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डीडीयू : 114 शोधकर्ताओं को मिलेगा अनुसंधान उत्कृष्टता पुरस्कार
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- जर्नल्स में प्रकाशन, पेटेंट, प्रकाशित पुस्तकें और प्रोजेक्ट्स के आधार पर होगा चयन
- 22 फरवरी को होगा समारोह का आयोजन
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में अनुसंधान उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “अनुसंधान उत्कृष्टता पुरस्कार” का वितरण 22 फरवरी को अपराह्न तीन बजे विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में किया जाएगा। इस वर्ष कुल 114 शोधकर्ताओं को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा।
ये पुरस्कार मुख्य रूप से स्कोपस या वेब ऑफ साइंस में सूचीबद्ध अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित शोधपत्रों के मूल्यांकन पर आधारित हैं, जिन्हें क्वारटाइल रैंकिंग (क्यू1-क्यू4) के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है। पुरस्कार पांच श्रेणियों प्लेटिनम, डायमंड, गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज में दिए जाएंगे। प्लेटिनम (क्यू 1) श्रेणी के अंतर्गत 11,000 रुपये, डायमंड (क्यू 2) में 7,000 रुपये, गोल्ड (क्यू 3) में 5,000 रुपये और सिल्वर (क्यू 4) में 3,000 रुपये प्रति प्रकाशन की नकद राशि प्रथम या संबंधित लेखक को प्रदान की जाएगी, बशर्ते उनकी संबद्धता विश्वविद्यालय से हो।
ब्रॉन्ज श्रेणी में प्रशंसा पत्र दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, संकाय सदस्यों की समग्र शोध उपलब्धियों जर्नल प्रकाशन, पेटेंट, प्रकाशित पुस्तकें और स्वीकृत परियोजनाओं के आधार पर “उत्कृष्ट शोधकर्ता पुरस्कार” भी प्रदान किया जाएगा, जिसमें 21,000 रुपये की नकद राशि एवं विशेष प्रमाणपत्र शामिल है।
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शोध एवं विकास प्रकोष्ठ की ओर से एक जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक की उपलब्धियों के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की गई थीं, जिनकी विशेषज्ञ समिति जांच कर चुकी है। इस पुरस्कार की शुरुआत विश्वविद्यालय के हीरक जयंती वर्ष में की गई थी। पिछले वर्ष विभिन्न विभागों के 66 शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया था। कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि यह पहल विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति को नई ऊर्जा देगी और उसकी वैश्विक प्रतिष्ठा एवं रैंकिंग में वृद्धि करेगी।
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- 22 फरवरी को होगा समारोह का आयोजन
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में अनुसंधान उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “अनुसंधान उत्कृष्टता पुरस्कार” का वितरण 22 फरवरी को अपराह्न तीन बजे विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में किया जाएगा। इस वर्ष कुल 114 शोधकर्ताओं को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा।
ये पुरस्कार मुख्य रूप से स्कोपस या वेब ऑफ साइंस में सूचीबद्ध अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित शोधपत्रों के मूल्यांकन पर आधारित हैं, जिन्हें क्वारटाइल रैंकिंग (क्यू1-क्यू4) के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है। पुरस्कार पांच श्रेणियों प्लेटिनम, डायमंड, गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज में दिए जाएंगे। प्लेटिनम (क्यू 1) श्रेणी के अंतर्गत 11,000 रुपये, डायमंड (क्यू 2) में 7,000 रुपये, गोल्ड (क्यू 3) में 5,000 रुपये और सिल्वर (क्यू 4) में 3,000 रुपये प्रति प्रकाशन की नकद राशि प्रथम या संबंधित लेखक को प्रदान की जाएगी, बशर्ते उनकी संबद्धता विश्वविद्यालय से हो।
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ब्रॉन्ज श्रेणी में प्रशंसा पत्र दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, संकाय सदस्यों की समग्र शोध उपलब्धियों जर्नल प्रकाशन, पेटेंट, प्रकाशित पुस्तकें और स्वीकृत परियोजनाओं के आधार पर “उत्कृष्ट शोधकर्ता पुरस्कार” भी प्रदान किया जाएगा, जिसमें 21,000 रुपये की नकद राशि एवं विशेष प्रमाणपत्र शामिल है।
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शोध एवं विकास प्रकोष्ठ की ओर से एक जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक की उपलब्धियों के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की गई थीं, जिनकी विशेषज्ञ समिति जांच कर चुकी है। इस पुरस्कार की शुरुआत विश्वविद्यालय के हीरक जयंती वर्ष में की गई थी। पिछले वर्ष विभिन्न विभागों के 66 शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया था। कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि यह पहल विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति को नई ऊर्जा देगी और उसकी वैश्विक प्रतिष्ठा एवं रैंकिंग में वृद्धि करेगी।