फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Saved his life by jumping from the burning bogie, Arman got burnt in the flames

नई दिल्ली-दरभंगा स्पेलश ट्रेन में आग: यात्रियों की आपबीती, जलती बोगी से कूदकर बचाई जान; जले अरमान

Fri, 17 Nov 2023 12:38 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Fri, 17 Nov 2023 12:38 PM IST
सार

आग बुझने के बाद ट्रेन को कानपुर तक लाया गया। वहां से जली बोगियों की जगह दूसरी बोगियां लगाईं गईं। एसी थर्ड कोच में बैठी छपरा की रहने वाली सुषमा उसी स्लीपर कोच में सवार थी, जिसमें सबसे पहले आग लगी। सुषमा ने बताया कि आग लगते ही वह अपने दोनों बच्चों के साथ किसी तरह से ट्रेन से कूदकर बाहर निकलीं।

विज्ञापन
Saved his life by jumping from the burning bogie, Arman got burnt in the flames
ट्रेन में बैठे यात्री। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इटावा के पास ट्रेन में लगी आग बुझ जाने के बाद नई दिल्ली-दरभंगा क्लोन एक्सप्रेस बृहस्पतिवार सुबह करीब पौने सात बजे यात्रियों को लेकर गोरखपुर पहुंची। हादसे के चलते छह घंटे की देरी से चल रही इस बर्निंग ट्रेन के यात्री जल्दी यात्रा पूरी होने की प्रार्थना करते रहे। जिन तीन बोगियों में आग लगी थी, उनके कई यात्रियों के पास किराए के पैसे तक नहीं बचे थे। किसी की डिग्री लपटों में खाक हो गई थी तो किसी का पूजा का सामान जल गया था।
विज्ञापन


बुधवार शाम इटावा के पास नई दिल्ली-दरभंगा स्पेशल ट्रेन के स्लीपर कोच में आग लगी थी। आग बुझने के बाद ट्रेन को कानपुर तक लाया गया। वहां से जली बोगियों की जगह दूसरी बोगियां लगाईं गईं। एसी थर्ड कोच में बैठी छपरा की रहने वाली सुषमा उसी स्लीपर कोच में सवार थी, जिसमें सबसे पहले आग लगी।
विज्ञापन


सुषमा ने बताया कि आग लगते ही वह अपने दोनों बच्चों के साथ किसी तरह से ट्रेन से कूदकर बाहर निकलीं। पल भर में बोगी से लपटें निकलने लगीं। उनका बैग अंदर ही छूट गया। बैग में छठ पूजा के लिए खरीदे गए कपड़े, ट्रेन का टिकट, पांच हजार रुपये व अन्य सामान थे। सुषमा को एसी कोच के यात्रियों ने अपने साथ बैठाया और रास्ते में बच्चों को खाने-पीने का सामान दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसे भी पढ़ें: गोरखपुर में घर से बाजार तक उल्लास, छठ महापर्व आज से

स्लीपर कोच में सवार कुशीनगर के रामकोला निवासी राजेंद्र साहनी बताते हैं कि चलती ट्रेन में ही धुआं निकलने पर आग लगने का एहसास हो गया था। गनीमत थी कि ट्रेन की स्पीड कम थी और चेन पुलिंग करने पर कुछ ही देर में ट्रेन रुक गई।

गति धीमा होते ही जिसे जहां से मौका मिला, कूदकर बाहर निकल गया। ट्रेन से कूदने के कारण कुछ लोग घायल हुए तो वहीं बोगी में पीछे फंसे रह गए कुछ लोग झुलस भी गए, लेकिन खुद की जान खतरे में थी, तो बाकियों को कौन देखने वाला था।

इसे भी पढ़ें: युवक की मौत पर हंगामा, गोरखपुर-महराजगंज मार्ग पर लगाया जाम

रेल कर्मचारियों व सुरक्षा कर्मियों ने की मदद
हादसे की सूचना पर मौके पर पहुंचे अफसरों ने घायलों व झुलसे लोगों को इलाज के लिए भिजवाने के साथ ही इस बात की घोषणा कर दी कि सभी यात्रियों को दूसरी ट्रेन से सुरक्षित घर भेजा जाएगा, इसलिए किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। करीब ढाई घंटे बाद इस ट्रेन की जली बोगियाें को अलग कर बाकी ट्रेन को रवाना किया गया। इससे पहले सुरक्षा कर्मियों ने सभी को ट्रेन में चढ़ने के लिए कहा। जिसे जहां जगह मिली, वहीं घुस गया। कानपुर पहुंचने पर जली बोगियों की जगह तीन दूसरी बोगियां लगाई गईं। इसके बाद स्लीपर क्लास के यात्रियों को उसमें शिफ्ट किया गया।

एसी वाले यात्रियों ने दिखाया बड़ा दिल
इस हादसे के चलते करीब 250 यात्री प्रभावित हुए। इसमें से तमाम ऐसे थे, जिनके सामान व रुपये आदि भी जल गए। इसमें से 20 से अधिक ऐसी महिलाएं थीं, जिनके साथ छोटे बच्चे भी थे। इन महिलाओं को सुरक्षा कर्मियों व अन्य यात्रियों की मदद से एसी कोच में जगह दिलाई गई थी। एसी कोच में सवार यात्रियों ने मानवता दिखाते हुए इन यात्रियों के साथ न केवल हमदर्दी दिखाई, बल्कि उनकी आगे की यात्रा का भी इंतजाम कराया।

इसे भी पढ़ें: विसर्जन के दौरान डूबे किशोर का शव मिला, हत्या का केस

आग लगते ही बाेगी में हड़कंप मच गया। किसी यात्री ने चेन पुलिंग की तो ट्रेन की गति धीमी हुई। इसी दौरान कई यात्री हड़बड़ी में चलती ट्रेन से कूद गए। जिस तरह कूदे, उधर से दूसरी लाइन पर भी ट्रेन आ रही थी। किसी तरह से खुद को संभाला। - मदन, भागलपुर।

ट्रेन रुकते ही कूदकर बाहर निकल गए। लपटों से बचकर जब खुद को सुरक्षित पाया, तब याद आया कि बैग तो अंदर ही छूट गया। उसी बैग में कपड़े, हाईस्कूल से लेकर एमए तक की मार्कशीट और अन्य जरूरी सामान थे।
- अरविंद, गोरखपुर।

इसे भी पढ़ें: अमरमणि दो दिसंबर को पेश नहीं हुआ तो कुर्क होगी संपत्ति, बस्ती अपहरण केस में कोर्ट का रुख सख्त

समझ लीजिए कि मौत के मुंह से बचकर निकल आए। आग बुझने के बाद जब दुबारा ट्रेन में चढ़ने को कहा गया तो पूरा शरीर कांप रहा था। कानपुर स्टेशन तक आने के बाद भी कई यात्री इतने सहमे थे, कि वहीं उतर गए। लग रहा था कि कब छपरा स्टेशन दिख जाए। - संतोष सिंह, छपरा

हमारे कोच में ही सबसे पहले आग लगी थी। हम चार-पांच लोग गेट के पास ही थे, ट्रेन धीमी होते ही कूद गए। ऐसा डर था कि जूता पहनना तक भूल गए। नंगे पैर इधर-उधर भागते रहे। दोबारा जब ट्रेन में चढ़ने की बात हुई, तब याद आया कि जूते-कपड़े, रुपये सब तो ट्रेन में ही जल गए।-लक्ष्मी, भागलपुर।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed