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गोरखपुर: छह करोड़ रुपये का धान लेकर राइस मिलर लापता, जांच में जुटे विभागीय अधिकारी
Thu, 15 Jul 2021 10:15 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 15 Jul 2021 10:15 AM IST
सार
पीसीएफ की ओर से कूटने के लिए दिए गए धान सहित गायब है मिलर।
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सहजनवां में बंद राइस मिल।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर जिले के सहजनवां ब्लॉक का एक राइस मिलर करीब छह करोड़ रुपये का सरकारी धान लेकर लापता है। बताया जा रहा है कि विभिन्न एजेंसियों द्वारा खरीदे गए धान को मिलर को कूट कर चावल अलग करने के लिए दिया गया था। अब मिल में ताला लगा हुआ है और सरकारी धान भी गायब है। हालांकि अधिकारी अभी इस बारे में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक किसानों से खरीदे गए धान को कूट कर चावल बनाने के लिए विभिन्न मिलिंग कंपनियों का चयन किया जाता है। चयन के बाद इन कंपनियों को कूटने के लिए धान आवंटित किया जाता है। सरकारी एजेंसियां इसके लिए बाकायदा मिल की स्थिति, मिलिंग क्षमता, मिलर की आर्थिक स्थिति आदि का सत्यापन करती हैं।
सत्यापन के बाद ही मिलर को धान आवंटित किया जाता है। मिलर को कितना धान दिया गया, उसमें से निकलने वाले चावल, भूसी की अनुमानित मात्रा भी दर्ज की जाती है। मिलर निर्धारित समय सीमा में धान कूट कर चावल भारतीय खाद्य निगम को सौंपता है।
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इलाके में चर्चा है कि पीसीएफ की ओर से सहजनवां ब्लॉक क्षेत्र स्थित एक मिलर को करीब छह करोड़ रुपये कीमत का धान कूटने के लिए दिया गया था। निर्धारित समय बीतने के बाद भी मिलर ने पीसीएफ को चावल का एक दाना भी नहीं दिया।
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जानकारी के मुताबिक किसानों से खरीदे गए धान को कूट कर चावल बनाने के लिए विभिन्न मिलिंग कंपनियों का चयन किया जाता है। चयन के बाद इन कंपनियों को कूटने के लिए धान आवंटित किया जाता है। सरकारी एजेंसियां इसके लिए बाकायदा मिल की स्थिति, मिलिंग क्षमता, मिलर की आर्थिक स्थिति आदि का सत्यापन करती हैं।
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सत्यापन के बाद ही मिलर को धान आवंटित किया जाता है। मिलर को कितना धान दिया गया, उसमें से निकलने वाले चावल, भूसी की अनुमानित मात्रा भी दर्ज की जाती है। मिलर निर्धारित समय सीमा में धान कूट कर चावल भारतीय खाद्य निगम को सौंपता है।
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इलाके में चर्चा है कि पीसीएफ की ओर से सहजनवां ब्लॉक क्षेत्र स्थित एक मिलर को करीब छह करोड़ रुपये कीमत का धान कूटने के लिए दिया गया था। निर्धारित समय बीतने के बाद भी मिलर ने पीसीएफ को चावल का एक दाना भी नहीं दिया।
चर्चा है कि जब विभाग के अधिकारियों ने मिलर से संपर्क साधने का प्रयास किया तो पता चला कि मालिक कंपनी बंद कर कहीं चला गया है। सकते में आए अधिकारियों ने आनन- फानन धान या कुटा हुआ चावल कब्जे में लेने की कवायद शुरू की लेकिन कुछ भी हाथ नहीं लगा। मिल में धान या चावल भी नहीं मिला।
धोखाधड़ी की आशंका होने पर अब अधिकारी मिलर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार विभागीय अधिकारियों ने मिलर के खिलाफ स्थानीय थाने में तहरीर दी है, हालांकि अधिकारी इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं। थानाध्यक्ष सहजनवां राज प्रकाश सिंह ने बताया कि पीसीएफ के अधिकारी ने तहरीर दी है मामले की जांच की जा रही है।
पीसीएफ जिला प्रबंधक सोमनाथ ने बताया कि मिलर के भागने का मामला संज्ञान में आया है विभागीय जांच की जा रही है। जांच के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की दिशा तय की जाएगी।
आरएफसी डिप्टी आरएमओ राकेश मोहन पांडेय ने बताया कि विभागीय मुकदमे के सिलसिले में उच्च न्यायालय आया हुआ हूं, मामले की जानकारी नहीं है। गोरखपुर पहुंच कर मातहतों से इस संबंध में आख्या मांगूंगा। आख्या मिलने के बाद ही कुछ बता सकूंगा।
धोखाधड़ी की आशंका होने पर अब अधिकारी मिलर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार विभागीय अधिकारियों ने मिलर के खिलाफ स्थानीय थाने में तहरीर दी है, हालांकि अधिकारी इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं। थानाध्यक्ष सहजनवां राज प्रकाश सिंह ने बताया कि पीसीएफ के अधिकारी ने तहरीर दी है मामले की जांच की जा रही है।
पीसीएफ जिला प्रबंधक सोमनाथ ने बताया कि मिलर के भागने का मामला संज्ञान में आया है विभागीय जांच की जा रही है। जांच के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की दिशा तय की जाएगी।
आरएफसी डिप्टी आरएमओ राकेश मोहन पांडेय ने बताया कि विभागीय मुकदमे के सिलसिले में उच्च न्यायालय आया हुआ हूं, मामले की जानकारी नहीं है। गोरखपुर पहुंच कर मातहतों से इस संबंध में आख्या मांगूंगा। आख्या मिलने के बाद ही कुछ बता सकूंगा।