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एसडीएम की यूजर आईडी हैक कर सत्यापन में खेल, ऐसे हुआ फर्जीवाड़ा का खुलासा

Thu, 14 Jan 2021 12:20 PM IST
vivek shukla एहतेशाम उद्दीन अहमद, सिद्धार्थनगर।
एहतेशाम उद्दीन अहमद, सिद्धार्थनगर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 14 Jan 2021 12:20 PM IST
सार

  • एसडीएम डुमरियागंज के आदेश पर भूलेख ऑपरेटर सहित तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज
  • भूमिहीन किसानों की सैकड़ों बीघा जमीन दिखा कर खाद्यान्न खरीद में करते थे फर्जीवाड़ा

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SDM User ID Hacked in siddharthnagar
किसान। (सांकेतिक फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

किसानों की पैदावार सस्ते में खरीद कर मंडी में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए दलाल ने भूमिहीन किसानों के नाम सैकड़ों बीघे जमीन की खतौनी बनवाने का खेल किया। इस खेल में एसडीएम डुमरियागंज कार्यालय में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर भी शामिल था।

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कंप्यूटर ऑपरेटर ने एसडीएम की आईडी पासवर्ड हैक कर दलाल के माध्यम से लाई गई किसानों की फर्जी खतौनी और दस्तावेज का सत्यापन कर डाला। इन सत्यापित दस्तावेज के आधार पर मंडी में उपज बेची गई। फर्जीवाड़ा पकड़ में आने पर एसडीएम त्रिलोकचंद ने कंप्यूटर ऑपरेटर सहित तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
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हाल ही में एसडीएम डुमरियागंज को शिकायतें मिलीं कि जिन किसानों के पास जमीन नहीं है उनके नाम से मंडी समितियों में सैकड़ों क्विंटल धान कब बिक्री की गई। उनके खातों में धान खरीद का आठ लाख से 18 लाख रुपयों तक का भुगतान किया गया।
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इस पर उन्होंने जांच की। जांच में कई भूमिहीन या बहुत ही कम भूमि वाले किसानों के नाम सैकड़ों बीघा भूमि की खतौनी बनी होने की बात सामने आई। खास बात यह थी कि इन किसानों की खतौनी का सत्यापन एसडीएम डुमरियागंज द्वारा ही किया गया था। गहन जांच में सामने आया कि तहसील डुमरियागंज में तैनात भूलेख ऑपरेटर अमित तिवारी ने एसडीएम की आईडी और पासवर्ड हैक कर यह खेल किया।
 

मिलीभगत से किया गया खेल

यह भी सामने आया कि इस तरह के सभी फर्जी आवेदन सहज जन सेवा केंद्र चलाने वाले मन्नीजोत निवासी विकास के यहां से ऑनलाइन किए गए थे। विकास ने बताया कि भरवटिया बाजार निवासी रमेश कुमार गुप्ता उनके पास किसानों की खतौनी और बैंक पास बुक लाते थे। वह ऑनलाइन आवेदन करता था। रमेश कुमार गुप्ता कई एफसीआई सेंटरों के केंद्र प्रभारी हैं। उन्हें एफसीआई केंद्रों पर खाद्यान्न खरीद- फरोख्त की खूबी व खामियों की जानकारी है।

एसडीएम त्रिलोकचंद के अनुसार तीनों की मिलीभगत से खेल किया गया। विकास का कहना है कि उसे फर्जीवाड़े की जानकारी नहीं है। रमेश गुप्ता जो आवेदन लाते थे वह उन्हें ऑनलाइन अप्लाई करता था। इन फर्जी दस्तावेजों का सत्यापन कैसे होता था उसे नहीं मालूम।

रमेश गुप्ता का कहना है कि वह जो भी आवेदन कराते थे विकास ही उनका सत्यापन कराकर उन्हें देता था। सत्यापन एसडीएम की आईडी से किया गया। एसडीएम के आदेश पर रजिस्ट्रार कानूनगो भूलेख तहसील डुमरियागंज सतीशचंद्र ने तीनों के खिलाफ डुमरियागंज थाने में धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कराया है। एसएचओ डुमरियागंज कृष्णदेव सिंह ने बताया कि जांच- पड़ताल की जा रही है।  

ऐसे होता था खेल
दलाल पहले तो किसानों से औने-पौने दाम पर उनकी उपज खरीदते थे। इस उपज को मंडी समिति या केंद्र पर बेचने के लिए ऐसे भूमिहीन किसानों को निशाना बनाया जाता था जिनका बैंक में खाता हो। उनके बैंक खाते की डिटेल लेने के बाद किसान के नाम सैकड़ों बीघा जमीन दर्शाने वाली खतौनी का आवेदन किया जाता।

एसडीएम कार्यालय के भूलेख ऑपरेटर की मिलीभगत से इसे सत्यापित कर दिया जाता। खतौनी की इस सत्यापित प्रति के आधार पर किसानों से सस्ते में खरीदी गई उपज केंद्र पर एमएसपी पर बेची जाती। सूत्रों के अनुसार रमेश गुप्ता के परिवार के सदस्य के नाम भी 3200 बीघा जमीन होने की फर्जी खतौनी तैयार कर लाखों रुपये का खाद्यान्न बेचा गया।
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