फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Separated from mother in childhood...now if you go to the forest, you will become a victim.

Gorakhpur News: बचपन में मां से बिछड़े...अब जंगल में गए तो हो जाएंगे शिकार

Wed, 11 Sep 2024 12:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Wed, 11 Sep 2024 12:48 AM IST
विज्ञापन
Separated from mother in childhood...now if you go to the forest, you will become a victim.
चिड़ियाघर में हैं तीन तेंदुए, जिन्हें नहीं आता शिकार और बचाव का तरीका
विज्ञापन

रेस्क्यू सेंटर में तीनों बचपन में ही आ गए थे

संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। वन्यजीव खासकर तेंदुए जन्म के बाद मां के साथ जंगल में रहकर बचाव और शिकार के तरीके सीखते हैं। मां अपने बच्चों को दो से तीन साल तक प्रशिक्षण देती है। अगर वे बचपन में ही मां से बिछड़ जाएं तो उनकी जान को खतरा हो सकता है, क्योंकि उन्हें बचाव का तरीका भी पता नहीं होता। चिड़ियाघर में तीन ऐसे तेंदुए हैं, जो बचपन में ही बिछड़ गए थे। अब इन्हें यहां रखा गया है। इनकी देखभाल कर रहे डॉक्टर का कहना है कि यदि इन्हें जंगल में छोड़ा गया तो जंगली जानवर इनका शिकार कर लेंगे।
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान के रेस्क्यू सेंटर में रखे गए तीनों तेंदुए बचपन में ही अपनी मां से बिछड़ गए थे। इनको रेस्क्यू कर चिड़ियाघर में लाया गया। इलाज के बाद ये पूरी तरह स्वस्थ हैं और मस्ती कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद इनको जंगल में नहीं छोड़ा जा सकता। मेरठ और बिजनौर से आए तेंदुए के शावकों को सीएम योगी आदित्यनाथ ने चंडी और भवानी नाम दिया था। सफेद बाघिन गीता को बाड़े में छोड़ने पहुंचे सीएम ने अपने हाथों से तेंदुए के शावक को दूध पिलाया था।
विज्ञापन

मेरठ से आई थी चंडी
अप्रैल 2022 में मेरठ के जंगल में तीन हफ्ते का तेंदुए का बच्चा मिला था। इसकी मां इसे जंगल में छोड़ गई थी। वहां से इसे रेस्क्यू कर गोरखपुर चिड़ियाघर लाया गया। मादा तेंदुए को चंडी नाम दिया गया। यहां आने के बाद इसकी देखभाल की गई। दिनभर में यह चार से पांच किलो मीट खाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

एक हफ्ते के शावक को छोड़ गई थी मां
बिजनौर के जंगल में जून 2022 में एक हफ्ते का तेंदुआ मिला था। मां उसे छोड़कर चली गई थी। दो दिन तक वह लेने नहीं आई तो उसे रेस्क्यू कर गोरखपुर चिड़ियाघर लाया गया। यहां उसकी देखभाल बच्चे की तरह की गई।
शिकारियों से बचकर आई थी मिनी
दिसंबर 2021 में सोहगीबरवा के चौक रेंज में शिकारियों के लगाए फंदे में आठ महीने के शावक का पैर फंस गया था। चिड़ियाघर लाकर उसका इलाज किया गया। उम्र कम होने की वजह से उसे जंगल में नहीं छोड़ा गया। चिड़ियाघर में उसे मिनी के नाम से पुकारा जाता है।
मां के साथ सीखते हैं जंगल में रहने के तरीके
चिड़ियाघर के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि तीनों तेंदुओं को शिकार करना नहीं आता। मां के साथ रहकर ये बचाव और शिकार करना सीखते हैं। इनको जंगल में रहने के तौर-तरीकों के बारे में पता चलता है, लेकिन बहुत छोटी उम्र में बिछड़ने की वजह से यह नहीं सीख पाए। करीब दो से ढाई साल के बाद ही ये अपने दम पर शिकार करने के काबिल होते हैं। चिड़ियाघर में इनको भरपेट भोजन दिया जाता है। टहलने के लिए क्रॉल और मस्ती के लिए तालाब है, लेकिन यहां पर इनको शिकार करना नहीं सिखाया जाता। यदि जंगल में छोड़ा गया तो ये अपने भोजन की व्यवस्था नहीं कर पाएंगे और कोई जंगली जानवर इनको अपना शिकार बना लेगा।

वन्यजीव के बच्चों को न छुएं
डॉ. योगेश ने बताया कि कई बार शावकों की मां बच्चे को जंगल में किसी स्थान पर छोड़कर शिकार के लिए जाती है। इस दौरान यदि किसी इंसान ने उस शावक को छू लिया तो वह उसे नहीं अपनाती। उसको लगता है कि इंसान के यहां पहुंचने से उसके दूसरे बच्चों को खतरा हो सकता है। यदि इंसान उसे न छुए तो मां बच्चे को अपने साथ लेकर चली जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed