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न्याय का इंतजार: मरने के बाद भी इस शख्स को नहीं मिल रहा इंसाफ, तहसील में फरियाद लेकर पहुंचे साधु शरण ने तोड़ दिया था दम
Thu, 07 Oct 2021 01:09 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 07 Oct 2021 01:09 PM IST
सार
17 जुलाई को खजनी तहसील में न्याय मांगने गए साधु शरण की मौत हो गई थी। दबाव में पुलिस ने भू-माफिया पर केस दर्ज कर लिया था, लेकिन समय के साथ उसे भी दबा दिया गया। जांच के नाम पर पुलिस की फाइल खुली है, लेकिन आज तक गिरफ्तारी तक नहीं हो सकी है।
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साधु शरण की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में अपनी जमीन की खतौनी ठीक कराने और कब्जा पाने के लिए कई साल से दौड़-भाग करने वाले खजनी खुटभार के साधु शरण विश्वकर्मा (65) को मौत के बाद भी न्याय नहीं मिल पा रहा है। उनकी मौत के बाद एक बारगी पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने मामले में तेजी दिखाई थी, लेकिन सारी कवायद दिखावा साबित हुई। दर्ज केस में पुलिस जांच जारी होने की दलील देती है। दूसरी ओर आरोपी बेरोकटोक घूम रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, दबाव में पुलिस ने भू-माफिया पर केस दर्ज कर लिया था, लेकिन समय के साथ उसे भी दबा दिया गया। जांच के नाम पर पुलिस की फाइल खुली है, लेकिन आज तक गिरफ्तारी तक नहीं हो सकी है। गांव में जाकर दावे करने वाले अफसर भी खामोश बैठ गए हैं। लेखपाल एक दिन के बाद दोबारा नहीं गए और पीड़ित परिवार खुद की बदनसीबी को ही अपनी नियति मानकर सिस्टम के सामने घुटने टेक चुका है। विवेचक संजय सिंह ने बताया कि पत्रावलियों की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, लेकिन इस जांच का अंत कब होगा, इसका उनसे कोई जवाब नहीं मिल सका।
79 दिन से जांच, नतीजा कुछ भी नहीं
न्याय की आस में परिवार को इंतजार करते 79 दिन गुजर चुके हैं। जब मौत हुई तो अफसर इस कदर दौड़े कि यही लगा था कि शायद साधु शरण को मौत के बाद ही सही, न्याय तो मिल ही जाएगा। हकीकत इसके उलट है। पिछले 79 दिन में पुलिस सिर्फ पत्रावली ही एकत्र कर पाई है और जांच जारी होने का हवाला दिया जाता है।
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साधु शरण को न्याय कब मिलेगा? आरोपी पकड़े जाएंगे या जांच में खेल हो गया है, इसकी जानकारी तो तब ही हो पाएगी जब चार्जशीट दाखिल की जाएगी। मगर इतना साफ है कि न्याय देने की इस प्रक्रिया ने ही साधु शरण के हिम्मत को तोड़ दिया था। बिना न्याय पाए ही उनकी मौत हो गई और परिवार वाले भी आस छोड़ ही चुके हैं।
यह हुआ था
17 जुलाई को संपूर्ण समाधान दिवस के दिन अपनी फरियाद लेकर साधु शरण खजनी तहसील में गए थे। यहां पर इंसाफ पाने की चाह में लाइन में लगे साधु शरण की मौत हो गई थी। पहले तो प्रशासनिक अफसरों ने मौत पर ही पर्दा डालने की कोशिश की लेकिन, फिर मामले के तूल पकड़ने पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था। एसडीएम खजनी पवन कुमार, सीओ खजनी इंदु प्रभा सिंह भी साधु शरण के घर पहुंच गईं।
अफसरों ने इंसाफ दिलाने के इतने बड़े-बड़े वादे किए कि साधु शरण के परिवार को लगा कि शायद उनकी मौत के बाद ही सही, इंसाफ तो मिल ही जाएगा। पुलिस ने इस मामले में जिनका नाम सामने आया था उसके खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने, धमकी देने की धारा के तहत केस दर्ज करने की औपचारिकता भी पूरी कर ली। पर इस मामले में आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
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जानकारी के मुताबिक, दबाव में पुलिस ने भू-माफिया पर केस दर्ज कर लिया था, लेकिन समय के साथ उसे भी दबा दिया गया। जांच के नाम पर पुलिस की फाइल खुली है, लेकिन आज तक गिरफ्तारी तक नहीं हो सकी है। गांव में जाकर दावे करने वाले अफसर भी खामोश बैठ गए हैं। लेखपाल एक दिन के बाद दोबारा नहीं गए और पीड़ित परिवार खुद की बदनसीबी को ही अपनी नियति मानकर सिस्टम के सामने घुटने टेक चुका है। विवेचक संजय सिंह ने बताया कि पत्रावलियों की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, लेकिन इस जांच का अंत कब होगा, इसका उनसे कोई जवाब नहीं मिल सका।
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79 दिन से जांच, नतीजा कुछ भी नहीं
न्याय की आस में परिवार को इंतजार करते 79 दिन गुजर चुके हैं। जब मौत हुई तो अफसर इस कदर दौड़े कि यही लगा था कि शायद साधु शरण को मौत के बाद ही सही, न्याय तो मिल ही जाएगा। हकीकत इसके उलट है। पिछले 79 दिन में पुलिस सिर्फ पत्रावली ही एकत्र कर पाई है और जांच जारी होने का हवाला दिया जाता है।
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साधु शरण को न्याय कब मिलेगा? आरोपी पकड़े जाएंगे या जांच में खेल हो गया है, इसकी जानकारी तो तब ही हो पाएगी जब चार्जशीट दाखिल की जाएगी। मगर इतना साफ है कि न्याय देने की इस प्रक्रिया ने ही साधु शरण के हिम्मत को तोड़ दिया था। बिना न्याय पाए ही उनकी मौत हो गई और परिवार वाले भी आस छोड़ ही चुके हैं।
यह हुआ था
17 जुलाई को संपूर्ण समाधान दिवस के दिन अपनी फरियाद लेकर साधु शरण खजनी तहसील में गए थे। यहां पर इंसाफ पाने की चाह में लाइन में लगे साधु शरण की मौत हो गई थी। पहले तो प्रशासनिक अफसरों ने मौत पर ही पर्दा डालने की कोशिश की लेकिन, फिर मामले के तूल पकड़ने पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था। एसडीएम खजनी पवन कुमार, सीओ खजनी इंदु प्रभा सिंह भी साधु शरण के घर पहुंच गईं।
अफसरों ने इंसाफ दिलाने के इतने बड़े-बड़े वादे किए कि साधु शरण के परिवार को लगा कि शायद उनकी मौत के बाद ही सही, इंसाफ तो मिल ही जाएगा। पुलिस ने इस मामले में जिनका नाम सामने आया था उसके खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने, धमकी देने की धारा के तहत केस दर्ज करने की औपचारिकता भी पूरी कर ली। पर इस मामले में आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।