सी-प्लेन : गोवा-गुजरात जाएंगे जीडीए के अधिकारी... तकनीकी विशेषज्ञों से करेंगे रायशुमारी
रामगढ़ताल को पर्यटकों के लिहाज से विकसित किया जा रहा है। यहां पर वाटर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स बनाया जा चुका है। फाइव स्टार होटल, फूड पार्क, ताल बाजार सहित अन्य परियोजनाएं चल रही हैं। विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर बनाने की योजना पर भी अधिकारी काम रहे हैं।
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गोरखपुर में रामगढ़ताल में सी-प्लेन की योजना को लेकर जीडीए ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। जीडीए की ओर से पूर्व में तैयार प्लान की फाइलें खंगाली जा रही हैं। जल्द ही जीडीए के अधिकारी केंद्र सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय से संपर्क साधेंगे।
परियोजना को तैयार करने के लिए टीम गुजरात में सी-प्लेन का संचालन कर चुकी फर्म से संपर्क करेगी। साथ ही गोवा की एक फर्म से भी वाटर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स की गतिविधियां शुरू करने के लिए मुलाकात करेगी। जीडीए अधिकारियों का कहना है कि सी-प्लेन के संचालन के संबंध में तैयारी चल रही है।
रामगढ़ताल को पर्यटकों के लिहाज से विकसित किया जा रहा है। यहां पर वाटर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स बनाया जा चुका है। फाइव स्टार होटल, फूड पार्क, ताल बाजार सहित अन्य परियोजनाएं चल रही हैं। विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर बनाने की योजना पर भी अधिकारी काम रहे हैं। इसी के साथ ही सी-प्लेन चलाने की तैयारी शुरू हो गई है।
एक साल पूर्व केंद्र सरकार ने उड़ान योजना के तहत सौ सी-प्लेन चलाने की घोषणा की थी। इसमें गोरखपुर के रामगढ़ताल से सी-प्लेन चलाने की योजना भी बनी, लेकिन इस पर अमल नहीं हो सका। मंगलवार को गोरखपुर में सीएम योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों संग बैठक के दौरान रामगढ़ताल में सी-प्लेन उतारने के लिए जीडीए उपाध्यक्ष को प्रस्ताव तैयार करने को कहा। इसके बाद से इस पर मंथन शुरू हो गया है।
पूर्व में हुआ है मंत्रालय से पत्राचार, दिल्ली जाएंगे अधिकारी
करीब एक साल पूर्व गोरखपुर से वाराणसी तक सी-प्लेन चलाने की घोषणा हुई थी। इसके बाद इस संबंध में जीडीए की ओर से पूर्व में नागरिक उड्डयन मंत्रालय से पत्राचार किया गया था। तब यह कहा गया कि केंद्र सरकार की उड़ान योजना के पहले चरण में स्पाइसजेट को 18 जगहों पर सी-प्लेन चलाने की अनुमति मिली है। गोरखपुर से वाराणसी के बीच विमानन कंपनी स्पाइसजेट ने सी प्लेन चलने की हामी भरी थी। अब इसमें आगे की कार्रवाई के लिए अधिकारी दिल्ली जाएंगे।
सी-प्लेन के लिए होगी यह व्यवस्था
- सी-प्लेन के उड़ने और उतरने के लिए पानी में अलग से हवाई अड्डा बनेगा।
- जानकारों के अनुसार इसकी लंबाई 1160 मीटर और चौड़ाई 120 मीटर रखी जाएगी।
- जहां हवाई अड्डा बनेगा वहां पर पानी की गहराई कम से कम तीन मीटर होनी चाहिए। जबकि किनारे की ओर करीब 1.8 एकड़ जमीन जरूरी है।
- ताल में जिस तरफ इतनी भूमि होगी, उस तरफ हवाई अड्डा बनाया जाएगा।
- ताल में पूर्व से चल रही गतिविधियों के कारण सी-प्लेन के संचालन में कोई दिक्कत न आए, इसके लिए उचित जगह तलाशी जाएगी।
- नागर विमानन महानिदेशालय से अनुमति ली जाएगी।
- एयरफोर्स सहित अन्य विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र सहित अन्य प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। सभी विभागों से क्लीयरेंस मिलने के बाद इसमें तेजी आएगी।