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सपा सरकार आई तो बहाल होगी पुरानी पेंशन : माता प्रसाद पांडेय
Fri, 08 May 2026 02:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 08 May 2026 02:41 AM IST
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गोरखपुर। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाएगी। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव शिक्षकों के साथ हैं। शिक्षकों की सभी समस्याएं दूर होंगी।
नेता प्रतिपक्ष बृहस्पतिवार को सिविल लाइंस स्थित निजी अतिथि भवन में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट के 63वें प्रदेशीय वार्षिक महाधिवेशन को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश सरकार को घेरते हुए कहा कि शिक्षामित्रों के वेतन वृद्धि का श्रेय भाजपा सरकार ले रही है, जबकि यह कोर्ट के आदेश पर दिया जा रहा है।
शिक्षकों के समक्ष बढ़ती चुनौतियों और समाधान के विषय पर उन्होंने कहा कि शिक्षकों के सामने काफी चुनौतियां हैं। उनका समाधान करने के बजाय सरकार शिक्षकों का उत्पीड़न कर रही है। अध्यापक को स्वतंत्र नहीं रहने दिया जा रहा है। शिक्षकों से जनगणना कराया जा रहा है, जबकि माध्यमिक शिक्षा के एक्ट में कहीं भी नहीं लिखा है कि शिक्षक जनगणना कराए।
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उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के 41,000 प्राथमिक विद्यालयों में अब तक एक भी एडमिशन इस सत्र में नहीं हुआ है। वर्तमान सत्ता शिक्षकों के बारे में नहीं सोच रही है। जिस देश की शिक्षा व्यवस्था बिगड़ जाती है वह देश गुलाम हो जाता है। आज अध्यापक भयभीत है। भयभीत शिक्षक न तो अपने लिए लड़ सकता है और न ही अपनी अस्मिता बचा सकता है।
इस अवसर पर सम्मेलन संयोजक हीरालाल प्रसाद गौड़, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जयप्रकाश नायक, प्रो. चितरंजन मिश्र, पूर्व कुलपति प्रो. रजनीकांत पांडेय, प्रो. एसपी त्रिपाठी, श्रीनिवास शुक्ल व अरविंद त्रिपाठी व अन्य शिक्षक मौजूद रहे।
प्रमुख मांगें
- पुरानी पेंशन बहाल की जाए।
- कैशलेस व्यवस्था लागू की जाए।
- सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का राजकीयकरण किया जाए।
- शिक्षकों की सेवा सुरक्षा बहाल की जाए।
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नेता प्रतिपक्ष बृहस्पतिवार को सिविल लाइंस स्थित निजी अतिथि भवन में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट के 63वें प्रदेशीय वार्षिक महाधिवेशन को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश सरकार को घेरते हुए कहा कि शिक्षामित्रों के वेतन वृद्धि का श्रेय भाजपा सरकार ले रही है, जबकि यह कोर्ट के आदेश पर दिया जा रहा है।
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शिक्षकों के समक्ष बढ़ती चुनौतियों और समाधान के विषय पर उन्होंने कहा कि शिक्षकों के सामने काफी चुनौतियां हैं। उनका समाधान करने के बजाय सरकार शिक्षकों का उत्पीड़न कर रही है। अध्यापक को स्वतंत्र नहीं रहने दिया जा रहा है। शिक्षकों से जनगणना कराया जा रहा है, जबकि माध्यमिक शिक्षा के एक्ट में कहीं भी नहीं लिखा है कि शिक्षक जनगणना कराए।
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उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के 41,000 प्राथमिक विद्यालयों में अब तक एक भी एडमिशन इस सत्र में नहीं हुआ है। वर्तमान सत्ता शिक्षकों के बारे में नहीं सोच रही है। जिस देश की शिक्षा व्यवस्था बिगड़ जाती है वह देश गुलाम हो जाता है। आज अध्यापक भयभीत है। भयभीत शिक्षक न तो अपने लिए लड़ सकता है और न ही अपनी अस्मिता बचा सकता है।
इस अवसर पर सम्मेलन संयोजक हीरालाल प्रसाद गौड़, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जयप्रकाश नायक, प्रो. चितरंजन मिश्र, पूर्व कुलपति प्रो. रजनीकांत पांडेय, प्रो. एसपी त्रिपाठी, श्रीनिवास शुक्ल व अरविंद त्रिपाठी व अन्य शिक्षक मौजूद रहे।
प्रमुख मांगें
- पुरानी पेंशन बहाल की जाए।
- कैशलेस व्यवस्था लागू की जाए।
- सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का राजकीयकरण किया जाए।
- शिक्षकों की सेवा सुरक्षा बहाल की जाए।