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Gorakhpur News: सेंसरयुक्त उपकरण बताएगा खेत के किस हिस्से में है खाद-दवा की जरूरत

Tue, 30 Jan 2024 04:19 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jan 2024 04:19 AM IST
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Sensored equipment will tell which part of the field requires fertilizers and medicines.
डीडीयू के कृषि एवं प्राकृतिक संस्थान के दो शिक्षकों ने शोध को कराया पेटेंट
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इसके इस्तेमाल से किसान के पैसे की बचत होगी और उर्वरा शक्ति को नुकसान नहीं होगा
राम मनोहर त्रिपाठी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. निखिल रघुवंशी और डॉ. मोनालिसा साहू ने इंटरनेक्ट ऑफ थिंग्स पर आधारित एक ऐसा सेंसरयुक्त उपकरण बनाया है, जिसकी मदद से यह पता चल जाएगा कि खेत के किस हिस्से में खाद और दवा की जरूरत है। किसान के पास पूरा ब्योरा उसके मोबाइल पर आ जाएगा। इस तकनीक से जहां जरूरत के हिसाब से ही खाद का इस्तेमाल होगा, वहीं ज्यादा खाद व दवाओं से उर्वरा शक्ति को नुकसान नहीं पहुंचेगा। इस तकनीक को भारत सरकार द्वारा पेटेंट भी करा लिया गया है।
यह तकनीक खेती किसानी के लिए बेहद उपयुक्त मानी जा रही है। इससे खेती की लागत भी कम हो जाएगी और खेत में नाइट्रोजन, फास्फोरस, जिंक आदि की मात्रा भी मानक के अनुरूप बनी रहेगी। डॉ निखिल के मुताबिक, सेंसरयुक्त उपकरण खेत का पूरा डेटा लेकर एकत्र करेगा। उपकरण से किसान के मोबाइल को जीपीएस से जोड़ा गया है, ताकि सूचनाएं किसान के मोबाइल तक पहुंचती रहे।
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उन्होंने बताया कि आईओटी पर केंद्रित यह उपकरण तापमान, नमी, आर्द्रता और अन्य प्रकार के जीव संवेदकों की जानकारी लाइव मॉनिटरिंग को ध्यान में रख कर देता है। किसान इस प्रणाली का उपयोग करके खेत पर स्मार्ट खेती को आसानी से कर सकते हैं। यह विकसित तकनीक वातावरणीय रूप से अजान उत्पादन के दर को बढ़ाने में मदद करेगी और मृदा गुणवत्ता को बनाए रखने में लाभकारी सिद्ध होगी। संवाद
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ऐसे काम करेगा उपकरण

डॉ. निखिल ने बताया कि सेंसरयुक्त उपकरण को खेत के चारों कोने पर लगाकर उसको मोबाइल या कंप्यूटर से जोड़ा जाएगा। यह सेंसर छोटे से लगायत 10 एकड़ तक की खेती में उपयोग किया जा सकता है। इससे खेत के किस हिस्से में नमी और उर्वरा की कमी या अन्य खनिज की कमी है, इसकी जानकारी मोबाइल पर मिल जाएगी। जानकारी मिलने के बाद किसान खेत के निर्धारित एरिया में उस खनिज या उर्वरा व दवा का छिड़काव कर फसल की उपज को बढ़ा सकते हैं। उपकरण को भारत सरकार से पेटेंट करा लिया गया है। इसकी लागत 30 से 35 हजार रुपये है।
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