गोरखपुर: आरएमआरसी को मिली बीएसएल-थ्री मोबाइल लैब, सीएम योगी करेंगे लोकार्पण
टीबी, जेई, कोरोना, कैंसर समेत कई बीमारियों की मौके पर हो सकेगी जांच, मई के पहले सप्ताह में आएगी मोबाइल लैब, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे लोकार्पण।
विस्तार
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) को मोबाइल बायोसेफ्टी लेवल-थ्री (बीएसएल-थ्री) लैब मई के पहले सप्ताह में मिल जाएगी। यह एक बस में होगी, जिसकी लंबाई सामान्य बस से डेढ़ गुना अधिक होगी। लैब में आधुनिक सुविधाएं मौजूद रहेंगी।
खास बात यह है कि चलते-फिरते इस लैब में जांच और शोध संक्रमित क्षेत्रों में जाकर हो सकेंगे। लैब में टीबी, जापानी इंसेफेलाइटिस, कैंसर, कोरोना जैसी गंभीर बीमारियों की जांच भी मौके पर हो सकेगी। आरएमआरसी के मीडिया प्रभारी डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि लैब मई के पहले सप्ताह में मिल जाएगी। इसका लोकार्पण तीसरे सप्ताह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।
संक्रमित होने का खतरा न के बराबर
डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि लैब में कर्मचारियों के संक्रमित होने का खतरा बेहद कम होता है। इसमें कर्मचारी विशेष पीपीई किट, ग्लब्स व फेस मास्क पहनकर काम करेंगे। इसमें हर जांच के लिए पूरी तरह से एयर प्रूफ अलग-अलग क्यूब बने हैं। लैब में बाहर से हवा भी अंदर नहीं जा सकेगी। अंदर मौजूद संक्रमित हवा को फिल्टर करके ही बाहर निकाला जाएगा। लैब के अंदर प्रयोग होने वाला पानी भी विसंक्रमित कर दिया जाएगा।
आधुनिक मशीनों से सुसज्जित है लैब
डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि लैब में आरटीपीसीआर मशीन, एलाइजा मशीन, टीबी एवं अन्य बैक्टीरिया की जांच के लिए सीबीनेट मशीन, आरएनए एक्सट्रेक्टर और एडवांस जांच की मशीनें भी हैं। यह बीएसएल-थ्री लैब कई मामलों में बेहद खास है। लैब में येलो फीवर वायरस, वेस्ट नाइल वायरस, कोरोना वायरस, स्वाइन फ्लू वायरस और मर्स वायरस पर शोध हो सकेगा है। उनकी जीन की जांच और पहचान दोनों मौके पर ही हो सकेगी। लैब में ड्रग रेजिस्टेंट टीबी बैक्टीरिया पर भी शोध हो सकेगा। आधुनिक रूप से इस लैब को बनाया गया है।
नेक्स्ट जीनोम सीक्वेंसर मशीन का ट्रायल अगले सप्ताह
आरएमआरसी को जांच के लिए जीनोम सीक्वेंसर मशीन मिल गई है। इसे आरएमआरसी के लैब में इंस्टाल करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। दो से तीन दिनों के अंदर मशीन इंस्टाल हो जाएगी। इसके बाद अगले सप्ताह इसका ट्रायल होगा। ट्रायल के दौरान जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए रैंडम नमूना लिया जाएगा। जांच रिपोर्ट आईसीएमआर को भेजी जाएगी। आईसीएमआर से अनुमति के बाद मरीजों की जीनोम सीक्वेंसिंग की जांच शुरू होगी। डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि यह मशीन जर्मनी से आई है। इसी से वायरस के नए वैरिएंट का पता लगाया जाता है।