बाल विकास परियोजना अधिकारी ने मोपेड से की ड्यूटी, कार बताकर एक लाख से ज्यादा का करा लिया भुगतान
- जिस वाहन की फिटनेस खत्म या फिर टैक्स नहीं जमा, उसे भी संबद्ध किया
- मिनी वैन को भी संबद्ध करके भुगतान किया गया
- बिहार के चारा घोटाले की तर्ज पर वाहनों के फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबरों पर भुगतान का खेल
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बाल विकास परियोजना में परियोजना अधिकारी ने पांच माह तक इस्तेमाल के बाद जिस वाहन नंबर का उल्लेख करते हए एक लाख रुपए से अधिक कार के मद में भुगतान किया, उस रजिस्ट्रेशन नंबर पर मोपेड पंजीकृत है।
यह इकलौती गड़बड़ी नहीं, परियोजना में किराए के वाहनों की संबद्धता और संचालन के संबंध में सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी में ऐसे कई अजीबोगरीब सच सामने आए हैं। बिल्कुल बिहार के चारे घोटाले में फर्जी वाहन नंबर पर भुगतान देने के तर्ज पर हुए, इस खेल पर विभागीय अधिकारी कुछ मामलों को लिपकीय त्रुटि करार दे रहे हैं, तो कुछ पर उन्हें कोई जवाब सूझ नहीं रहा है।
राप्ती नगर के आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्र ने बाल विकास परियोजना से संबद्ध और संचालित वाहनों, उनके डीजल व पेट्रोल पर खर्च का ब्योरा मांगा था। इसकी सूचना पांच जून को मिली है। इसके बाद ही तमाम अनियमितताएं सामने आई हैं।
रजिस्टेशन नंबर मोपेड का, कार बताकर एक लाख से ज्यादा का भुगतान
नियम है कि कामर्शियल वाहनों को ही किराए पर लिया जाएगा, फिर भी दो वित्तीय वर्ष के लिए निजी वाहन को संबद्ध कर लिया गया। निजी वाहन के मालिक को 2.88 लाख रुपये का भुगतान भी हुआ। जिस मैक्सिमो मिनी वैन (यूपी 53 सीटी 3525) का संचालन स्कूली वाहन या फिर सवारी गाड़ी के रूप में होता है, रिकॉर्ड के मुताबिक उससे बांसगांव के बाल विकास परियोजना अधिकारी राहुल राय ने ड्यूटी की है।
वित्तीय वर्ष 2019-20 में इस वाहन के मालिक को 1 लाख 2 हजार 500 रुपये बतौर किराया दिया गया है। वाहन की संबद्धता पांच महीने दिखाई गई है। आरटीआई कार्यकर्ता के मुताबिक अभी वित्तीय वर्ष 2018-2019 और 2019-20 की जानकारी मिली है। इससे पहले या फिर वर्तमान में संचालित वाहनों की सूची मिली तो और बड़ा ‘खेल’ सामने आएगा।
मोपेड (यूपी 53 सीजे-5762) को कार बताकर बाल विकास परियोजना से संबद्ध कर दिया गया। इससे सहजनवां के बाल विकास परियोजना अधिकारी संजय शर्मा ने पांच महीने तक ड्यूटी भी की, फिर मोपेड मालिक को अक्तूबर 2019 से मार्च 2020 तक 102500 (एक लाख दो हजार पांच सौ) रुपये बतौर किराया दिया गया। मोपेड को 21 अक्तूबर 2019 को ही परियोजना से संबद्ध किया गया था। मोपेड मिश्रीलाल के नाम से पंजीकृत है।
आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्रा ने बताया कि वाहनों की संबद्धता व उसके संचालन में भ्रष्टाचार हुआ है। आरटीआई के तहत वाहनों की जो सूचना दी गई, उसमें मोपेड व मिनी वैन का भी नंबर है। यह भी है कि एक अधिकारी मोपेड से पांच महीने तक चले, फिर उसके एवज में एक लाख 2 हजार 500 रुपये का भुगतान किया गया। पूरे मामले की लिखित जानकारी जिलाधिकारी को दी है। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री के जन सुनवाई पोर्टल पर भी की है। इसके हर जिम्मेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
गोरखपुर जिला कार्यक्रम अधिकारी हेमंत सिंह ने बताया कि लिपिकीय त्रुटि की वजह से मोपेड, मिनी वैन का नंबर आरटीआई की सूचना में चला गया। इसकी जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता को दी जा चुकी है।
जो वाहन संबद्ध किए जाते हैं, उन्हें एआरटीओ की मौजूदगी वाली कमेटी फाइनल करती है। किस वाहन का टैक्स जमा है या फिटनेस खत्म हो गया, इसकी जानकारी नहीं है। जिसे 10 सीटर मैक्सी कैब कहा जा रहा है, वह वाहन रीनाल्ट का है। निजी वाहन की संबद्धता कैसे हुई, इसे भी दिखवाया जाएगा।
गोरखपुर सीडीओ हर्षिता माथुर ने बताया कि यह मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उस हिसाब से आगे की कार्रवाई होगी।