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रुद्रांश मामला : बैंक के स्टेट हेड से पुलिस बोली.. आरोपी का नाम बताएं

Fri, 16 Feb 2024 04:18 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 16 Feb 2024 04:18 AM IST
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Rudransh case: Police asked the state head of the bank to tell the name of the accused.
शाहपुर थाने में आए स्टेट हेड ने पुलिस से संपर्क कर बताया कि एजेंसी के लोग करते हैं सत्यापन
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रुद्रांश के ट्रक चालक के नाम पर ढाई करोड़ का हुआ है ऋण, दोषी को जाना ही होगा जेल
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। फर्जी दस्तावेज पर आईसीआईसीआई बैंक से 4.45 करोड़ रुपये का ऋण लेने वाले रुद्रांश प्रकरण की जांच में फंसे बैंक कर्मचारियों के बारे में सफाई देने आए स्टेट हेड से पुलिस ने दो टूक कहा, दोषी का नाम बताएं। पुलिस का तर्क है कि रुद्रांश ने अपने साथ ही अपने चालक रियाज को ढाई करोड़ रुपये का ऋण दिया, जबकि उसके नाम पर फर्जी बैनामा तक की जमीन नहीं है। फिर बैंक ने कैसे सत्यापित कर ऋण दे दिया।
पुलिस ने स्टेट हेड से कहा कि अगर, वह जल्द दोषी कर्मचारियों का नाम नहीं देंगे तो फिर आरबीआई और हेड ऑफिस को पत्र भेजा जाएगा। इतना ही नहीं, जरूरत पड़ी तो बैंक के लेनदेन का आडिट कराने के लिए भी पुलिस पत्र भेजेगी।
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दरअसल, इस पूरे प्रकरण में एक बात तो साफ है कि बैंक में अपनी पैठ के दम पर ही रुद्रांश ने फर्जी बैनामा कराकर पहले ऋण लिया और फिर अपने ट्रक ड्राइवर रियाज के नाम से ढाई करोड़ रुपये का ऋण करा दिया। बैंक की ओर से इतनी बड़ी रकम देने से पहले जांच भी नहीं की गई। पुलिस ने इसे लेकर बैंक से संपर्क कर दोषी कर्मचारियों का नाम भी मांगा, लेकिन अब तक नहीं बताया कि वह कौन दोषी कर्मचारी हैं, जिसकी वजह से इतनी बड़ी रकम बैंक की डूब गई।
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अब स्टेट हेड भी पुलिस के पास आए तो यही बताए कि प्राइवेट एजेंसी से सत्यापन कराया जाता है, लेकिन वह कौन है, यह नहीं बता पाए। अब इतने बढ़े मामले में बैंक की ओर से की जा रही लापरवाही को पुलिस ने गंभीरता से लिया है। पुलिस ने स्टेट हेड से यही कहा है कि जल्द से जल्द दोषी कर्मचारी का नाम बताया जाए। क्याेंकि, पुलिस ने अपने स्तर से जांच कर ली है और यह भी पता चला है कि कर्मचारी का रुद्रांश के साथ रात में बैठकी भी होती थी।
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रुद्रांश ने फर्जी बैनामा से नगर निगम में दर्ज कराया था नाम
रुद्रांश का नगर निगम में नाम दर्ज कराने की जांच में भी सामने आया है कि उसने फर्जी बैनामा के आधार पर अपना नाम दर्ज कराया है। अपर नगर आयुक्त निरंकार सिंह ने बताया है कि रुद्रांश की नगर निगम में कोई गहरी पैठ नहीं है, बल्कि पंजीकृत बैनामा के आधार पर क्रेता नगर निगम एसेसमेंट रजिस्टर में अपना नाम अंकित करा सकता है। जब तक पंजीकृत बैनामा किसी सक्षम न्यायालय से निरस्त नहीं किया जाता, तब तक पंजीकृत बैनामा के कानूनी प्रभाव से इन्कार नहीं किया जा सकता। इसके अतिरिक्त नगर निगम में सिर्फ टैक्स की अदायगी के लिए एसेसमेंट रजिस्टर में क्रेता का नाम अंकित किया जाता है। एसेसमेंट रजिस्टर में नाम दर्ज होने से स्वामित्व की पुष्टि नहीं होती है। यदि पंजीकृत बैनामा कूटरचित है तो क्षुब्ध पक्ष, सक्षम न्यायालय से बैनामा को निरस्त कराकर, नगर निगम को साक्ष्य सहित सूचित करें, तब नगर निगम निरस्त बैनामा के आधार पर नगर निगम में अंकित नाम को खारिज करने की कार्रवाई करेगा। जब तक पंजीकृत बैनामा निरस्त नहीं हो जाता जब तक उसका कानूनी प्रभाव बरकरार रहता है।

कोट

बैंक से एक ट्रक चालक को ढाई करोड़ रुपये तक का ऋण दे देना गंभीर बात है। पुलिस का रुख साफ है, जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई होनी ही है। बैंक के स्टेट हेड से भी कहा गया है कि वह जल्द से जल्द आरोपी कर्मचारी का नाम बता दें, नहीं तो फिर पुलिस की ओर से आरबीआई और हेड ऑफिस को भी पत्र भेजा जाएगा। पुलिस अपनी कार्रवाई पूरी करेगी, गिरोह में जो भी शामिल हैं, उन सब पर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. गौरव ग्रोवर, एसएसपी
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