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Gorakhpur News: शोध कार्य की गुणवत्ता को मजबूत आधार देती है पुस्तक समीक्षा
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डीडीयू में आयोजित हो रहा सात दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम
गोरखपुर। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज के डॉ. सुमित सौरभ श्रीवास्तव ने ''''रिसर्च में बुक रिव्यू की भूमिका'''' विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि पुस्तक समीक्षा शोध कार्य की गुणवत्ता को मजबूत आधार प्रदान करती है। यह शोधार्थियों को विषय की गहराई समझने में सहायता करती है।
वह बुधवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में यूजीसी-मालवीय मिशन टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर (एमएमटीटीसी) एवं व्यवसाय प्रशासन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे सात दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे।
द्वितीय सत्र में आईआईटी दिल्ली के डॉ. विवेक मिश्रा ने ''''पोस्ट राइटिंग स्ट्रगल्स, रिजेक्शन एवं रिवीजन'''' विषय पर कहा कि अस्वीकृति और संशोधन शोध प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा हैं और इन्हें असफलता नहीं, बल्कि सुधार और प्रगति का संकेत माना जाना चाहिए। तृतीय सत्र में एचबीटीयू कानपुर की प्रो. प्रियंका गुप्ता ने ''''केस स्टडी एज ए टीचिंग टूल'''' विषय पर व्यावहारिक एवं शोध-आधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
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उन्होंने केस स्टडी के शिक्षण में महत्व के साथ-साथ न्यूरल कपलिंग, डोपामाइन रिलीज, मिरर न्यूरॉन एक्टिविटी और कॉर्टेक्स एक्टिवेशन जैसी वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाया। चतुर्थ एवं अंतिम सत्र में सीएसएमयू, नवी मुंबई के प्रो. भावेश कुमार ने ''''टॉप क्वार्टाइल जर्नल्स हेतु रिसर्च पेपर लेखन'''' विषय पर मार्गदर्शन दिया।
डॉ. मोहम्मद अरफान ने आभार व्यक्त किया। यह कार्यक्रम विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में हुआ, जबकि संचालन डॉ. कृतिका श्रीवास्तव ने किया।
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गोरखपुर। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज के डॉ. सुमित सौरभ श्रीवास्तव ने ''''रिसर्च में बुक रिव्यू की भूमिका'''' विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि पुस्तक समीक्षा शोध कार्य की गुणवत्ता को मजबूत आधार प्रदान करती है। यह शोधार्थियों को विषय की गहराई समझने में सहायता करती है।
वह बुधवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में यूजीसी-मालवीय मिशन टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर (एमएमटीटीसी) एवं व्यवसाय प्रशासन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे सात दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे।
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द्वितीय सत्र में आईआईटी दिल्ली के डॉ. विवेक मिश्रा ने ''''पोस्ट राइटिंग स्ट्रगल्स, रिजेक्शन एवं रिवीजन'''' विषय पर कहा कि अस्वीकृति और संशोधन शोध प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा हैं और इन्हें असफलता नहीं, बल्कि सुधार और प्रगति का संकेत माना जाना चाहिए। तृतीय सत्र में एचबीटीयू कानपुर की प्रो. प्रियंका गुप्ता ने ''''केस स्टडी एज ए टीचिंग टूल'''' विषय पर व्यावहारिक एवं शोध-आधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
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उन्होंने केस स्टडी के शिक्षण में महत्व के साथ-साथ न्यूरल कपलिंग, डोपामाइन रिलीज, मिरर न्यूरॉन एक्टिविटी और कॉर्टेक्स एक्टिवेशन जैसी वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाया। चतुर्थ एवं अंतिम सत्र में सीएसएमयू, नवी मुंबई के प्रो. भावेश कुमार ने ''''टॉप क्वार्टाइल जर्नल्स हेतु रिसर्च पेपर लेखन'''' विषय पर मार्गदर्शन दिया।
डॉ. मोहम्मद अरफान ने आभार व्यक्त किया। यह कार्यक्रम विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में हुआ, जबकि संचालन डॉ. कृतिका श्रीवास्तव ने किया।