Rowing Game: गोरखपुर से तैयार होगी रोइंग खिलाड़ियों की नर्सरी, देश के मानचित्र पर उभरेगा रामगढ़ताल
क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी आले हैदर ने कहा कि रामगढ़ताल की पहचान पर्यटन स्थल के रूप में थी, लेकिन रोइंग प्रतियोगिता के बाद अब इस ताल को खेल के भी मानचित्र पर पहचान मिल गई है। यहां रोइंग कोच की नियुक्ति कर दी गई है, जल्द ही प्रशिक्षण शुरू करा दिया जाएगा।
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रामगढ़ताल से रोइंग खिलाड़ियों की पौध तैयार होगी। खेल विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। जल्द ही यहां रोइंग का प्रशिक्षण शुरू होगा जिसके बाद यहां से निकले खिलाड़ी देश ही नहीं विदेश में भी गोरखपुर का नाम रोशन करेंगे।
खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में पहली बार रोइंग खेल को शामिल किया गया और इसकी मेजबानी गोरखपुर के रामगढ़ताल को मिली। पर्यटन स्थल के रूप मेें पहचाने जाने वाले रामगढ़ताल को रोइंग प्रतियोगिता के बाद देश में रोइंग के लिए सबसे बेहतरीन ताल के रूप में पहचान मिल चुकी है।
चाहे रोइंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की अध्यक्ष राजलक्ष्मी सिंह हो या पूर्व अध्यक्ष कर्नल सीपी सिंह, सभी ने रामगढ़ताल की सराहना की और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए उपयुक्त बताते हुए रोइंग ट्रेनिंग का हब बनाने की बात कही।
रामगढ़ताल से रोइंग खिलाड़ी तैयार करने के लिए खेल विभाग ने रोइंग कोच नेशलन खिलाड़ी गणेश निषाद की नियुक्ति कर दी है। वहीं जर्मनी से 20 बोट मंगाने के साथ ही अन्य जरूरी सामान मंगाने की प्रक्रिया भी शुरू करा दी गई है। अगस्त के शुरुआत में यहां बोट के आ जाने की उम्मींद है।
अगले सप्ताह से यहां खिलाड़ियों का प्रशिक्षण शुरू करा दिया जाएगा। पहले 14 से 18 आयु वर्ग के बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अंतर्गत पहले स्वीमिंग और फिजिकल प्रशिक्षण देकर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाया जाएगा। इसके बाद रोइंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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10 से 20 लाख तक की है बोट
सिंगल : 10 लाख रुपये
डबल : 15 लाख रुपये
क्वाड्रपल : 20 लाख रुपये
प्रयागराज की टीम लेती है भाग
रोइंग प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश की बात की जाए तो सिर्फ प्रयागराज की राजेंद्र सिंह यूनिवर्सिटी की टीम खेलती है। रामगढ़ताल में आयोजित खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के अंतर्गत हुई रोइंग प्रतियोगिता में प्रयागराज की टीम ने 500 मीटर सिंगल और स्वाड्रपल में प्रतिभाग किया था, लेकिन तैयारी के अभाव में सभी स्पर्धाओं में टीम को हार का मुंह देखना पड़ा था। रामगढ़ताल में प्रशिक्षण शुरू होने के बाद यहां से निकलने वाले खिलड़ी देशभर में नाम करेंगे।
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वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनेगा मददगार
वाटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग ने रामगढ़ताल क्षेत्र में 54 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के पहले वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण कराया है। रोइंग प्रतियोगिता के लिए देशभर से आए खिलाड़ियों ने वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की खूब तारीफ की और कहा कि इससे बेहतर वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स देश में और कहीं नहीं है। यहां रोइंग प्रशिक्षण शुरू होने के बाद आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं के लिए वाटर स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स काफी मददगार साबित होगा।
लोगों ने क्या कहा
रामगढ़ताल की पहचान पर्यटन स्थल के रूप में थी, लेकिन रोइंग प्रतियोगिता के बाद अब इस ताल को खेल के भी मानचित्र पर पहचान मिल गई है। यहां रोइंग कोच की नियुक्ति कर दी गई है, जल्द ही प्रशिक्षण शुरू करा दिया जाएगा।: आले हैदर, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी
गोरखपुर में रोइंग के खिलाड़ियों को तैयार करना है। दो महीने में जर्मनी से बोट आ जाएगी। बच्चों का चयन कर जल्द ही प्रशिक्षण शुरू होगा। शुरुआत में बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया जाएगा।: गणेश निषाद, रोइंग कोच
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उत्तर प्रदेश में रोइंग का कोई स्कोप नहीं था, इसलिए देवरिया छोड़कर पंजाब जाकर रोइंग का प्रशिक्षण लेना पड़ा। अगर गोरखपुर में रोइंग का प्रशिक्षण शुरू हुआ तो देश को अच्छे रोइंग के खिलाड़ी गोरखपुर से मिलने लगेंगे।: शोभित पांडेय, रोइंग खिलाड़ी, देवरिया
रामगढ़ताल रोइंग के लिए बेहतर है। यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं हो सकती हैं, साथ ही देश का बेहतरीन प्रशिक्षण संस्थान के रूप में भी इसे पहचान मिल सकती है। अगर ऐसा हुआ तो हम जैसे खिलाड़ियों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा। : किशन पांडेय, रोइंग खिलाड़ी, देवरिया