{"_id":"61446ed054fb530bbe1fff7e","slug":"shani-pradosh-2021-date-pradosh-vrat-importance-and-puja-vidhi","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shani Pradosh 2021: शनि प्रदोष व्रत आज, जानिए कैसे मिलेगी श्रद्धालुओं को महादेव के साथ शनिदेव की कृपा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shani Pradosh 2021: शनि प्रदोष व्रत आज, जानिए कैसे मिलेगी श्रद्धालुओं को महादेव के साथ शनिदेव की कृपा
Sat, 18 Sep 2021 01:55 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 18 Sep 2021 01:55 AM IST
सार
इस बार प्रदोष व्रत शनिवार को है इसलिए इसे शनि प्रदोष कहा जाएगा।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी 18 सितंबर शनिवार यानी आज है। श्रद्धालु आज प्रदोष व्रत रखेंगे। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस बार प्रदोष व्रत शनिवार को है इसलिए इसे शनि प्रदोष कहा जाएगा। इस व्रत को करने वाले श्रद्धालुओं को शिवजी के साथ शनिदेव की भी कृपा प्राप्त होती है।
प्रदोष का व्रत महत्व
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के बाद ही की जाती है। इस दिन अगर शिवजी और मां पार्वती की पूजा की जाए तो व्यक्ति पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ ही भक्तों के जीवन से कष्टों का निवारण भी होता है। जो प्रदोष व्रत शनिवार को पड़ता है उसके अनुष्ठान से शनि के कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही साढ़ेसाती और ढैय्या में भी लाभ की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि अगर शनि प्रदोष व्रत किया जाए तो निसंतान दंपतियों को संतान सुख मिलता है।
ऐसे करें पूजा
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, शनि प्रदोष के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान के बाद भगवान शिव का ध्यान करें। उनके मंत्रों का जप करें। सुबह भगवान शिव को बेलपत्र, गंगाजल, अक्षत, धूप, दीप अर्पित करें। शनि प्रदोष व्रत का संकल्प लें और दिन भर व्रत रखें। संध्या के समय जब सूर्य अस्त हो और रात्रि का आगमन हो, उस समय विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदोष का व्रत महत्व
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के बाद ही की जाती है। इस दिन अगर शिवजी और मां पार्वती की पूजा की जाए तो व्यक्ति पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ ही भक्तों के जीवन से कष्टों का निवारण भी होता है। जो प्रदोष व्रत शनिवार को पड़ता है उसके अनुष्ठान से शनि के कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही साढ़ेसाती और ढैय्या में भी लाभ की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि अगर शनि प्रदोष व्रत किया जाए तो निसंतान दंपतियों को संतान सुख मिलता है।
विज्ञापन
ऐसे करें पूजा
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, शनि प्रदोष के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान के बाद भगवान शिव का ध्यान करें। उनके मंत्रों का जप करें। सुबह भगवान शिव को बेलपत्र, गंगाजल, अक्षत, धूप, दीप अर्पित करें। शनि प्रदोष व्रत का संकल्प लें और दिन भर व्रत रखें। संध्या के समय जब सूर्य अस्त हो और रात्रि का आगमन हो, उस समय विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करें।
विज्ञापन