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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Rudransh committed fraud of Rs 1.20 crore by posing as Kaushal...Bank removed three employees

Gorakhpur News:गोरखपुर का विजय माल्या-नीरव मोदी निकला रुद्रांश...बैंकों में पैठ बनाई फिर ठगा

Sat, 10 Feb 2024 05:41 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: रोहित सिंह Updated Sat, 10 Feb 2024 05:41 PM IST
सार

गोरखपुर में बैंकों से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऋण लेने में जालसाजी करने वाले रुद्रांश पांडेय का एक और कारनामा सामने आया है। उसने फर्जी दस्तावेजों पर एक और बैंक से 1.20 करोड़ रुपये का ऋण लेकर जालसाजी की थी।

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Rudransh committed fraud of Rs 1.20 crore by posing as Kaushal...Bank removed three employees
बैंक से लोन लेकर हड़पने वाला जालसाज गिरफ्तार। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

फर्जी दस्तावेज पर आईसीआईसीआई सहित कई बैंकों से करोड़ों का ऋण लेकर चूना लगाने वाले रुद्रांश पांडेय ने विजय माल्या और नीरव मोदी की तरह पहले बैंकों में पैठ बनाई फिर मोटा चूना लगा दिया। पुलिस की जांच में अब परत दर परत रुद्रांश के कारनामे सामने आ रहे हैं। बैंक में उसकी पैठ इस कदर थी कि दो प्राइवेट बैंकों से दो करोड़ से अधिक का ऋण लेने और उसे नहीं चुकाने के बावजूद उसने दूसरे बैंकों में जालसाजी की पटकथा तैयार कर ली। पुलिस ने उसका पूरा काला चिट्ठा बैंक के सामने रख दिया है, लेकिन अब अपनों की गर्दन फंसती देख बैंक प्रबंधन ने ही कदम पीछे खींच लिए हैं।

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बांसगांव का रहने वाला रुद्रांश पांडेय एक-एक कर तीन प्राइवेट बैंकों से ऋण लिया है। आईसीआईसीआई बैंक से उसने 4.45 करोड़ रुपये का ऋण लिया। रकम एक करोड़ से ज्यादा होने की वजह से बैंक कर्मियों ने अपनी नौकरी बचाने के लिए पुलिस में केस दर्ज करा दिया। पुलिस ने जांच शुरू की तो सिस्टम का खेल सामने आ गया।
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पुलिस की जांच में यह भी सामने आ चुका है कि उसने आईसीआईसीआई के अलावा एक बैंक से 80 लाख और दूसरे प्राइवेट बैंक से 1.20 करोड़ रुपये का ऋण लिया। जिस बैंक से उसने 80 लाख रुपये लिए और न चुकाने पर उसे काली सूची में डाला गया, वहीं पर रुद्रांश ने नया खाता भी खुलवा लिया। बैंक प्रबंधन ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
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अभी तक दोनों बैंकों की ओर से पुलिस में केस दर्ज नहीं कराया गया है। जांच में जुटी पुलिस चाहती है कि आईसीआईसीआई बैंक ने जो केस दर्ज कराया है, उसी में बैंक कर्मियों सहित पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर दिया जाए। इससे एक संदेश भी जाएगा कि किसी ने इस फर्जी तरीकों से ऋण दिया तो बच नहीं पाएगा। मगर, यह जांच भी अभी भी बैंक तक जाकर रुकी है। बैंक की ओर से अपने दोषी कर्मचारियों का नाम ही नहीं बताया जा रहा है।

ऐसे करता था जालसाजी

अब तक पुलिस जांच में जो सामने आया है, उसके मुताबिक, रुद्रांश की एक सीए से गहरी दोस्ती है। उसके पैड का इस्तेमाल किया है। जानकार बातते हैं, किसी भी फर्म को अगर सीए सत्यापित करके दे देता है तो बैंक फिर उसकी बहुत जांच नहीं करता है। रुद्रांश ने भी ऐसे ही फर्जी दस्तावेज पर ऋण लिया है। उसने सीए से अपने कागजात को सत्यापित कराया और फिर बैंक के चुनिंदा परिचित लोगों से पैरवी कराकर लोग हासिल किया है। आशंका तो यह भी है कि इस काम को करने के लिए बैंक कर्मचारियों का भी अपना हिस्सा है, लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

 

 

एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि पुलिस की जांच में बैंक कर्मचारियों और सीए की भूमिका संदिग्ध आ चुकी है। पुलिस ने बैंक से पत्राचार भी किया है, लेकिन अभी तक बैंक की ओर से सटीक जवाब नहीं आया है कि किस कर्मचारी ने बिना जांच पड़ताल के करोड़ों का ऋण दे दिया है। पुलिस बैंक अधिकारियों के संपर्क में है। जल्द ही आरबीआई और आईसीआई बैंक के हेड क्वाटर को भी पत्र भेजा जाएगा। इस पूरे गिरोह में जो भी शामिल है, सब पर पुलिस साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करेगी।

लीड बैंक के मैनेजर मनोज कुमार ने बताया कि ऋण देने को लेकर पहले से ही सख्त गाइड लाइन है। हाउसिंग लोन में तहसील से दस्तावेजों की जांच, वैरीफाई कराया जाता है। जालसाजी के मामले सामने आने के बाद गाइड लाइन की निगरानी सख्ती से करने का निर्देश दिया गया है। सर्किल स्तर पर सभी को प्रबंधकों की इसकी जानकारी दी गई है। मुंबई हेड आफिस से कोई नई गाइड लाइन जारी नहीं हुई है।

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