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मधुमिता शुक्ला हत्याकांड: पहले पैरोल...जमानत, दोषी संतोष राय ने गोली मारकर की थी हत्या, पेट में पल रहा था गर्भ
Tue, 04 Feb 2025 01:09 PM IST
रोहित सिंह
रोहित सिंह, गोरखपुर
रोहित सिंह, गोरखपुर
Published by: रोहित सिंह
Updated Tue, 04 Feb 2025 01:09 PM IST
सार
अधिवक्ता हर्षवर्धन ने बताया कि दोषी याचिकाकर्ता लगभग 24 वर्षों से जेल में सजा काट रहा है। मधुमिता शुक्ला और मधुमणि की सजा माफी के बाद अधिवक्ता की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में सजा माफी की एक याचिका दाखिल की गई। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में सजा माफी की याचिका को सब्मिट करने का निर्देश दिया।
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Madhumita Shukla Murder Case
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कवयित्री मधुमिता शुक्ला की 2003 में सनसनीखेज हत्या के मामले में दोषी शूटर संतोष राय को उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सशर्त जमानत दे दी है। उच्च न्यायालय से पिछले माह जमानत मिलने के बाद संतोष राय जेल से बाहर है। बताया जा रहा है कि उसके परिवार में एकमात्र पिता ( 75) हैं। वह उनके साथ गोरखपुर में कहीं एकांत में जीवन बीता रहा है।
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सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उसकी पत्नी मधुमणि की सजा माफी के बाद अब संतोष राय भी सजा माफी की कवायद में जुटा है। पता चला है कि वह अधिवक्ता हर्षवर्धन मल्ल विशेन के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में सजा माफी की अपील कर सकता है।
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अधिवक्ता हर्षवर्धन ने बताया कि दोषी याचिकाकर्ता लगभग 24 वर्षों से जेल में सजा काट रहा है। मधुमिता शुक्ला और मधुमणि की सजा माफी के बाद अधिवक्ता की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में सजा माफी की एक याचिका दाखिल की गई। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में सजा माफी की याचिका को सब्मिट करने का निर्देश दिया।
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अधिवक्ता हर्षवर्धन की तरफ से उच्च न्यायालय में सजा माफी के साथ जमानत के लिए भी याचिका दाखिल कर दी गई। इस याचिका में कहा गया कि दोषी संतोष राय ने अभी तक मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में 23 वर्ष 6 माह की सजा काट ली है। इस दौरान मामले में सह अभियुक्त को उप्र सरकार की तरफ से सजा माफी भी दी जा चुकी है।
याचिकाकर्ता के पिता की उम्र लगभग 75 वर्ष हो गई है और वह उम्र के साथ गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में पिता के इलाज के लिए संतोष राय को अपने पिता के पास रहने की जरूरत है, ताकि वह उनकी देखभाल और उनका उपचार समय से करवा सके।
इन तथ्यों के साथ अधिवक्ता के पक्ष को सुनने के बाद उच्च न्यायालय की तरफ से संतोष राय को तीन महीने की जमानत दे दी गई। यह आदेश याचिकाकर्ता के जेल से बाहर निकलने के दिन से शुरू होगा। अधिवक्ता हर्षवर्धन ने बताया कि पहली बार इस मामले में किसी दोषी को कोर्ट की तरफ से जमानत दी गई है। इसके पहले संतोष पैरोल पर कुछ दिनों तक बाहर था।
उन्होंने बताया कि हत्या के किसी मामले में दोष सिद्ध होने पर 16 वर्ष के कारावास की सजा (आजीवन) पूरी होने के बाद दोषी सजा माफी के लिए योग्य हो जाता है। प्रदेश सरकार के पास सजा माफी के लिए अपनी याचिका भी दाखिल कर सकता है। संतोष राय की मां की मौत हो गई है। परिवार में पिता के अलावा दूसरा कोई नहीं है। ऐसे में अब जल्द ही न्यायालय के समक्ष सजा माफी की याचिका के साथ जाएंगे।
पूर्व में मिल चुकी है नौ माह की पेरोल
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हर्षवर्धन मल्ल विशेन ने बताया कि संतोष राय को 2022 में भी पेरोल मिली थी। इस अवधि में उसकी पेरोल बढ़ती गई। इसी बढ़े पेरोल के दौरान ही मां का निधन हो गया था। पेरोल की समय अवधि पूरी होने के बाद संतोष ने सरेंडर कर दिया। तब से लेकर संतोष राय अभी तक उत्तराखंड की जेल में ही था। स्थानीय सूत्रों की मानें तो संतोष फिलहाल गोरखपुर में है और पिता का इलाज करवा रहा है।
हत्याकांड में पांच लोग थे शामिल, एक की मौत
मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में सीबीआई ने जांच की थी। मामले में तत्कालीन पूर्व मंत्री अमरमणि, उसकी पत्नी मधुमणि सहित पांच लोगों को आरोपी बनाया था। अमरमणि और मधुमणि को हत्या की साजिश का आरोपी बनाया गया।
संतोष राय और रोहित चतुर्वेदी व प्रकाश पाण्डेय को हत्या और साजिश में आरोपी बनाया गया। इसमें से प्रकाश पांडेय की पिछले दिनों बीमारी के दौरान मौत हो गई थी। अमरमणि और मधुमणि की सजा माफ हो चुकी है। रोहित चतुर्वेदी अभी भी जेल में ही है।
28 मार्च को रोहित की सजा माफी पर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को रोहित की सजा माफी की याचिका पर समय सीमा तय करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि 28 मार्च को मामले की अगली सुनवाई होनी है। इस दौरान चतुर्वेदी की अंतरिम जमानत पर विचार किया जाएगा। दरअसल, पिछले 25 सालों से रोहित चतुर्वेदी जेल में ही है। इसी समयावधि को लेकर इनके अधिवक्ता ने पक्ष रखा कि अगर सजा माफी में देर हो सकती है तो रोहित को भी जमानत दी जाए।