युंजय और युवराज उनसे लिपट गए। सभी का गला रुंधा था और आंखों से झर-झर आंसू बह रहे थे। पत्नी पुष्पावती की आंखों में आंसू थे, लेकिन चेहरे पर चमक थी, कि इतने बड़े तूफान को झलने के बाद भी उनके पति सुरक्षित हैं। परिवार और गांव के लोगों से मिलने के बाद वह गांव के मंदिर पर परिवार के साथ मत्था टेकने भी गए।

273 थे सवार, 66 की हुई थी मौत
शिवप्रसाद ने बताया कि बार्ज पी 305 जहाज पर कुल 273 लोग लोग सवार थे। तूफान में फंसने के बाद इसमें 66 की मौत हो चुकी है। बताते हैं कि जब वह समुद्र में गिरे तो लहरों के साथ बहने लगे। इस दौरान लहरें उन्हें 15 से 18 फीट तक उछाल रही थीं। बचाए जाने तक अपने जहाज से वह करीब 35 किलोमीटर तक समुद्र में बहते चले गए थे। उनके साथ करीब सौ लोग समुद्र में कूदे थे, जिनमें से कई लोग लापता हो गए थे। वह खुशकिस्मत रहे कि बच गए।

लाइफ जैकेट की लाइट ने बचाया
शिवप्रसाद बताते हैं कि समुद्री तूफान में फंसने पर उन्हें क्या करना होता है, इसके बारे में विस्तार से ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें लाइफ जैकेट का इस्तेमाल सबसे अहम होता है। इसके अलावा सीटी बजाने को भी कहा जाता है, ताकि उनकी आवाज को दूर तक सुुना जा सके। समुद्र में लहरों पर हिचकोले खाने के दौरान हिम्मत करके बीच-बीच में सीटी भी बजाते रहे, ताकि बचाव दल को उनका पता चल सके। शाम ढलने के बाद रात में जैकेट में लगी लाइट जली तो नौसेना के जवानों को उनके बारे में पता चला।

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