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Sankashti Chaturthi 2021: जानिए कब है संकष्टी चतुर्थी व्रत, कैसे पूजन करने से भगवान गणेश होंगे प्रसन्न
Thu, 23 Sep 2021 02:43 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 23 Sep 2021 02:43 AM IST
सार
पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार, हिंदू धर्म में किसी भी कार्य की सफलता के लिए सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
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संकष्टी गणेश चतुर्थी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
संकष्टी गणेश चतुर्थी का पर्व 24 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महीने में दो चतुर्थी पड़ती है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रख विधि-विधान से प्रथम पूज्य भगवान गणेश का पूजन-अर्चन कर उन्हें प्रसन्न करते हैं।
गणेश चतुर्थी का महत्व
पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार, हिंदू धर्म में किसी भी कार्य की सफलता के लिए सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। गणेश के पूजन से भक्तों को सुख, समृद्धि और यश प्राप्ति होती है। वह सभी संकट से दूर करते हैं। मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी का व्रत करने से या फिर इस दिन गणपति की पूजा-अर्चना करने से सभी बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
गणेश चतुर्थी पूजन विधि
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, इस दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठें। नित्य क्रियाओं से निवृत्त होकर पवित्र आसन पर बैठें। फिर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजन सामग्री पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि एकत्रित कर क्रमश: भगवान गणेश की पूजा करें। उन्हें दूर्वा जरूर अर्पित करें। मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। पूजा के उपरांत सभी देवी-देवताओं का स्मरण करें। पूजा के अंत में गणेश जी की आरती करें। फिर प्रसाद का वितरण करें। अगले दिन दान-पुण्य कर व्रत का पारण करें।
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गणेश चतुर्थी का महत्व
पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार, हिंदू धर्म में किसी भी कार्य की सफलता के लिए सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। गणेश के पूजन से भक्तों को सुख, समृद्धि और यश प्राप्ति होती है। वह सभी संकट से दूर करते हैं। मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी का व्रत करने से या फिर इस दिन गणपति की पूजा-अर्चना करने से सभी बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
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गणेश चतुर्थी पूजन विधि
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, इस दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठें। नित्य क्रियाओं से निवृत्त होकर पवित्र आसन पर बैठें। फिर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजन सामग्री पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि एकत्रित कर क्रमश: भगवान गणेश की पूजा करें। उन्हें दूर्वा जरूर अर्पित करें। मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। पूजा के उपरांत सभी देवी-देवताओं का स्मरण करें। पूजा के अंत में गणेश जी की आरती करें। फिर प्रसाद का वितरण करें। अगले दिन दान-पुण्य कर व्रत का पारण करें।
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